गुरुग्राम-सोहना रोड छठी बार धंसा, 10 फीट चौड़ा और 20 फीट गहरा गड्ढा बना; एक लेन बंद
गुरुग्राम-सोहना हाईवे बुधवार दोपहर करीब साढ़े तीन बजे छठी बार फिर से धंस गया। सूचना मिलने के बाद भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने इस हाईवे की तीन में से एक लेन को करीब 100 मीटर तक बैरीकेडिंग कर बंद कर दिया है।

गुरुग्राम-सोहना हाईवे बुधवार दोपहर करीब साढ़े तीन बजे छठी बार फिर से धंस गया। सूचना मिलने के बाद भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने इस हाईवे की तीन में से एक लेन को करीब 100 मीटर तक बैरीकेडिंग कर बंद कर दिया है।
इस स्थिति की सूचना गुरुग्राम महानगर विकास प्राधिकरण (जीएमडीए) को दे दी है। बुधवार दोपहर करीब साढ़े तीन बजे एनएचएआई अधिकारियों को सेक्टर-47 स्थित एसडी आदर्श विद्यालय के सामने गुरुग्राम-सोहना हाईवे के धंसने की सूचना मिली। एनएचएआई अधिकारी पहुंचें तो पाया कि इस हाईवे पर करीब 10 फीट चौड़ा गड्ढा हो गया है, जोकि करीब 20 फीट गहरा है। गनीमत यह रही कि इसकी वजह से किसी तरह का हादसा नहीं हुआ। एनएचएआई ने बैरीकेडिंग करवाकर एक लेन को बंद कर दिया है। यह सीवर लाइन पिछले साल 18 जून को धंसी थी।
गुरुग्राम-सोहना हाईवे के नीचे से मुख्य सीवर लाइन निकल रही है। यह सीवर लाइन करीब 30 साल पहले डाली गई थी। इसकी हालत अब बदतर अवस्था में है। पिछले साल जीएमडीए ने इस सीवर लाइन को एनएचएआई के हवाले कर दिया था। सीवर लाइन की सीआईपीपी पद्धति से मरम्मत करनी थी। इसको लेकर एनएचएआई ने करीब 99 करोड़ रुपये का एस्टीमेट बनाया था।
जुलाई में एनएचएआई अध्यक्ष की अध्यक्षता में बैठक हुई थी। इसमें जीएमडीए के तत्कालीन सीईओ मौजूद थे। बैठक में फैसला हुआ था कि एनएचएआई इस सीवर लाइन की सीआईपीपी पद्धति से मरम्मत करेगा। इसकी मरम्मत में आई लागत को जीएमडीए वहन करेगा।
इस सीवर लाइन में सेक्टर-45 से लेकर सेक्टर-51 तक का गंदा पानी आता है। यह गंदा पानी बहरामपुर के सीवर शोधन संयंत्र तक जाता है। जीएमडीए ने जुलाई, 2024 में इस सीवर लाइन की सीआईपीपी पद्धति से मरम्मत को लेकर करीब 20 करोड़ रुपये की लागत से टेंडर लगाया था। एक कंपनी ने 50 प्रतिशत अधिक राशि में टेंडर के लिए बोली लगाई थी। जब टेंडर आवंटन का मामला मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय कार्य समिति की बैठक में पहुंचा तो अधिक राशि की वजह से टेंडर को रद्द कर दिया था।
लेखक के बारे में
Subodh Kumar Mishraसुबोध कुमार मिश्रा पिछले 19 साल से हिंदी पत्रकारिता में योगदान दे रहे हैं। वर्तमान में वह 'लाइव हिन्दुस्तान' में स्टेट डेस्क पर बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। दूरदर्शन के 'डीडी न्यूज' से इंटर्नशिप करने वाले सुबोध ने पत्रकारिता की विधिवत शुरुआत 2007 में दैनिक जागरण अखबार से की। दैनिक जागरण के जम्मू एडीशन में बतौर ट्रेनी प्रवेश किया और सब एडिटर तक का पांच साल का सफर पूरा किया। इस दौरान जम्मू-कश्मीर को बहुत ही करीब से देखने और समझने का मौका मिला। दैनिक जागरण से आगे के सफर में कई अखबारों में काम किया। इनमें दिल्ली-एनसीआर से प्रकाशित होने वाली नेशनल दुनिया, नवोदय टाइम्स (पंजाब केसरी ग्रुप), अमर उजाला और हिन्दुस्तान जैसे हिंदी अखबार शामिल हैं। अखबारों के इस लंबे सफर में खबरों को पेश करने के तरीकों से पड़ने वाले प्रभावों को काफी बारीकी से समझने का मौका मिला।
ज्यादातर नेशनल और स्टेट डेस्क पर काम करने का अवसर मिलने के कारण राजनीतिक और सामाजिक विषयों से जुड़ी खबरों में दिलचस्पी बढ़ती गई। कई लोकसभा और विधानसभा चुनावों की खबरों की पैकेजिंग टीम का हिस्सा रहने के कारण भारतीय राजनीति के गुणा-भाग को समझने का मौका मिला।
शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो सुबोध ने बीएससी (ऑनर्स) तक की अकादमिक शिक्षा हासिल की है। साइंस स्ट्रीम से पढ़ने के कारण उनके पास चीजों को मिथ्यों से परे वैज्ञानिक तरीके से देखने की समझ है। समाज से जुड़ी खबरों को वैज्ञानिक कसौटियों पर जांचने-परखने की क्षमता है। उन्होंने मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा किया है। इससे उन्हें खबरों के महत्व, खबरों के एथिक्स, खबरों की विश्वसनीयता और पठनीयता आदि को और करीब से सीखने और लिखने की कला में निखार आया। सुबोध का मानना है कि खबरें हमेशा प्रमाणिकता की कसौटी पर कसा होना चाहिए। सुनी सुनाई और कल्पना पर आधारित खबरें काफी घातक साबित हो सकती हैं, इसलिए खबरें तथ्यात्मक रूप से सही होनी चाहिए। खबरों के चयन में क्रॉस चेकिंग को सबसे महत्वपूर्ण कारक मानने वाले सुबोध का काम न सिर्फ पाठकों को केवल सूचना देने भर का है बल्कि उन्हें सही, सुरक्षित और ठोस जानकारी उपलब्ध कराना भी है।


