सुल्तानपुर झील से समय से पहले लौटने लगे विदेशी मेहमान, मार्च में ही दिखने लगा सन्नाटा
- मई जैसी तपिश ने बिगाड़ा पक्षियों का प्रवास चक्र, बीते वर्षों की तुलना में एक महीने पहले शुरू हुई वतन वापसी

गुरुग्राम, वरिष्ठ संवाददाता। उत्तर भारत में अचानक बढ़ी भीषण गर्मी का असर अब केवल इंसानों पर ही नहीं, बल्कि सात समंदर पार से आए नन्हें मेहमानों पर भी दिखने लगा है। गुरुग्राम की प्रसिद्ध सुल्तानपुर राष्ट्रीय पक्षी अभयारण्य (झील) से विदेशी परिंदों ने समय से पहले ही अपनी वापसी यात्रा शुरू कर दी है। अमूमन मार्च के अंत या अप्रैल के मध्य तक रुकने वाले यह पक्षी, इस बार मार्च के पहले सप्ताह से ही विदा होने लगे हैं। पक्षी विशेषज्ञों का मानना है कि इस साल फरवरी और मार्च की शुरुआत में ही तापमान 30 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया है, जो सामान्य से करीब 6 डिग्री अधिक है।
चिलचिलाती धूप के कारण झील का पानी अब इन प्रवासी पक्षियों को रास नहीं आ रहा है। ठंडे प्रदेशों (साइबेरिया, रूस और मध्य एशिया) से आने वाले इन परिंदों के लिए 30 डिग्री से अधिक का तापमान बर्दाश्त करना मुश्किल होता है। पानी गर्म होने से जलीय जीवों और वनस्पतियों के चक्र पर भी असर पड़ता है, जिससे पक्षियों के लिए प्राकृतिक भोजन की उपलब्धता प्रभावित होने लगती है।तीन महीने का ही रहा इस बार बसेरापक्षी प्रेमी अनिल गंडास ने बताया कि आमतौर पर विदेशी पक्षी नवंबर के आसपास सुल्तानपुर झील पहुंचते हैं और लगभग 4 से 5 महीने यहां बिताते हैं। लेकिन इस बार केवल तीन महीने रहने के बाद ही उन्होंने वापसी के पर तान लिए हैं। पिछले वर्षों के आंकड़ों पर गौर करें तो पक्षियों का मुख्य जत्था मार्च के आखिरी हफ्ते तक झील में किलोल करता नजर आता था, लेकिन इस बार 25 फरवरी से ही पक्षियों के जाने का सिलसिला शुरू हो गया था। अब झील पर सिर्फ स्थानीय पक्षी ही नजर आते हैं जो इस गर्मी को सहन कर पाते हैं।पर्यटकों में छाई मायूसीपक्षियों के जल्दी जाने से वन्यजीव प्रेमियों और पर्यटकों में भी मायूसी है। सप्ताहांत पर जो लोग रंग-बिरंगे परिंदों को देखने सुल्तानपुर पहुंच रहे हैं, उन्हें अब झील के कई हिस्से सूने नजर आ रहे हैं। वन्यजीव अधिकारियों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण पक्षियों के प्रवास पैटर्न में यह बदलाव एक चिंताजनक संकेत है। यदि गर्मी इसी तरह बढ़ती रही, तो आने वाले वर्षों में विदेशी मेहमानों के रुकने का समय और भी कम हो सकता है।
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