गुरुग्राम में 7 जगहों पर सिम बॉक्स लगाकर की जा रही थी ठगी, फिलीपींस-कंबोडिया से जुड़े तार
Gurugram News : फिलीपींस और कंबोडिया में बैठे जालसाज गुरुग्राम में 7 लोकेशन पर सिम बॉक्स लगवाकर ठगी कर रहे थे। जांच में खुलासा हुआ कि सात सिम बॉक्स नाथूपुर और चक्करपुर गांव में किराये पर कमरा लेकर लगाए गए थे। वहां पर कोई भी मौजूद नहीं रहता था।

Gurugram News : फिलीपींस और कंबोडिया में बैठे जालसाज गुरुग्राम में सात लोकेशन पर सिम बॉक्स लगवाकर ठगी कर रहे थे। जांच में खुलासा हुआ कि सात सिम बॉक्स नाथूपुर और चक्करपुर गांव में किराये पर कमरा लेकर लगाए गए थे। वहां पर कोई भी मौजूद नहीं रहता था। मकान मालिकों के द्वारा दी गई जानकारी के बाद गुरुग्राम साइबर थाना पुलिस ने अंतरराष्ट्रीय गिरोह का पर्दाफाश किया।
गुरुग्राम पुलिस की जांच में सामने आया कि जालसाजों ने शहर के सात प्रमुख स्थानों पर 11 हाई-टेक सिम-बॉक्स लगाए थे। इन सिम-बॉक्स की खासियत यह है कि इन्हें चलाने के लिए किसी व्यक्ति की मौजूदगी की जरूरत नहीं होती। इन्हें विदेश में बैठकर इंटरनेट के जरिये ऑपरेट किया जा रहा था। इस मामले में पुलिस ने कार्रवाई करते हुए पांच लोगों को गिरफ्तार किया है।
आईवीआर का घातक जाल
जालसाज सबसे पहले विदेश से आईवीआर (इंटरैक्टिव वॉइस रिस्पॉन्स) कॉल की जाती थी, जिसमें पीड़ित को बताया जाता था कि उनका पार्सल पकड़ा गया है या उनके नाम पर कोई अवैध गतिविधि हुई है। उसी कॉल में एक नंबर दबाने के लिए बोला जाता, जैसे ही लोग नंबर को दबाते, वैसे ही कॉल विदेश में बैठे जालसाजों तक पहुंच जाती थी।
यह गिरोह बेहद शातिर तरीके से लोगों को मनोवैज्ञानिक दबाव में लेता था। जैसे ही पीड़ित डरता, उसे फर्जी पुलिस अधिकारी या सीबीआई एजेंट बनकर वीडियो कॉल की जाती। इसे ही डिजिटल अरेस्ट कहा जाता है, जहां व्यक्ति को घंटों कैमरे के सामने रहने पर मजबूर किया जाता।
डिजिटल अरेस्ट के अलावा, यह गिरोह शेयर बाजार में भारी मुनाफे का लालच देकर भी लोगों से करोड़ों की ठगी कर रहा था।
नेपाल से बिहार होते हुए गुरुग्राम लाए गए उपकरण
️पुलिस पूछताछ में सामने आया सिम बॉक्स का कॉल रूटिंग, कॉल डायवर्जन के अलावा अन्य अवैध गतिविधियों में इस्तेमाल किया जा रहा था। आरोपियों ने खुलासा किया कि यह उपकरण फिलीपींस से नेपाल लाए गए थे। उसके बाद नेपाल से बिहार होते हुए गुरुग्राम आए थे। आरोपियों ने डिजिटल अरेस्ट व अन्य साइबर अपराधों को अंजाम देने के लिए करीब सवा दो हजार फर्जी सिम कार्ड को रिचार्ज करवाया था।
आरोपी इन शहरों से पकड़े गए
पुलिस उपायुक्त ने बताया कि महिला से पूछताछ के बाद मंगलवार को अलग-अलग शहरों से चार अन्य आरोपियों को गिरफ्तार किया। इनमें उत्तर प्रदेश के कासगंज के गांव नगला नोक्स निवासी राहुल कुमार, गुजरात के अहमदाबाद के रिवेरा ग्रीन बंगलोज निवासी यश अमृत सिंह डुगर, महाराष्ट्र के जल गांव निवासी लितेश, सागर शामिल हैं। आरोपियों की गिरफ्तारी इनके घरों से हुई है। पूछताछ में आरोपी राहुल ने खुलासा किया कि उसके एक साथी के माध्यम से फिलीपिंस में बैठे एक व्यक्ति से उसका संपर्क हुआ था। उसके माध्यम से सिम बॉक्स, राउटर व अन्य सामान पहुंचा था।
क्रिप्टोकरेंसी के जरिये विदेश भेजा जा रहा था पैसा
पुलिस के अनुसार, ठगी की गई रकम को ठिकाने लगाने के लिए अपराधी आधुनिक वित्तीय रास्तों का इस्तेमाल कर रहे थे। भारत में मौजूद विभिन्न बैंक खातों (म्यूल अकाउंट्स) में पैसा जमा करवाया जाता और वहां से तुरंत इसे क्रिप्टोकरेंसी में बदलकर फिलीपींस और कंबोडिया भेज दिया जाता था। इस प्रक्रिया के कारण पुलिस के लिए पैसों को ट्रैक करना और रिकवर करना बेहद चुनौतीपूर्ण हो जाता है।
कैसे काम करता है सिम-बॉक्स
सिम-बॉक्स एक ऐसा उपकरण है जिसमें एक साथ दर्जनों सिम कार्ड लगाए जा सकते हैं। यह इंटरनेट कॉल (वीओआईपी) को स्थानीय जीएसएम नेटवर्क में बदल देता है। इससे अंतरराष्ट्रीय कॉल भी लोकल नंबर से आती हुई प्रतीत होती है, जिसका इस्तेमाल साइबर अपराधी अपनी पहचान छिपाने के लिए करते हैं।
वीडियो कॉल पर लगवाया सेटअप
गिरफ्तार किए गए आरोपियों ने खुलासा किया कि जालसाजों ने स्थानीय लोगों को रुपयों का लालच देकर एक विशेष ऐप के जरिए संपर्क किया। उन्हें वीडियो कॉल पर निर्देश देकर सिम-बॉक्स और राउटर सेट करवाए गए। सिम बॉक्स के साथ जालसाजों ने पावर बैक-अप क लिए बैट्री और हाई-स्पीड इंटरनेट की लीज लाइन ली गई थी। इन सिम-बॉक्स के जरिए जब कॉल की जाती है, तो रिसीवर के मोबाइल पर भारतीय नंबर ही दिखाई देता है, जिससे लोगों को शक नहीं होता कि कॉल विदेश से आ रही है।


