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गुड़गांवदस दोस्तों ने मिलकर दवाइयां,ऑक्सीजन सिलेंडर और कंसंट्रेटर करवाएं उपलब्ध

हिन्दुस्तान टीम,गुड़गांवPublished By: Newswrap
Tue, 25 May 2021 03:00 AM
दस दोस्तों ने मिलकर दवाइयां,ऑक्सीजन सिलेंडर और कंसंट्रेटर करवाएं उपलब्ध

गुरुग्राम। मिलेनियम सिटी में दस दोस्तों की मदद से सौ लोगों की जान बच पाई है। संकट की घड़ी में दोस्तों ने जरूरतमंद मरीजों की मदद कर उनको नया जीवन दान दिलाने का प्रयास किया। दोस्तों ने करीब 12 लाख रुपये खर्च कर सौ ऑक्सीजन कंसंट्रेटर,ऑक्सीजन सिलेंडर और एंबुलेंस दिलवाने में मदद की। इसके अलावा अस्पताल में भर्ती लोग अपना बिल भरने में असमर्थ है। उन लोगों के बिल भी भरें और अस्पतालों में बिल भी कम करवाएं।

घंटों लाइन में लगकर ऑक्सीजन सिलेंडर भरवाएं

गुरुग्राम निवासी महेंद्र सिंह भारत ने बताया कि महामारी में अपनों को मुसीबत में देखकर दूसरों की मदद करने के लिए मुहिम शुरू की। अपने दस दोस्तों के साथ मिलकर लोगां की मदद करनी शुरू की। सबसे पहले अप्रैल महीने में जब ऑक्सीजन की किल्लत होने से मौत होने लगी। ऐसे में ऑक्सीजन के कारण मौत न हो।उसके लिए लोगों की मदद करनी शुरू की। मानेसर ऑक्सीजन प्लांट सहित शहर के अंदर बने ऑक्सीजन रिफ्लिंग सेंटर के बाहर 15 से 16 घंटे लाइन में लगे। उसके बाद 70 लोगों के लिए ऑक्सीजन सिलेंडर घर जाकर उपलब्ध करवाएं। उन्होंने बताया कि पांच दोस्त लाइन में लगे और पांच दोस्त सिलेंडर को घर पहुंचा कर आए।

सोशल मीडिया पर शुरू की मुहिम

महेंद्र सिंह भारत ने बताया कि अपने दोस्तों के साथ मिलकर लोगों की मदद के लिए फेसबुक और टवीटर पर मुहिम शुरू की। इसके साथ ही पांच दोस्तों ने अपने नंबर भी जारी कर दिए। जिसके बाद लोगों ने मदद के लिए उनके नंबर पर संपर्क किया। उसके बाद उनको ऑक्सीजन सिलेंडर की होम डिलीवरी,ऑक्सीजन कंसंट्रेटर,दवाइंया,ऑक्सीमीटर और प्लाज्मा भी दिलवाया। इस मुहिम में लोगो की मदद करते वक्त वह और उनके दोस्त संक्रमित भी हो गए। लेकिन अपनी मुहिम को रूकने नहीं दिया।

12 लाख रुपये किए खर्च

महेंद्र सिंह भारत ने बताया कि अपने दोस्तों के साथ मिलकर कर करीब दो महीनों में 12 लाख रुपये खुद खर्च कर लोगों की मदद की। लोगों की मदद करने के बाद जो सुकुन मिला। उसको बयान नहीं किया जा सकता है। कोविड की दूसरी लहर में जहां रात भर परिवार घर पर बुलाने के लिए फोन करता था। तो वहीं यह दोस्त घर पर परिवार और बच्चों को अकेला छोड़कर रात भर लोगों की मदद करते रहें।लेकिन घर पर नहीं गए।

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