इच्छामृत्यु के लिए एम्स में हरीश राणा का खाना बंद, कल से नहीं दिया जाएगा पानी
गाजियाबाद के 32 वर्षीय हरीश राणा को सुप्रीम कोर्ट की अनुमति के बाद एम्स में निष्क्रिय इच्छामृत्यु दी जा रही है। एम्स में हरीश राणा को ट्यूब के जरिए पोषण देना बंद कर दिया गया है।
हरीश राणा की इच्छामृत्यु के लिए एम्स में प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। बीते 13 वर्षों से मरणासन्न की स्थिति में पड़े गाजियाबाद के 32 वर्षीय हरीश राणा को ट्यूब के जरिये खाना (पोषण) देना बंद कर दिया गया है। मंगलवार को पानी देना भी बंद कर दिया जाएगा। इस तरह वह धीरे-धीरे इस दुनिया का अलविदा होगा। जीवन के अंतिम क्षणों में हरीश को कोई शारीरिक पीड़ा न हो इसके लिए एम्स के डॉक्टर पैलिएटिव केयर दे रहे। यह देश में इच्छामृत्यु का पहला मामला होगा।
हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिर गए थे हरीश
उल्लेखनीय है कि 13 वर्ष पहले चंडीगढ़ के पंजाब यूनिवर्सिटी में पढ़ाई के दौरान हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के कारण हरीश को गंभीर चोट लग गई थी। तब से वह कोमा में है। इतने वर्षों तक माता-पिता ने उनकी देखभाल की। उसे कृत्रिम पोषण के लिए पेट में ट्यूब डली है।
सुप्रीम कोर्ट ने दी है इच्छामृत्यु को मंजूरी
इस ट्यूब के जरिये ही उसे लंबे समय तक खाना पानी दिया जाता रहा। इसके अलावा उसके गले की सांस नली में भी ट्यूब डली है। इसके अलावा कैथेटर भी लगा है। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने हरीश को निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी। इसके तहत उसके जीवन रक्षक सपोर्ट को चरणबद्ध तरीके से हटाने की स्वीकृति दी गई है।
डॉक्टरों की बनाई गई कमेटी
इस आदेश के बाद एम्स में डॉक्टरों की एक कमेटी बनाई गई। जिसमें पैलिएटिव केयर के विशेषज्ञों के अलावा कई विभागों के डॉक्टर शामिल हैं। 14 मार्च की सुबह हरीश को एंबुलेंस से एम्स लाकर आईआरसीएच (इंस्टीट्यूट रोटरी कैंसर अस्पताल) के पैलिएटिव केयर वार्ड में भर्ती कराया गया।
इच्छामृत्यु के लिए पहले से प्रोटोकॉल
सोमवार को कमेटी में शामिल डॉक्टरों की बैठक हुई। जिसमें इच्छामृत्यु की प्रक्रिया पर चर्चा हुई। एक वरिष्ठ डॉक्टर ने बताया कि एम्स में निष्क्रिय इच्छामृत्यु के लिए पहले से प्रोटोकॉल बना हुआ है, जो भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) द्वारा स्वीकृत भी है।
मंगलवार को पानी भी नहीं दिया जाएगा
हरीश को कोई आक्सीजन सपोर्ट नहीं दिया गया है। सिर्फ ट्यूब के जरिये पोषण दिया जा रहा था। इस ट्यूब से अब पोषण देना बंद कर दिया गया है। मंगलवार को पानी देना बंद करने के बाद ट्यूब को कैप लगाकर बंद दिया जाएगा। उसे निकाला नहीं जाएगा।
जीवन त्याग करने में लगेंगे कई दिन
एम्स के एक वरिष्ठ डॉक्टर ने बताया कि खाना पानी बंद होने के बाद व्यक्ति औसतन दस दिन जीवित रह सकता है लेकिन यह शारीरिक क्षमता पर निर्भर करता है। भोजन पानी त्याग कर कुछ लोग दो सप्ताह तक भी जीवित रह सकते हैं। हरीश की इच्छामृत्यु के बाद एम्स से सुप्रीम कोर्ट में रिपोर्ट भी पेश की जाएगी।
लेखक के बारे में
Krishna Bihari Singhकृष्ण बिहारी सिंह वरिष्ठ पत्रकार और स्टेट टीम का हिस्सा (दिल्ली-NCR, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, राजस्थान और गुजरात )
संक्षिप्त विवरण
कृष्ण बिहारी सिंह पिछले 15 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। कृष्ण बिहारी सिंह लाइव हिन्दुस्तान में कार्यरत हैं। वह स्टेट टीम के साथ काम कर रहे हैं। कृष्ण बिहारी सिंह भारतीय मीडिया जगत में केबी उपनाम से चर्चित हैं। यूपी के मऊ जिले से ताल्लुक रखने वाले केबी महाराष्ट्र और हरियाणा में पत्रकारिता कर चुके हैं। मौजूदा वक्त में वह दिल्ली-एनसीआर में सक्रिय हैं।
विस्तृत बायो
परिचय और अनुभव: कृष्ण बिहारी सिंह लोकमत, आज समाज, राष्ट्रीय सहारा, अमर उजाला और दैनिक जागरण अखबार में विभिन्न पदों पर काम कर चुके हैं। उन्होंने साल 2019 में जागरण डॉट कॉम से डिजिटल मीडिया में कदम रखा। कृष्ण बिहारी सिंह मौजूदा वक्त में भारत के प्रसिद्ध समाचार संस्थान 'लाइव हिन्दुस्तान' (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) की स्टेट टीम में डिप्टी चीफ एडिटर (कंटेंट क्रिएटर) के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
शैक्षणिक पृष्ठभूमि: लॉ (एलएलबी) और साइंस (बी.एससी, बायोलॉजी) से ग्रेजुएट कृष्ण बिहारी सिंह ने महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में एमए और एमफिल किया है। कृष्ण बिहारी सिंह भारतीय राजनीति और वैश्विक मामलों के साथ विधि विषय की गहरी समझ रखते हैं। अखबार से लेकर टेलीविजन और अब डिजिटल मीडिया के बदलावों के साक्षी रहे कृष्ण बिहारी सिंह पाठकों की पसंद और बदलते ट्रेंड को बारीकी से समझते हैं।
रिपोर्टिंग एवं विशेषज्ञता: कृष्ण बिहारी सिंह राजनीति, जिओ पॉलिटिक्स, जन सरोकार और क्राइम की खबरों पर पैनी नजर रखते हैं। कृष्ण बिहारी सिंह ने अब तक विभिन्न मीडिया संस्थानों में नेशनल, इंटरनेशनल, बिजनेस, रिसर्च एवं एक्सप्लेनर और संपादकीय टीमों के साथ लंबे समय तक काम किया है। यही वजह है कि खबर के पीछे छिपे एजेंडे की समझ रखने वाले केबी समसामयिक घटनाक्रमों पर गहरा विश्लेषण करते हैं।
पत्रकारिता का उद्देश्य: कृष्ण बिहारी सिंह 'राष्ट्र प्रथम' की भावना के साथ काम करते हैं। केबी का मानना है कि एक पत्रकार की पहली जिम्मेदारी उसका राष्ट्र और लोक कल्याण है। केबी खबरों को पहले प्रमाणिकता की कसौटी पर कसते हैं, फिर आम जनमानस की भाषा में उसे परोसने का काम करते हैं। केबी का मानना है कि रिपोर्टिंग का उद्देश्य पाठकों को न केवल सूचना देना वरन उन्हें सही और असल जानकारी देना है।


