मनाली से भी सर्द रही मिलेनियम सिटी
गुरुग्राम और रेवाड़ी में ठंड ने लोगों को परेशान किया। गुरुग्राम का न्यूनतम तापमान 0.6 डिग्री सेल्सियस और रेवाड़ी में -1.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। कृषि पर असर पड़ने की आशंका है, जबकि ठंड से पक्षियों की सेहत भी प्रभावित हो रही है। बर्ड हॉस्पिटल में रोजाना बीमार पक्षियों की संख्या बढ़ रही है।
गुरुग्राम। दिल्ली से सटे गुरुग्राम और पड़ोसी जिले रेवाड़ी में ठंड ने सोमवार को लोगों की कंपकंपी छुड़ा दी। शिमला और मनाली से भी मिलेनियम सिटी सर्द रही। सोमवार को गुरुग्राम का न्यूनतम तापमान 0.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि शिमला का न्यूनतम तापमान तीन डिग्री जबकि और मनाली का 2.1 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, सोमवार का दिन ऐतिहासिक रहा। गुरुग्राम के सेक्टर-70, 74 और 37 के आसपास के खुले मैदानी इलाकों में न्यूनतम तापमान 0.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। शहर के इतिहास में 90 साल बाद ऐसी स्थिति बनी है। इससे पहले जनवरी 1935 में इस क्षेत्र का तापमान 0.6 डिग्री रिकॉर्ड हुआ था।
यह जानलेवा ठंड सुबह तीन बजे से साढ़े पांच बजे के बीच अपने चरम पर थी। आलम यह था कि सुबह जब लोग जागे, तो पार्क में घास की पत्तियों और सड़कों पर खड़ी गाड़ियों के शीशों पर बर्फ की पतली परत (पाला) जमी हुई थी। हालांकि, शहर का औसत न्यूनतम तापमान 2.7 डिग्री रहा। फसल खराब होने की आशंका : इस कड़कड़ाती ठंड का सबसे बुरा असर कृषि क्षेत्र पर पड़ने की आशंका है। रेवाड़ी और गुरुग्राम के ग्रामीण अंचलों में सरसों की डालियों और अन्य फसलों पर सुबह पाले की सफेद चादर बिछी पाई गई। पाला जमने से सरसों और सब्जियों की फसल के खराब होने का खतरा बढ़ गया है। किसानों का कहना है कि अगर ऐसी ही ठंड दो-तीन दिन और रही, तो उत्पादन में भारी गिरावट आ सकती है। हालांकि, सोमवार सुबह नौ बजे के बाद निकली चटक धूप ने पाले को पिघलाकर थोड़ी राहत जरूर दी। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, पहाड़ों पर हुई भारी बर्फबारी के बाद वहां से सीधी उत्तर-पश्चिमी हवा मैदानी इलाकों की ओर रुख कर रही है। गुरुग्राम और रेवाड़ी जैसे क्षेत्रों में कंक्रीट के निर्माणों के बीच मौजूद खुले मैदान कोल्ड पॉकेट का काम कर रहे हैं, जहां रेडिएशन कूलिंग की वजह से जमीन की गर्मी तेजी से वायुमंडल में चली जाती है और तापमान शून्य के करीब पहुंच जाता है। रेवाड़ी में -1.5 सेल्सियस तक पहुंचा पारा : गुरुग्राम से सटे रेवाड़ी जिले में स्थिति और भी गंभीर रही। यहां शीतलहर का प्रकोप इस कदर रहा कि न्यूनतम तापमान लुढ़ककर -1.5 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया। रविवार को यहां पारा -0.6 डिग्री था, लेकिन सोमवार को इसने पिछले सारे रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए। रेवाड़ी में कोहरे और पाले के कारण लोग घरों में दुबकने को मजबूर हो गए। कड़ाके की ठंड से परिंदे भी हो रहे बीमार गुरुग्राम। शहर में कड़ाके की ठंड अब इंसानों के साथ बेजुबान परिंदों पर भी भारी पड़ने लगी है। न्यूनतम तापमान 5 डिग्री सेल्सियस से नीचे पहुंचते ही पेड़ों में घोंसले बनाकर रहने वाले पक्षी बीमार होकर जमीन पर गिरने लगे हैं। जैकबपुरा स्थित बर्ड हॉस्पिटल में रोजाना 15 से 20 बीमार पक्षियों को इलाज के लिए लाया जा रहा है। सबसे ज्यादा असर कबूतर, तोता, मैना और मोर के बच्चों पर देखा जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, छोटे पक्षियों के पंख पूरी तरह विकसित नहीं होते, जिससे वे खुद को ठंड से नहीं बचा पाते। ठंड से बचने के लिए पंख समेटने के बावजूद उनका शरीर ठंड की चपेट में आ जाता है। वे कमजोरी, सुस्ती और उड़ान में परेशानी का शिकार हो रहे हैं। बर्ड हॉस्पिटल के डॉ. राजकुमार बताते हैं कि ठंड के साथ बढ़ता वायु प्रदूषण भी पक्षियों की सेहत पर भारी पड़ रहा है। इस मौसम में पक्षियों में कोराइजा नामक बीमारी के मामले तेजी से बढ़े हैं। इस बीमारी में पक्षियों की आंखों में जलन, पानी बहना, सांस लेने में दिक्कत और कमजोरी जैसी समस्याएं सामने आती हैं। पिछले 50 दिनों में 250 से अधिक पक्षियों को अस्पताल लाया गया है। सोमवार को गुरुग्राम का एक्यूआई 297 दर्ज किया गया।

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