गुरुग्राम मेट्रो का प्रस्तावित डिपो बसई से हटाकर सेक्टर-33 में किया जाएगा शिफ्ट, जानिए वजह
Gurugram Metro : गुरुग्राम में विदेशी पक्षियों के लिए मेट्रो डिपो का स्थान बदला जाएगा। इसके लिए सर्वे काराया जा रहा है। इसका उद्देश्य केवल पक्षियों की गिनती करना नहीं है, बल्कि बदलते मौसम के साथ इस क्षेत्र के पूरे पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभाव को गहराई से समझना है।

गुरुग्राम मेट्रो रेल लिमिटेड (जीएमआरएल) बसई के पक्षी और जैव विविधता क्षेत्र को बचाने के लिए व्यापक अध्ययन करवा रहा है। जीएमआरएल ने इस प्रस्तावित मेट्रो डिपो को बसई से हटाकर सेक्टर-33 में स्थानांतरित करने का निर्णय लिया है। इसके साथ ही मॉनसून के दौरान इस संवेदनशील क्षेत्र का विस्तृत पर्यावरणीय अध्ययन कराया जा रहा है, ताकि मेट्रो परियोजना का विकास प्रकृति के अनुकूल हो सके।
पक्षियों की घटती संख्या बनी चिंता का विषय
वर्ष 2023 से 2025 के बीच किए गए शुरुआती अध्ययन में यह बात सामने आई है कि लगातार तेजी से होते शहरीकरण, पक्के निर्माण, प्राकृतिक जल प्रवाह में बाधा और गंदे पानी के जमाव के कारण बसई में आने वाले पक्षियों की संख्या लगातार घट रही है। यह नया अध्ययन केवल पक्षियों की गणना तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि बदलते मौसम के साथ पूरे पारिस्थितिकी तंत्र पर पड़ने वाले प्रभावों का भी वैज्ञानिक विश्लेषण करेगा। इस नए अध्ययन से मेट्रो परियोजना को पर्यावरण के अनुकूल बनाने में मदद मिलेगी।
सर्दियों में विदेशी मेहमान पक्षी आते हैं
गौरतलब है कि बसई को साल 2004 में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विशेष पक्षी क्षेत्र (आईबीए) के रूप में पहचान मिली थी, जहां सर्दियों में विदेशी मेहमान पक्षी आते हैं और मॉनसून में स्थानीय पक्षी अपना घोंसला बनाते हैं। हालांकि, पिछले दो दशकों में अनियंत्रित शहरी विकास, ऊंची इमारतों, कचरा निस्तारण और सीवर के पानी के कारण क्षेत्र की जल गुणवत्ता और प्राकृतिक आवास प्रभावित हुए हैं। उथले जल स्रोत सूखने और सरकंडों के कम होने से पक्षियों का बसेरा भी घटता जा रहा है।
इस बीच पर्यावरण के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए मेट्रो प्रशासन ने एक बड़ा फैसला लिया है। पहले बसई क्षेत्र में मेट्रो का डिपो बनाया जाना प्रस्तावित था, जिससे यहां के पर्यावरण को नुकसान पहुंचने का खतरा था। पिछले बीस सालों में तेजी से हुए विकास, ऊंची इमारतों के निर्माण और कचरा फेंकने जैसी हरकतों से बसई क्षेत्र के प्राकृतिक जल प्रवाह पर बुरा असर पड़ा है।
साफ पानी की कमी और सीवर के पानी के जमाव के कारण यहां की मिट्टी और पानी की गुणवत्ता खराब हो गई है। हालात यह हैं कि उथला पानी सूखने से बत्तखें गायब हो रही हैं और सरकंडे घटने से पक्षियों के घोंसले बनाने की जगह भी खत्म होती जा रही है।
विशेषज्ञों की टीम तैयार करेगी संरक्षण योजना
जीएमआरएल ने अध्ययन में पक्षी वैज्ञानिकों, पर्यावरणविदों और स्थानीय लोगों को शामिल किया है। विशेषज्ञ यह आकलन करेंगे कि मेट्रो निर्माण और संचालन का पर्यावरण पर क्या प्रभाव पड़ सकता है। रिपोर्ट के आधार पर ऐसी कार्ययोजना तैयार की जाएगी, जिससे मेट्रो परियोजना भी आगे बढ़े और बसई की जैव विविधता तथा पक्षियों के प्राकृतिक आवास का संरक्षण भी सुनिश्चित हो सके।


