
सख्ती के बाद आठ महीनों में गुरुग्राम जिले के लिंगानुपात में हुआ सुधार, 881 तक पहुंचा
संक्षेप: सख्ती:गुरुग्राम,प्रमुख संवाददाता। बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान के तहत स्वास्थ्य विभाग की राज्य टास्क फोर्स (एसटीएफ) के लगातार प्रयासों और आठ माह से चल
गुरुग्राम। बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान के तहत स्वास्थ्य विभाग की राज्य टास्क फोर्स (एसटीएफ) के लगातार प्रयासों और आठ माह से चल रही सख्ती के कारण हरियाणा के जन्म के समय लिंगानुपात में बड़ा सुधार दर्ज किया गया है। राज्य का लिंगानुपात पिछले वर्ष के 904 से बढ़कर अक्तूबर 2025 में 912 तक पहुंच गया है। यह सुधार पहली जनवरी से 10 नवंबर की अवधि के बीच दर्ज किया गया है, जिसकी जानकारी स्वास्थ्य सेवाएं निदेशक डॉ. वीरेंद्र यादव की अध्यक्षता में हुई साप्ताहिक एसटीएफ बैठक में साझा की गई। 54 पॉइंट्स का उछाल बैठक में सभी जिलों के आंकड़ों पर विशेष ध्यान दिया गया।

इस दौरान गुरुग्राम जिले की प्रगति को उल्लेखनीय बताया गया। मार्च माह में गुरुग्राम का लिंगानुपात 827 के बेहद निचले स्तर पर था, लेकिन स्वास्थ्य विभाग की टास्क फोर्स ने अवैध गर्भपात किट बेचने वाले केमिस्ट और सप्लायरों पर सख्त कार्रवाई की। आठ महीनों में सात से अधिक मामले दर्ज किए गए और कई केमिस्ट की दुकानों के लाइसेंस रद्द किए गए। इस सख्ती का नतीजा यह रहा कि अक्तूबर 2025 में जिले का लिंगानुपात 54 पॉइंट्स बढ़कर 881 तक पहुंच गया है। हालांकि यह अभी भी प्रदेश के औसत 912 से 31 पॉइंट्स कम है, जिसके लिए जागरूकता बढ़ाने और सख्ती जारी रखने के निर्देश दिए गए हैं। इन जिलों ने भी दर्ज किया सुधार जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार फ़तेहाबाद, गुरुग्राम, पंचकूला, पानीपत और रेवाड़ी जैसे जिलों ने लिंगानुपात सुधार में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। वहीं, सिरसा, सोनीपत और चरखी दादरी में अभी भी गिरावट देखी गई है, जिसके कारण इन जिलों के अधिकारियों को सतर्कता बढ़ाने और अल्ट्रासाउंड केंद्रों के समन्वित निरीक्षण करने के सख्त निर्देश दिए गए हैं। खराब प्रदर्शन पर अधिकारियों से जवाब मांगा डॉ. वीरेंद्र यादव ने अवैध गर्भपात के मामलों में कठोरतम कार्रवाई के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि दोषी पाए जाने वाले डॉक्टरों के लाइसेंस रद्द करने सहित दंडात्मक कार्रवाई की जाए। खराब लिंगानुपात को लेकर चरखी दादरी के गोपी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के एसएमओ को आरोप पत्र जारी किया गया है। इसके अलावा नारायणगढ़, मुलाना और चौरमस्तपुर के एसएमओ प्रभारी, और पलवल, चरखी दादरी, सिरसा तथा सोनीपत के सीएमओ को भी कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है, जो ज़िला स्तर पर जवाबदेही तय करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। अपंजीकृत बालिकाओं के लिए विशेष अभियान भविष्य में लिंगानुपात को और बेहतर बनाने के लिए डॉ. यादव ने अधिकारियों को कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए। पंजीकरण अभियान: एक वर्ष से कम उम्र की सभी अपंजीकृत बच्चियों का पंजीकरण सुनिश्चित करने के लिए विशेष अभियान चलाया जाएगा, खासकर उन जिलों में जहां लिंगानुपात कम है। डेटा मिलान: सटीकता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए सीआरएस पोर्टल के आंकड़ों को वास्तविक प्रसव रिकॉर्ड के साथ जोड़ा जाएगा। कानूनी कार्रवाई: अवैध गर्भपात के मामलों में दोषसिद्धि दर में सुधार के प्रयास मजबूत किए जाएँगे और आवश्यकतानुसार नई अपील दायर की जाएगी। सामुदायिक भागीदारी: जागरूकता कार्यक्रमों को बढ़ाने, आंगनवाड़ी और आशा कार्यकर्ताओं को शामिल करने तथा संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया गया है।

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