42 साल जिंदा लाश बनकर तड़पीं थीं अरुणा शानबाग… हरीश राणा केस से फिर छिड़ी Right to Die की बहस

लाइव हिन्दुस्तान, गाजियाबाद
Follow us on Google News
share

सुप्रीम कोर्ट ने गाजियाबाद के हरीश राणा को मरने की अनुमति (पैसिव इच्छामृत्यु) दे दी है। वो करीब 13 सालों से मशीनों के सहारे जिंदा हैं। इसके बाद से एक बार फिर मरने का अधिकार (Right to Die) की बहस शुरू हो गई है। भारत में ये बहस सबसे पहले अरुणा शानबाग मामले में शुरू हुई थी। 

42 साल जिंदा लाश बनकर तड़पीं थीं अरुणा शानबाग… हरीश राणा केस से फिर छिड़ी Right to Die की बहस

सुप्रीम कोर्ट ने गाजियाबाद के हरीश राणा को मरने की अनुमति (पैसिव इच्छामृत्यु) दे दी है। वो करीब 13 सालों से मशीनों के सहारे जिंदा हैं। इसके बाद से एक बार फिर मरने का अधिकार (Right to Die) की बहस शुरू हो गई है। भारत में ये बहस सबसे पहले अरुणा शानबाग मामले में शुरू हुई थी।

सफाईकर्मी ने नर्स से की थी हैवानियत

अरुणा मुंबई के KEM अस्पताल में एक नर्स थीं। 27 नवंबर 1973 को वो अपनी ड्यूटी खत्म करके घर लौट रही थीं। लेकिन तभी अस्पताल के सफाईकर्मी सोहनलाल वाल्मीकि ने उन पर हमला कर दिया। सोहनलाल के ऊपर हैवानियत का भूत सवार था। उसने कुत्ते की चेन से अरुणा का गला घोंटा और उनका रेप किया।

जिंदा लाश बन गईं थीं अरुणा

हमला इतना घातक था कि उनके दिमाग तक ऑक्सीजन जानी रुक गई। इससे उनका दिमाग बुरी तरह प्रभावित हो गया। रीढ़ की हड्डी में भी गंभीर चोट आई थी। डॉक्टरों के मुताबिक इस हमले के चलते वो वेजिटेटिव स्टेज में चली गईं, यानी अचेत अवस्था में। न बोल सकतीं। न हिल सकतीं। एक आम इंसान जो भी हरकतें करता है, उसे कर पाने में असमर्थ हो गईं- यानी जिंदा लाश बन गईं।

42 सालों तक तड़पती रहीं अरुणा

डॉक्टर उनकी देखभाल में लगे रहे। परिवार वालों ने साथ देना छोड़ दिया। एक एक कर उनसे मिलने वालों की संख्या कम होती चली गई। जिस इंसान के साथ रिलेशनशिप में थीं, उसने भी मिलना जुलना बंद कर दिया और नए सफर की शुरूआत कर ली। अरुणा करीब 42 साल तक तड़प-तड़प कर एक-एक पल जीने को मजबूर बनी रहीं।

पिंकी विरानी ने लड़ी लड़ाई

जब परिवार-प्यार ने साथ छोड़ दिया, तो एक लेखिका और पत्रकार आगे आईं। साल 2009 में लेखिका और पत्रकार पिंकी विरानी ने सुप्रीम कोर्ट में अरुणा शानबाग के लिए इच्छामृत्यु की अनुमति मांगते हुए याचिका दायर की। उन्होंने खुद को अरुणा का “नेक्स्ट फ्रेंड” बताया।

इच्छामृत्यु की अनुमति मिली, लेकिन अटका मामला

2011 में सुप्रीम कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए भारत में “पैसिव इच्छामृत्यु” को सीमित शर्तों के साथ अनुमति दी। हालांकि अदालत ने अरुणा शानबाग के मामले में इच्छामृत्यु की अनुमति नहीं दी क्योंकि अस्पताल के कर्मचारी उन्हें जीवित रखना चाहते थे। मामला फिर अटक गया।

लेकिन करीब 7 सालों बाद अदालत ने फैसला सुनाया। 2018 में सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने “गरिमा के साथ मरने के अधिकार” को मौलिक अधिकार मानते हुए पैसिव इच्छामृत्यु को पूरी तरह वैध कर दिया। साथ ही “लिविंग विल” की भी अनुमति दी।

