गुरुग्राम के इन 2 सेक्टरों में जलभराव से मिलेगी राहत, नगर निगम ने नाला बनाने का प्लान तैयार किया
साइबर सिटी गुरुग्राम के सेक्टर-9 और सेक्टर-9ए के निवासियों के लिए एक बेहद राहत भरी खबर है। हर साल मानसून के दौरान भारी जलभराव की गंभीर समस्या से जूझने वाले इन दोनों सेक्टरों के लोगों को अब इस परेशानी से हमेशा के लिए निजात मिलने जा रही है।

साइबर सिटी गुरुग्राम के सेक्टर-9 और सेक्टर-9ए के निवासियों के लिए एक बेहद राहत भरी खबर है। हर साल मानसून के दौरान भारी जलभराव की गंभीर समस्या से जूझने वाले इन दोनों सेक्टरों के लोगों को अब इस परेशानी से हमेशा के लिए निजात मिलने जा रही है।
नगर निगम गुरुग्राम ने इन क्षेत्रों में जलभराव की रोकथाम के लिए एक ठोस कार्ययोजना तैयार कर ली है। इस पूरी परियोजना पर करीब 18 करोड़ रुपये का खर्च आने का अनुमान है। इस नए, गहरे और चौड़े नाले के बन जाने से बारिश का सारा पानी सीधा मुख्य ड्रेन (मास्टर ड्रेन) में जाकर गिरेगा और कॉलोनियों में जलभराव नहीं होगा। इस नई योजना के तहत दोनों सेक्टरों में जल निकासी की व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए लगभग 18 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से नए बरसाती नाले (स्टॉर्म वाटर ड्रेन) बनाए जाएंगे।
निचले क्षेत्रों में आते हैं दोनों सेक्टर
गौरतलब है कि सेक्टर-9 और सेक्टर-9ए शहर के भौगोलिक दृष्टिकोण से निचले क्षेत्रों में आते हैं। सबसे बड़ी विडंबना यह है कि इन दोनों ही सेक्टरों में अभी तक जल निकासी के लिए कोई उचित और स्थायी बरसाती नाला मौजूद नहीं है। ड्रेनेज सिस्टम के अभाव और निचले इलाके में होने के कारण, बारिश के दिनों में शहर का काफी पानी यहां आकर जमा हो जाता है।
सर्वे में सच्चाई सामने आई
लोगों की शिकायतों पर हाल ही में नगर निगम द्वारा शहर के जलभराव वाले हॉटस्पॉट क्षेत्रों का एक विशेष सर्वे करवाया गया था। इस सर्वे की रिपोर्ट में यह साफ तौर पर खुलासा हुआ कि इन दोनों सेक्टरों में बरसाती पानी की निकासी के लिए कोई नाला नहीं है। रिपोर्ट को आधार बनाते हुए निगम के इंजीनियरिंग विंग ने दोनों सेक्टरों में नए सिरे से बरसाती नाले के निर्माण का पूरा खाका तैयार किया है।
ऑनलाइन आवेदन मांगे जाएंगे
गुरुग्राम नगर निगम के मुख्य अभियंता विजय ढाका ने कहा कि सेक्टर-9 और 9ए नीचले क्षेत्रों में शामिल है। बारिश के दिनों में यहां पानी आकर रुकता है। दोनों सेक्टरों में नए बरसताी नाले बनाकर जीएमडीए के मुख्य नाले से जोड़ दिया जाएगा। इसको लेकर योजना तैयार कर ली गई है। इसी माह में इसको लेकर निजी एजेंसियों से ऑनलाइन आवेदन मांगे जाएंगे। निजी एजेंसी को यह काम सौंपा जाना है।
लेखक के बारे में
Subodh Kumar Mishraसुबोध कुमार मिश्रा पिछले 19 साल से हिंदी पत्रकारिता में योगदान दे रहे हैं। वर्तमान में वह 'लाइव हिन्दुस्तान' में स्टेट डेस्क पर बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। दूरदर्शन के 'डीडी न्यूज' से इंटर्नशिप करने वाले सुबोध ने पत्रकारिता की विधिवत शुरुआत 2007 में दैनिक जागरण अखबार से की। दैनिक जागरण के जम्मू एडीशन में बतौर ट्रेनी प्रवेश किया और सब एडिटर तक का पांच साल का सफर पूरा किया। इस दौरान जम्मू-कश्मीर को बहुत ही करीब से देखने और समझने का मौका मिला। दैनिक जागरण से आगे के सफर में कई अखबारों में काम किया। इनमें दिल्ली-एनसीआर से प्रकाशित होने वाली नेशनल दुनिया, नवोदय टाइम्स (पंजाब केसरी ग्रुप), अमर उजाला और हिन्दुस्तान जैसे हिंदी अखबार शामिल हैं। अखबारों के इस लंबे सफर में खबरों को पेश करने के तरीकों से पड़ने वाले प्रभावों को काफी बारीकी से समझने का मौका मिला।
ज्यादातर नेशनल और स्टेट डेस्क पर काम करने का अवसर मिलने के कारण राजनीतिक और सामाजिक विषयों से जुड़ी खबरों में दिलचस्पी बढ़ती गई। कई लोकसभा और विधानसभा चुनावों की खबरों की पैकेजिंग टीम का हिस्सा रहने के कारण भारतीय राजनीति के गुणा-भाग को समझने का मौका मिला।
शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो सुबोध ने बीएससी (ऑनर्स) तक की अकादमिक शिक्षा हासिल की है। साइंस स्ट्रीम से पढ़ने के कारण उनके पास चीजों को मिथ्यों से परे वैज्ञानिक तरीके से देखने की समझ है। समाज से जुड़ी खबरों को वैज्ञानिक कसौटियों पर जांचने-परखने की क्षमता है। उन्होंने मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा किया है। इससे उन्हें खबरों के महत्व, खबरों के एथिक्स, खबरों की विश्वसनीयता और पठनीयता आदि को और करीब से सीखने और लिखने की कला में निखार आया। सुबोध का मानना है कि खबरें हमेशा प्रमाणिकता की कसौटी पर कसा होना चाहिए। सुनी सुनाई और कल्पना पर आधारित खबरें काफी घातक साबित हो सकती हैं, इसलिए खबरें तथ्यात्मक रूप से सही होनी चाहिए। खबरों के चयन में क्रॉस चेकिंग को सबसे महत्वपूर्ण कारक मानने वाले सुबोध का काम न सिर्फ पाठकों को केवल सूचना देने भर का है बल्कि उन्हें सही, सुरक्षित और ठोस जानकारी उपलब्ध कराना भी है।


