गुरुग्राम में 100 साल पुराना बालकनाथ मंदिर ढहाने के विरोध में कल होगी बड़ी पंचायत; 11 सदस्यीय कमेटी गठित
गुरुग्राम में करीब 100 साल पुराने बाबा बालकनाथ मंदिर पर प्रशासन का बुलडोजर चल गया। मंदिर प्रबंधन पर एचएसवीपी की तीन एकड़ जमीन पर कब्जा करने का आरोप है। स्थानीय लोगों में इस तोड़फोड़ को लेकर भारी रोष है। रविवार को इसके विरोध में पंचायत बुलाई गई है।

गुरुग्राम के गांव आदमपुर झाड़सा (सेक्टर-50) स्थित बाबा बालकनाथ मंदिर को शुक्रवार को विरोध के बीच बुलडोजर चलाकर ढहा दिया गया। करीब 16 घंटे तक चली तोड़फोड़ की इस कार्रवाई से पहले पुलिस ने मंदिर तक पहुंचने वाले सभी रास्तों को बंद कर दिया था। राजस्थान के तिजारा से विधायक महंत बालकनाथ योगी इस तोड़फोड़ का विरोध दर्ज करने गुरुग्राम पहुंचे। रविवार को मंदिर स्थल पर पंचायत होगी, जिसमें आगे की रणनीति तैयार की जाएगी।
ग्रामीणों के मुताबिक, गुरुवार देर शाम गुरुग्राम पुलिस के करीब 25 जवान सिविल ड्रेस में बाबा बालकनाथ मंदिर पहुंचे और मंदिर के महंत विजयनाथ महाराज समेत 10 लोगों को हिरासत में ले लिया। गुरुवार देर रात करीब 2 बजे जब सभी सो रहे थे तब एचएसवीपी, नगर निगम और नगर एवं ग्राम नियोजन विभाग के अधिकारी करीब 15 बुलडोजर लेकर बाबा बालकनाथ मंदिर में पहुंच गए। तोड़फोड़ दस्ते की अगुवाई एचएसवीपी की संपदा अधिकारी अनुपमा मलिक कर रही थीं।
सहायक पुलिस आयुक्त अमित कुमार और विष्णु प्रसाद मौके पर थे। इनके नेतृत्व में कई थानों की पुलिस ने बाबा बालकनाथ मंदिर तक जाने वाले सभी रास्तों को बैरिकेड लगाकर बंद कर दिया। किसी तरह के विरोध से निपटने के लिए मौके पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया।
साधु-संतों ने तोड़फोड़ पर जताई नाराजगी
देर रात 3 बजे बुलडोजर कार्रवाई शुरू हुई। जैसे ही सूचना ग्रामीणों को मिली तो वे एकत्रित होना शुरू हो गए। उन्होंने मंदिर जाने का प्रयास किया, लेकिन पुलिस ने उन्हें रोक दिया। ग्रामीणों ने प्रदर्शन किया। देर शाम शिव मंदिर को छोड़कर इस मंदिर परिसर में निर्मित गौशाला, समाधि और देवी-देवताओं के पांच मंदिरों को तोड़ दिया। साथ ही साथ खाली करवाए गए हिस्से की चारदीवारी करनी शुरू कर दी। वहीं, इस तोड़फोड़ से नाराज साधु-संतों ने पुलिस बैरिकेड के सामने बैठकर धरना दिया। साधुओं ने कहा कि इस मंदिर को तोड़कर अपराध किया है।
जुलाई में भी हुई थी तोड़फोड़ की कोशिश
बता दें कि गत 27 जुलाई को एचएसवीपी के अधिकारी इस मंदिर में तोड़फोड़ करने पहुंचे थे, लेकिन उन्हें ग्रामीणों के विरोध का सामना करना पड़ा था। इस मामले गत 31 अगस्त को एचएसवीपी की संपदा अधिकारी ने पुलिस को अधिग्रहित जमीन पर भूमाफियाओं की तरफ से कब्जा करने की शिकायत पुलिस उपायुक्त, पूर्व को दी थी। पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया था।
रविवार सुबह पंचायत का ऐलान
इस तोड़फोड़ को लेकर 11 सदस्यीय समिति गठित हुई, जो मंदिर स्थल पर पहुंची। इस समिति में शामिल 360 गांवों के चौधरी महेंद्र सिंह ठाकरान, गांव वजीराबाद के पूर्व सरपंच सूबे सिंह बोहरा, प्रदीप जेलदार, संदीप ठाकरान, सुरेंद्र ठाकरान, भगत ठाकरान, सोनू ठाकरान, नवीन आदि शामिल थे। चौधरी महेंद्र सिंह ठाकरान ने कहा कि जिला प्रशासन ने अन्याय किया है। रविवार सुबह 10 बजे मंदिर स्थल पर पंचायत होगी। इसमें आगे की रणनीति तैयार होगी।
वर्ष 1930 में हुआ था मंदिर का निर्माण
मंदिर का इतिहास करीब 100 साल पुराना है। साल 1930 में बाबा आलोक नाथ ने मंदिर का निर्माण किया था। ग्राम पंचायत ने उन्हें मंदिर के लिए जमीन दी थी। मंदिर के साथ करीब तीन एकड़ में जोहड़ था, जिसका अधिग्रहण एचएसवीपी ने साल 2005 में किया था। बाबा आलोक नाथ के बाद बाबा भुरू नाथ और उनके बाद बाबा बालक नाथ इस मंदिर के महंत थे। बाबा बालक नाथ ने 18 मार्च, 2020 को समाधि ली थी। जोहड़ की जमीन पर मंदिर और समाधि बने हुए थे।
बाबा भुरूनाथ समाधि तोड़ने पर लोगों में रोष
तोड़फोड़ दस्ते ने बाबा बालकनाथ और बाबा भुरूनाथ की समाधि को तोड़ दिया। इस समाधि की ग्रामीणों में बहुत आस्था थी। वे इस समाधि पर आकर पूजा अर्चना किया करते थे। इससे उनकी आस्था आहत हुई थी। समाधि को तोड़ने से ग्रामीणों में गहरा आक्रोश है। ग्रामीणों के आक्रोश देखते हुए प्रशासन ने पहले से मौके पर पर्याप्त पुलिस बल लगा रखा था।
मीडियाकर्मियों से बदसलूकी का आरोप
पुलिस ने बैरिकेडिंग पर मीडिया कर्मियों को रोके दिया। दो मीडियाकर्मी जैसे-तैसे अंदर चले गए। इन मीडियाकर्मियों के साथ एचएसवीपी और नगर निगम के अधिकारियों ने बदसलूकी की। इसके बाद एक पुलिस अधिकारी ने मीडिया कर्मियों का मोबाइल छीन लिया और उन्हें बाहर जाने से रोका गया।
मुख्यमंत्री से मुलाकात करेंगे : बालकनाथ योगी
राजस्थान के तिजारा से विधायक महंत बालकनाथ योगी ने आरोप लगाया कि यह कार्रवाई भूमाफियाओं के इशारे पर की गई। इन अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को गुमराह किया है। उन्हें सही वस्तुस्थिति नहीं बताई गई। मुख्यमंत्री ने मंदिर और गौशाला तोड़ने से मना किया था। मामले में मुख्यमंत्री से मुलाकात की जाएगी।


