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झुलसे मरीजों के इलाज के लिए नागरिक अस्पताल में वार्ड नहीं

हिन्दुस्तान टीम,गुड़गांवNewswrap
Thu, 28 Oct 2021 03:00 AM
झुलसे मरीजों के इलाज के लिए नागरिक अस्पताल में वार्ड नहीं

गुरुग्राम। दिवाली के त्योहार में महज कुछ दिन शेष बचे हैं। दिवाली का जश्न मनाने को लेकर तैयारियां जोरों पर हैं, लेकिन चिंता इस बात की है कि 25 लाख से अधिक आबादी वाले शहर के सेक्टर-10 में बने इकलौते नागरिक अस्पताल में जले हुए मरीजों के इलाज के लिए अभी तक वार्ड ही तैयार नहीं हुआ है। अस्पताल प्रबंधन के अधिकारी सर्जिकल वार्ड में लगे चार बेड के भरोसे जले हुए मरीजों का इलाज करने को तैयार होने का दम भर रहे हैं, लेकिन हकीकत यह है कि बर्न वार्ड में जो सुविधाएं होनी चाहिए, उनमें से एक भी सुविधा सर्जिकल वार्ड में उपलब्ध नहीं है। ऐसे में यदि दिवाली पर पटाखों से कोई व्यक्ति झुलसता है, तो उसे नागरिक अस्पताल में इलाज करवाने में परेशानी हो सकती है।

100 बेड के सेक्टर-10 स्थित नागरिक अस्पताल में बर्न वार्ड के लिए स्वास्थ्य विभाग अभी जगह की व्यवस्था नहीं कर पाया था। इससे पहले सिविल लाइंस में बने पुराने नागरिक अस्पताल में जले हुए मरीजों के लिए अलग से बर्न वार्ड बना हुआ था, लेकिन पुराने अस्पताल की इमारत कंडम हो जाने की वजह से उस इमारत को तीन साल पहले खाली कर दिया गया था। ऐसे में बर्न वार्ड का अस्तित्व भी वहीं खत्म हो गया था। पुराने अस्पताल से सभी विभागों को सेक्टर-10 नागरिक अस्पताल में या सेक्टर-31 पॉलीक्लिनिक में स्थानांतरित कर दिया गया था, लेकिन बर्न वार्ड को अभी तक किसी भी सरकारी स्वास्थ्य केंद्र में जगह नहीं मिल पाई है। जिसका खामियाजा सिर्फ मरीजों को परेशानियों से दो-चार होकर भुगतना पड़ता है।

मरीजों को दिल्ली किया जाता है रेफर

नागरिक अस्पताल में बर्न वार्ड नहीं होने की वजह से अस्पताल की इमरजेंसी में केवल 40 फीसदी तक झुलसे घायलों का ही इलाज किया जाता है। प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें सर्जिकल वार्ड में शिफ्ट कर दिया जाता है, लेकिन अगर आगजनी की घटना में कोई व्यक्ति 40 फीसदी से ज्यादा झुलस जाता है, तो उसके इलाज के लिए नागरिक अस्पताल में सुविधाएं और संसाधन उपलब्ध नहीं हैँ। ऐसे में डॉक्टर उन मरीजों को प्राथमिक उपचार देने के बाद दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में रेफर कर देते हैं। हर साल आगजनी की घटनाओं में घायल होने वाले सात से आठ मरीजों को नागरिक अस्पताल से दिल्ली रेफर किया जाता है।

अस्थायी बर्न वार्ड में नहीं सुविधाएं

किसी भी अस्पताल में बर्न वार्ड बनाने के लिए अलग से मानक तय हैं। इसके अनुसार बर्न वार्ड पूरी तरह वातानुकूलित होना चाहिए। इसके अलावा वाइटल पैरामीटर मोनीटर्स, स्किन ग्राफ्ट मैशर, पोर्टेबल लाइट व सर्जरी में इस्तेमाल होने वाले उपकरण उपलब्ध होने चाहिए। इसके अलावा स्टाफ में एक सर्जन, फीजियोथैरेपिस्ट, स्टाफ नर्स, ड्रैसर व बहुउद्देश्यीय स्टाफ होने चाहिए, लेकिन अस्पताल में इस वार्ड के लिए अलग से स्टाफ की भी कोई नियुक्ति नहीं है।

दिवाली को लेकर अस्पताल प्रबंधन पूरी तरह तैयार है। सर्जिकल वार्ड में ही जले हुए मरीजों के लिए अलग से चार बेड लगाए हुए हैं। अस्पताल में अब आईसीयू भी तैयार हो गया है। यदि कोई जला हुआ मरीज आएगा तो अस्पताल में ही उसका इलाज किया जाएगा।

-डॉ. मनीष राठी, उप चिकित्सा अधीक्षक, सेक्टर-10, नागरिक अस्पताल

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