पैसिव इच्छामृत्यु- लाइफ सपोर्ट सिस्टम का हटाना

पैसिव इच्छामृत्यु का मतलब है अगर किसी मरीज के ठीक होने की उम्मीद बिल्कुल खत्म हो चुकी है, तो उसे दिए जा रहे लाइफ सपोर्ट सिस्टम या उपचार को हटा दिया जाता है। इसमें डॉक्टर मरीज को मारने के लिए कोई स्पेशल कदम नहीं उठाते, बल्कि केवल ऐसी मशीनों को हटा लेते हैं, जिनकी मदद से उसे जिंदा रखा गया होता है।

right to die

13 सालों से मशीनों के सहारे जिंदा हैं हरीश राणा

हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने 31 वर्षीय हरीश राणा के मामले में पैसिव इच्छामृत्यु की अनुमति दी है। हरीश 2013 में पंजाब यूनिवर्सिटी में पढ़ाई के दौरान एक इमारत की चौथी मंजिल से गिर गए थे, जिससे उनके दिमाग को गंभीर चोट लगी थी।

इसके बाद से करीब 13 सालों से वो वेजिटेटिव स्टेट (अचेत अवस्था) में थे। उन्हें लाइप सपोर्ट सिस्टम के जरिए जीवित रखा गया था। उनके माता-पिता ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर पैसिव इच्छामृत्यु की अनुमति मांगी थी। सुप्रीम कोर्ट ने मेडिकल रिपोर्ट और परिस्थितियों को देखते हुए अनुमति दी और केंद्र सरकार से इस विषय पर स्पष्ट कानून बनाने पर भी विचार करने को कहा।

Ratan Gupta

लेखक के बारे में

Ratan Gupta

रतन गुप्ता एक डिजिटल हिंदी जर्नलिस्ट/ कॉन्टेंट प्रोड्यूसर हैं। वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान की स्टेट न्यूज टीम के साथ काम कर रहे हैं। वह क्राइम, राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर न्यूज आर्टिकल और एक्सप्लेनर स्टोरीज लिखते हैं।


रतन गुप्ता वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में कंटेंट प्रोड्यूसर के तौर पर स्टेट न्यूज टीम में काम करते हैं। इस टीम में हिंदी पट्टी के 8 राज्यों दिल्ली-एनसीआर, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, गुजरात से जुड़ी खबरों की कवरेज करते हैं। उनका लेखन खास तौर से क्राइम, राजनीति और सामाजिक मुद्दों पर केंद्रित रहता है।


लाइव हिंदुस्तान में बीते 2 साल से काम करते हुए रतन ने ब्रेकिंग न्यूज, राजनीतिक घटनाक्रम और कानून-व्यवस्था से जुड़ी खबरों पर लगातार लेखन किया है। इसके साथ ही वह एक्सप्लेनर स्टोरीज लिखने में भी विशेष रुचि रखते हैं, जहां जटिल मुद्दों को सरल और तथ्यपरक भाषा में पाठकों के सामने रखते हैं।


रतन गुप्ता ने बायोलॉजी में ग्रेजुएशन किया है, जिसके बाद उन्होंने भारतीय जनसंचार संस्थान, नई दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता की पढ़ाई की है। साइंस बैकग्राउंड होने के कारण उनकी न्यूज और एनालिसिस स्टोरी में साइंटिफिक टेंपरामेंट, लॉजिकल अप्रोच और फैक्ट-बेस्ड सोच साफ दिखाई देती है। वह किसी भी मुद्दे पर रिपोर्टिंग करते समय दोनों पक्षों की बात, मौजूद तथ्यों और आधिकारिक स्रोतों को प्राथमिकता देते हैं, ताकि यूजर तक संतुलित और भरोसेमंद जानकारी पहुंचे।


इसके साथ ही आईआईएमसी की एकेडमिक पढ़ाई ने उन्हें रिपोर्टिंग, न्यूज प्रोडक्शन, मीडिया एथिक्स और पब्लिक अफेयर्स की गहरी समझ दी है। इसका सीधा असर उनके लेखन की विश्वसनीयता और संतुलन में दिखाई देता है।

और पढ़ें
लेटेस्ट Hindi News , Delhi News , Ghaziabad News , Noida News , Gurgaon News , Faridabad News और दिल्ली में आज का मौसम सहित पूरे NCR की खबरें पढ़ने के लिए Live Hindustan App अभी डाउनलोड करे और पाएं पल-पल की ताज़ा खबर
Hindi Newsएनसीआर News42 साल जिंदा लाश रहीं… अरुणा शानबाग की कहानी से बदला भारत का Right to Die कानून