एनसीआर के शहरों में नहीं हो रहा है मलबा निस्तारण, बन रहा प्रदूषण का कारण

हिन्दुस्तान, गुड़गांव
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गुरुग्राम में मलबा निस्तारण की समस्या गंभीर हो गई है। रोजाना 1500 टन निर्माण कचरा उत्पन्न होता है, लेकिन केवल 1200 टन का निस्तारण हो रहा है। फरीदाबाद और मानेसर में निस्तारण का बुनियादी ढांचा पूरी तरह शून्य है। सरकार ने समय-सीमा निर्धारित की है ताकि नए प्रोसेसिंग प्लांट स्थापित किए जा सकें।

एनसीआर के शहरों में नहीं हो रहा है मलबा निस्तारण, बन रहा प्रदूषण का कारण

गुरुग्राम, कृष्ण कुमार। राज्य के एनसीआर के जिलों में मलबा निस्तारण नहीं हो रहा है। इनमें सबसे अधिक गुरुग्राम में मलबा रोजाना निकल रहा है। मलबे का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण न होने से यह मलबे के ढेर प्रदूषण का मुख्य कारण बन रहे हैं। गुरुग्राम, मानेसर और फरीदाबाद सहित अन्य जिलों में भी इसको लेकर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो रही है। सीएक्यूएम की एक ताजा रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ है। वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार एनसीआर के जिलों में निर्माण कचरे के निस्तारण की योजनाओं पर सही तरीके से काम नहीं हो रहा है। रिपोर्ट से यह साफ उजागर हुआ है कि गुरुग्राम और फरीदाबाद जैसे महानगरों में दैनिक रूप से सैकड़ों टन कचरा पैदा हो रहा है, लेकिन इसके वैज्ञानिक निस्तारण और रीसाइक्लिंग की क्षमता अभी भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। राज्य सरकार ने अब इस लापरवाह रवैये को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए नए प्रोसेसिंग प्लांट स्थापित करने के लिए समय-सीमा निर्धारित की है। सरकार ने सभी शहरों के लिए कड़े निर्देश जारी किए हैं ताकि तय समय-सीमा के भीतर कचरा प्रसंस्करण संयंत्रों का संचालन शुरू किया जा सके। वर्तमान आंकड़ों के अनुसार गुरुग्राम में 36 हजार 500 टन मलबा सड़कों पर फैला हुआ है.

गुरुग्राम में सबसे गंभीर स्थिति

गुरुग्राम में सीएंडडी वेस्ट का संकट सबसे विकराल रूप ले चुका है। यहां प्रतिदिन 1500 टन निर्माण कचरा उत्पन्न हो रहा है। राहत की बात यह है कि वर्तमान में यहां 1200 टन कचरा प्रतिदिन एकत्रित को निस्तारित किया जा रहा है, जो कि बसई स्थित प्लांट की कुल क्षमता है। इस क्षमता के बावजूद रोजाना 300 टन का बड़ा अंतर बना हुआ है। यह 300 टन अतिरिक्त मलबा रोजाना नियमों को ताक पर रखकर सड़कों के किनारे और खाली प्लॉटों में डाला जा रहा है, जिससे प्रदूषण की समस्या गंभीर हो रही है। यही वजह है कि गुरुग्राम को इस साल के अंत तक अतिरिक्त मलबा निस्तारण प्लांट लगाने के लिए निर्देश दिए गए हैं। साल 2026 के दौरान गुरुग्राम में कुल चार लाख 38 हजार टन कचरा निस्तारित होने की उम्मीद है, जो पूरे राज्य में सबसे अधिक है। इसके अलावा, सरकारी एजेंसियों द्वारा निस्तारित मलबे को वापस लेने का लक्ष्य भी केवल गुरुग्राम में ही सबसे बड़ा यानी 36 हजार 500 टन रखा गया है। गुरुग्राम के शेष निस्तारण प्लांट को पूरा करने की अंतिम तिथि 28 फरवरी 2027 निर्धारित की गई है.

फरीदाबाद और मानेसर में नहीं हो रहा निस्तारण

रिपोर्ट का सबसे चिंताजनक पहलू औद्योगिक शहर फरीदाबाद और मानेसर को लेकर है, जहां मलबे के निस्तारण का बुनियादी ढांचा पूरी तरह शून्य बना हुआ है। फरीदाबाद में प्रतिदिन 300 टन सीएंडडी वेस्ट उत्पन्न हो रहा है और इतना ही एकत्र भी किया जा रहा है, लेकिन वर्तमान में यहां निस्तारण की क्षमता शून्य है। इसके चलते प्रतिदिन 300 टन का पूरा का पूरा गैप बना हुआ है, जिससे फरीदाबाद में कचरे के अवैध ढेर लग रहे हैं और मलबे का कोई वैज्ञानिक निस्तारण नहीं हो पा रहा है। सरकार ने फरीदाबाद में नया प्रोसेसिंग प्लांट लगाने के लिए 30 मार्च 2027 की समय-सीमा तय की है। वहीं, औद्योगिक हब मानेसर की स्थिति भी अलग नहीं है। मानेसर में हर रोज 50 टन कचरा निकलता है, लेकिन वहां भी प्रोसेसिंग क्षमता शून्य है, जिसके कारण 50 टन का अंतर बना हुआ है। मानेसर के लिए प्लांट स्थापित करने की अंतिम तिथि 31 मार्च 2027 तय की गई है। तब तक इन दोनों बड़े औद्योगिक क्षेत्रों में पर्यावरण पर दबाव लगातार बढ़ता रहेगा.

छोटे शहरों के सामने भी बड़ी चुनौती

यदि एनसीआर और राज्य के अन्य जिलों की बात करें, तो पानीपत में रोजाना 32 टन कचरा उत्पन्न हो रहा है, जिसमें से केवल 27 टन ही एकत्र हो पाता है और वर्तमान प्रोसेसिंग शून्य है। पानीपत में 32 टन का गैप है, जिसे भरने के लिए प्लांट लगाने की समय-सीमा इसी वर्ष यानी 30 दिसंबर 2026 तय की गई है। करनाल में दैनिक रूप से 5 टन कचरा निकलता है, जहां प्रोसेसिंग शून्य होने से 5 टन का ही अंतर है। यहाँ आगामी 30 जून 2027 तक प्लांट चालू करने का लक्ष्य है। वहीं रोहतक में 95 टन और सोनीपत में 40 टन दैनिक कचरा पैदा हो रहा है, लेकिन दोनों ही शहरों में प्रोसेसिंग फिलहाल शून्य बनी हुई है। सोनीपत में 31 दिसंबर 2026 और रोहतक में 31 दिसंबर 2027 तक प्रोसेसिंग इकाइयां स्थापित की जाएंगी.

मलबा निस्तारण को लेकर नया प्लांट स्थापित किया जाएगा। इसको लेकर जगह निर्धारित की जा रही है.

- रविंद्र यादव, अतिरिक्त निगम आयुक्त, गुरुग्राम

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गुरुग्राम में प्रतिदिन कितना निर्माण कचरा उत्पन्न हो रहा है?
गुरुग्राम में प्रतिदिन 1500 टन निर्माण कचरा उत्पन्न हो रहा है।
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