
गुरुग्राम की 2 हजार सोसाइटियों में होगी इस काम की जांच, सरकार ने GMDA को दिए आदेश
गुरुग्राम को जलभराव से बचाने के लिए सेक्टर-एक से 67 तक बसी विकसित करीब दो हजार रिहायशी सोसाइटियों और कॉलोनियों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम (वर्षा जल संचयन प्रणाली) की जांच की जाएगी।
गुरुग्राम को जलभराव से बचाने के लिए सेक्टर-एक से 67 तक बसी विकसित करीब दो हजार रिहायशी सोसाइटियों और कॉलोनियों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम (वर्षा जल संचयन प्रणाली) की जांच की जाएगी। शहरी विकास के प्रधान सलाहकार डीएस ढेसी ने जीएमडीए के डीटीपी आरएस बाठ को यह आदेश दिए हैं।
पिछले दिनों शहरी विकास के प्रधान सलाहकार ने जलभराव की स्थिति से निपटने और गिरते भूजल स्तर को ऊंचा उठाने के सिलसिले में एक बैठक बुलाई थी। इसमें जीएमडीए के मुख्य अभियंता आरएस जांगड़ा, फर्म एवं सोसाइटी के जिला रजिस्ट्रार अमित मान, डीटीपी आरएस बाठ, अधीक्षण अभियंता प्रवीण कुमार, कार्यकारी अभियंता पारिक गर्ग आदि मौजूद थे।
बाठ ने ढेसी को बताया कि उन्होंने सेक्टर-एक से लेकर 57 तक हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (एचएसवीपी) की तरफ से आवंटित करीब 200 रिहायशी सोसाइटियों की आरडब्ल्यूए को नोटिस जारी किए थे। इस नोटिस में उनसे रेन वॉटर हार्वेस्टिंग से जुड़ी जानकारी एक सप्ताह में देने के आदेश दिए थे। सिर्फ आठ सोसाइटियों की आरडब्ल्यूए ने इस नोटिस को गंभीरता से लेते हुए यह जानकारी साझा की है। इस बैठक में फर्म एवं सोसाइटी के जिला रजिस्ट्रार अमित मान ने बताया कि सेक्टर-एक से लेकर 67 तक करीब दो हजार रिहायशी सोसाइटियां विकसित हैं। ढेसी ने आदेश जारी किए कि फर्म एवं सोसाइटी की तरफ से जीएमडीए के डीटीपी को इन सभी रिहायशी सोसाइटियों के आरडब्ल्यूए प्रतिनिधियों की ई-मेल आईडी और मोबाइल नंबर उपलब्ध करवाए जाएंगे। इन सभी को नोटिस जारी करके रेन वॉटर हार्वेस्टिंग की जानकारी मांगी जाए। इसके साथ-साथ इन सोसाइटियों में जल संचयन प्रणाली की जांच को शुरू किया जाए।
इन सोसाइटियों में देखा जाए कि कितनी सोसाइटियों में रेन वॉटर हार्वेस्टिंग ठीक रूप से चल रहे हैं और कितनों में बंद पड़े हैं। इसके बाद इनके खिलाफ नियमानुसार विभागीय कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
आरडब्ल्यूए के साथ जिला उपायुक्त ने बैठक की
जिला उपायुक्त अजय कुमार ने जल संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए गुरुवार को आरडब्ल्यूए प्रतिनिधियों के साथ लघु सचिवालय में बैठक की। उन्होंने कहा कि जिन भवनों की छत का क्षेत्रफल 100 वर्ग मीटर या उससे अधिक है, वहां वर्षा जल संचयन प्रणाली स्थापित करना अनिवार्य है। इसी प्रकार 500 वर्ग मीटर या उससे बड़े भूखंडों, ग्रुप हाउसिंग सोसाइटीज और सभी प्रकार की इमारतों में भूजल पुनर्भरण की व्यवस्था करना आवश्यक है।
इसलिए बनाई जा रही योजना
गुरुग्राम की सड़कों पर हर साल में भारी जलभराव हो जाता है। इस वजह से वाहन चालकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। सड़कों पर एक से ढाई फीट तक पानी भर जाता है। जीएमडीए की तरफ से नियुक्त एक सलाहकार एजेंसी ने अपनी जांच रिपोर्ट में कहा है कि 85 प्रतिशत मकानों में रेन वॉटर हार्वेस्टिंग नहीं हैं या खराब हैं। इसके अलावा 50 प्रतिशत रिहायशी सोसाइटियों और कॉलोनियों में रेन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम बंद पड़े हैं।
अजय कुमार, जिला उपायुक्त, गुरुग्राम, ''रिहायशी सोसाइटियों और कॉलोनियों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम की जांच जल्द शुरू की जाएगी। जलभराव और गिरते भूजल स्तर को लेकर आरडब्ल्यूए को यह जानकारी दी गई है।''





