कनॉट प्लेस की तरह जगमगाएंगी गुरुग्राम की सड़कें, पोल पर CCTV और पैनिक बटन भी होंगे
दिल्ली के कनॉट प्लेस की तर्ज पर मिलेनियम सिटी की मुख्य सड़कें भी स्मार्ट स्ट्रीट लाइट से जगमगाएंगी। नगर निगम गुरुग्राम ने शहर की 10 प्रमुख सड़कों पर डिजिटल स्ट्रीट लाइटें लगाने की योजना तैयार की है। महिला सुरक्षा और अपराध नियंत्रण के लिए पोल पर हाई-रेजोल्यूशन सीसीटीवी कैमरे भी लगे होंगे।

दिल्ली के कनॉट प्लेस की तर्ज पर मिलेनियम सिटी की मुख्य सड़कें भी स्मार्ट स्ट्रीट लाइट से जगमगाएंगी। नगर निगम गुरुग्राम ने शहर की 10 प्रमुख सड़कों पर डिजिटल स्ट्रीट लाइटें लगाने की योजना तैयार की है। महिला सुरक्षा और अपराध नियंत्रण के लिए पोल पर हाई-रेजोल्यूशन सीसीटीवी कैमरे भी लगे होंगे।
यह प्रदेश में अपनी तरह की पहली पहल है, जिससे गुरुग्राम हरियाणा का ऐसा पहला नगर निगम बन जाएगा, जहां स्मार्ट और मल्टी-फंक्शनल स्ट्रीट लाइटें लगाई जाएंगी। इन स्मार्ट स्ट्रीट लाइट के पोल पर कई तरह की अत्याधुनिक सुविधाएं उपलब्ध होंगी। पोल पर लगे डिजिटल बोर्ड शहर की वायु गुणवत्ता का रियल-टाइम डाटा दिखाएंगे। इन खंभों के जरिए आसपास के इलाके में नागरिकों को मुफ्त वाई-फाई की सुविधा मिलेगी। आपात स्थिति या किसी जरूरी सूचना को प्रसारित करने के लिए इन पोल्स पर स्पीकर लगे होंगे, जिन्हें कंट्रोल रूम से ऑपरेट किया जा सकेगा।
पोल पर CCTV और पैनिक बटन भी होंगे
महिला सुरक्षा और अपराध नियंत्रण के लिए इन पोल पर हाई-रेजोल्यूशन सीसीटीवी कैमरे भी लगे होंगे। आपातकालीन स्थिति में पुलिस या कंट्रोल रूम से तुरंत संपर्क करने के लिए पैनिक बटन भी दिए जाएंगे। निगम अधिकारियों का कहना है कि इस योजना का खाका तैयार कर लिया गया है और जल्द ही टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। पहले चरण में शहर की 10 सबसे व्यस्त और अहम सड़कों को इसके लिए चुना गया है।
दस स्मार्ट सड़कें विकसित की जाएंगी
निगम की तरफ से शहर में दस स्मार्ट सड़कों को विकसित करने की योजना तैयार की जा रही है। निगम की तरफ से सड़कों पर किस प्रकार की सुविधाएं उपलब्ध करवाई जांएगी। खाका तैयार किया जा रहा है। इंजीनियरिंग विंग सड़कों को चिन्हित करेगी। बागवानी विंग द्वारा इन सड़कों पर हरियाली बढ़ाने की योजना तैयार की जा रही है। वहीं बिजली विंग स्मार्ट स्ट्रीट लाइटें लगाने की योजना बना रही है। इसके लिए चौड़ी और खुली सड़कों का चयन किया जाएगा। इसके अलावा शहर में सौ किलोमीटर लंबी सड़कों को मॉडल सड़कें बनाने को लेकर निगम की अलग से योजना पर काम चल रहा है।
21 हजार नई स्ट्रीट लाइटें लगाने का प्रस्ताव
निगम ने शहर के अंधेरे वाले इलाकों में 21 हजार नई स्ट्रीट लाइटें लगाने का प्रस्ताव तैयार कर शहरी स्थानीय निकाय विभाग (यूएलबी) को मंजूरी के लिए भेजा है। निगम द्वारा हाल ही में किए गए सर्वे के आधार पर उन जगहों को चिह्नित किया गया है जहां लाइटों की सख्त जरूरत है। इसके अलावा, मौजूद स्ट्रीट लाइटों को स्मार्ट बनाने के लिए उन पर केंद्रीकृत नियंत्रण प्रणाली (सीएमएस) लगाने का काम भी तेजी से चल रहा है। पहले चरण में 500 लाइटों पर सीएमएस लगाए जा रहे हैं।
लेखक के बारे में
Subodh Kumar Mishraसुबोध कुमार मिश्रा पिछले 19 साल से हिंदी पत्रकारिता में योगदान दे रहे हैं। वर्तमान में वह 'लाइव हिन्दुस्तान' में स्टेट डेस्क पर बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। दूरदर्शन के 'डीडी न्यूज' से इंटर्नशिप करने वाले सुबोध ने पत्रकारिता की विधिवत शुरुआत 2007 में दैनिक जागरण अखबार से की। दैनिक जागरण के जम्मू एडीशन में बतौर ट्रेनी प्रवेश किया और सब एडिटर तक का पांच साल का सफर पूरा किया। इस दौरान जम्मू-कश्मीर को बहुत ही करीब से देखने और समझने का मौका मिला। दैनिक जागरण से आगे के सफर में कई अखबारों में काम किया। इनमें दिल्ली-एनसीआर से प्रकाशित होने वाली नेशनल दुनिया, नवोदय टाइम्स (पंजाब केसरी ग्रुप), अमर उजाला और हिन्दुस्तान जैसे हिंदी अखबार शामिल हैं। अखबारों के इस लंबे सफर में खबरों को पेश करने के तरीकों से पड़ने वाले प्रभावों को काफी बारीकी से समझने का मौका मिला।
ज्यादातर नेशनल और स्टेट डेस्क पर काम करने का अवसर मिलने के कारण राजनीतिक और सामाजिक विषयों से जुड़ी खबरों में दिलचस्पी बढ़ती गई। कई लोकसभा और विधानसभा चुनावों की खबरों की पैकेजिंग टीम का हिस्सा रहने के कारण भारतीय राजनीति के गुणा-भाग को समझने का मौका मिला।
शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो सुबोध ने बीएससी (ऑनर्स) तक की अकादमिक शिक्षा हासिल की है। साइंस स्ट्रीम से पढ़ने के कारण उनके पास चीजों को मिथ्यों से परे वैज्ञानिक तरीके से देखने की समझ है। समाज से जुड़ी खबरों को वैज्ञानिक कसौटियों पर जांचने-परखने की क्षमता है। उन्होंने मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा किया है। इससे उन्हें खबरों के महत्व, खबरों के एथिक्स, खबरों की विश्वसनीयता और पठनीयता आदि को और करीब से सीखने और लिखने की कला में निखार आया। सुबोध का मानना है कि खबरें हमेशा प्रमाणिकता की कसौटी पर कसा होना चाहिए। सुनी सुनाई और कल्पना पर आधारित खबरें काफी घातक साबित हो सकती हैं, इसलिए खबरें तथ्यात्मक रूप से सही होनी चाहिए। खबरों के चयन में क्रॉस चेकिंग को सबसे महत्वपूर्ण कारक मानने वाले सुबोध का काम न सिर्फ पाठकों को केवल सूचना देने भर का है बल्कि उन्हें सही, सुरक्षित और ठोस जानकारी उपलब्ध कराना भी है।


