फर्जी मान्यता दिखाकर 10वीं में एडमिशन लेता था, गुरुग्राम पुलिस के हत्थे चढ़ा स्कूल चेयरमैन
गुरुग्राम पुलिस की मानेसर क्राइम ब्रांच ने शिक्षा के नाम पर धोखाधड़ी करने वाले स्कूल के चेयरमैन को गिरफ्तार किया है। सेक्टर-9बी स्थित एडुक्रेस्ट इंटरनेशनल स्कूल द्वारा सीबीएसई की फर्जी मान्यता दिखाकर छात्रों और उनके अभिभावकों के साथ लाखों की ठगी करने का आरोप है।

गुरुग्राम पुलिस की मानेसर क्राइम ब्रांच ने शिक्षा के नाम पर धोखाधड़ी करने वाले स्कूल के चेयरमैन को गिरफ्तार किया है। सेक्टर-9बी स्थित एडुक्रेस्ट इंटरनेशनल स्कूल द्वारा सीबीएसई की फर्जी मान्यता दिखाकर छात्रों और उनके अभिभावकों के साथ लाखों की ठगी करने का आरोप है। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए स्कूल के चेयरमैन विनीत कटारिया को गिरफ्तार कर लिया है।
एडमिट कार्ड न मिलने पर खुला राज
मामले का खुलासा तब हुआ जब 10वीं कक्षा की एक छात्रा को बोर्ड परीक्षा के समय एडमिट कार्ड नहीं दिया गया। छात्रा के पिता ने जब इसकी पड़ताल की, तो पता चला कि स्कूल के पास 10वीं कक्षा के लिए सीबीएसई की कोई मान्यता ही नहीं है। अभिभावकों का आरोप है कि प्रवेश के समय फर्जी संबद्धता नंबर और प्रमाण-पत्र दिखाए। ट्यूशन फीस, बिल्डिंग फंड और परीक्षा शुल्क के नाम पर भारी रकम वसूली। छात्रा का पूरा शैक्षणिक वर्ष बर्बाद कर दिया और उसके भविष्य को दांव पर लगा दिया।
25 बच्चों के भविष्य से खिलवाड़
पुलिस पूछताछ में 38 साल के आरोपी विनीत कटारिया (एमबीए पास) ने कबूल किया कि वह पिछले आठ वर्षों से यह स्कूल चला रहा है। स्कूल के पास केवल 8वीं कक्षा तक की मान्यता थी, लेकिन अधिक पैसा कमाने के लालच में उसने फर्जी कागजात तैयार किए और 9वीं और 10वीं कक्षा में 25 बच्चों का दाखिला कर लिया।
इनके खिलाफ दर्ज हुआ मामला
पुलिस ने शिकायत पर सेक्टर-9ए थाने में भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4), 316(2) व 3(5) के तहत मुकदमा दर्ज किया था। पुलिस ने इस मामले में विनय उर्फ विनीत कटारिया स्कूल चेयरमैन, स्कूल प्रिंसिपल रिद्धिमा कटारिया, वाइस प्रिंसिपल सिमर बत्रा और स्कूल समन्वयक सोनिया को आरोपी बनाया था।
गुरुग्राम पुलिस की अभिभावकों से अपील
गुरुग्राम पुलिस ने अभिभावकों से अपील की है कि वे किसी भी स्कूल में दाखिला दिलाने से पहले सीबीएसई की आधिकारिक वेबसाइट पर स्कूल की मान्यता की पुष्टि जरूर करें। पुलिस का कहना है कि बच्चों के भविष्य से जुड़े मामलों में जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जाएगी। अन्य फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए दबिश दी जा रही है।
लेखक के बारे में
Subodh Kumar Mishraसुबोध कुमार मिश्रा पिछले 19 साल से हिंदी पत्रकारिता में योगदान दे रहे हैं। वर्तमान में वह 'लाइव हिन्दुस्तान' में स्टेट डेस्क पर बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। दूरदर्शन के 'डीडी न्यूज' से इंटर्नशिप करने वाले सुबोध ने पत्रकारिता की विधिवत शुरुआत 2007 में दैनिक जागरण अखबार से की। दैनिक जागरण के जम्मू एडीशन में बतौर ट्रेनी प्रवेश किया और सब एडिटर तक का पांच साल का सफर पूरा किया। इस दौरान जम्मू-कश्मीर को बहुत ही करीब से देखने और समझने का मौका मिला। दैनिक जागरण से आगे के सफर में कई अखबारों में काम किया। इनमें दिल्ली-एनसीआर से प्रकाशित होने वाली नेशनल दुनिया, नवोदय टाइम्स (पंजाब केसरी ग्रुप), अमर उजाला और हिन्दुस्तान जैसे हिंदी अखबार शामिल हैं। अखबारों के इस लंबे सफर में खबरों को पेश करने के तरीकों से पड़ने वाले प्रभावों को काफी बारीकी से समझने का मौका मिला।
ज्यादातर नेशनल और स्टेट डेस्क पर काम करने का अवसर मिलने के कारण राजनीतिक और सामाजिक विषयों से जुड़ी खबरों में दिलचस्पी बढ़ती गई। कई लोकसभा और विधानसभा चुनावों की खबरों की पैकेजिंग टीम का हिस्सा रहने के कारण भारतीय राजनीति के गुणा-भाग को समझने का मौका मिला।
शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो सुबोध ने बीएससी (ऑनर्स) तक की अकादमिक शिक्षा हासिल की है। साइंस स्ट्रीम से पढ़ने के कारण उनके पास चीजों को मिथ्यों से परे वैज्ञानिक तरीके से देखने की समझ है। समाज से जुड़ी खबरों को वैज्ञानिक कसौटियों पर जांचने-परखने की क्षमता है। उन्होंने मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा किया है। इससे उन्हें खबरों के महत्व, खबरों के एथिक्स, खबरों की विश्वसनीयता और पठनीयता आदि को और करीब से सीखने और लिखने की कला में निखार आया। सुबोध का मानना है कि खबरें हमेशा प्रमाणिकता की कसौटी पर कसा होना चाहिए। सुनी सुनाई और कल्पना पर आधारित खबरें काफी घातक साबित हो सकती हैं, इसलिए खबरें तथ्यात्मक रूप से सही होनी चाहिए। खबरों के चयन में क्रॉस चेकिंग को सबसे महत्वपूर्ण कारक मानने वाले सुबोध का काम न सिर्फ पाठकों को केवल सूचना देने भर का है बल्कि उन्हें सही, सुरक्षित और ठोस जानकारी उपलब्ध कराना भी है।


