रोजमर्रा के सामान से लेकर फर्नीचर तक महंगा
गुरुग्राम में वैश्विक तनाव के कारण कच्चे माल की आपूर्ति प्रभावित हो रही है, जिससे महंगाई बढ़ रही है। हर सेक्टर में कीमतें तेजी से बढ़ी हैं, जिससे मिडिल क्लास परिवारों को बचत छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा है। आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में उछाल और निर्माण लागत में वृद्धि से बाजार में सुस्ती का माहौल बना है।

गुरुग्राम,साक्षी रावत। वैश्विक स्तर पर बढ़ते तनाव की तपिश अब सीधे गुरुग्राम की रोजमर्रा की जिंदगी में महसूस होने लगी है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे माल की आपूर्ति प्रभावित होने और आयात महंगा पड़ने का असर मिलेनियम सिटी के हर सेक्टर पर दिख रहा है। घर का बजट हो, फर्नीचर और इंटीरियर का खर्च या फिर मकान बनाने की लागत, हर मोर्चे पर कीमतों में तेजी ने आम लोगों की आर्थिक योजना को झकझोर दिया है। मिडिल क्लास परिवार, जो पहले सीमित आय में संतुलन बनाकर चल रहे थे, अब बढ़ते खर्चों के बीच बचत तक छोड़ने को मजबूर हैं। वहीं, कारोबारियों के सामने भी दोहरी चुनौती है।
एक तरफ बढ़ती लागत, दूसरी ओर घटती मांग। नतीजा यह है कि गुरुग्राम में महंगाई सिर्फ आंकड़ों तक सीमित नहीं रही, बल्कि लोगों की दिनचर्या, खरीदारी की आदतों और जीवनशैली पर सीधा असर डाल रही है।कीमतों में उतार-चढ़ाव के कारण इसका सीधा असर सब्जी, राशन और दूध जैसे जरूरी सामान पर पड़ा है। सेक्टर-31 निवासी अनीता शर्मा बताती हैं पहले जहां महीने का राशन 6-7 हजार में आ जाता था, अब 9 हजार से ऊपर खर्च हो रहा है। बचत करना मुश्किल हो गया है। फर्नीचर और इंटीरियर सेक्टर में भी महंगाई की मार तेज है। फोम, प्लास्टिक और लकड़ी के दाम बढ़ने से सोफा, बेड और किचन सेट 30 से 35 प्रतिशत तक महंगे हो गए हैं। सोहना रोड के फर्नीचर कारोबारी राजेश यादव कहते हैं कच्चा माल लगातार महंगा हो रहा है। हमें मजबूरी में कीमतें बढ़ानी पड़ रही हैं, लेकिन ग्राहक पहले जितना खरीद नहीं रहे। निर्माण क्षेत्र भी इससे अछूता नहीं है। सीमेंट, स्टील और अन्य सामग्री महंगी होने से बिल्डिंग कॉस्ट में भारी उछाल आया है। सेक्टर-57 में निर्माण कार्य से जुड़े ठेकेदार इमरान का कहना है पिछले कुछ महीनों में लागत इतनी बढ़ गई है कि नए प्रोजेक्ट शुरू करने से लोग हिचक रहे हैं। जो काम चल रहे हैं, उनमें भी खर्च नियंत्रण मुश्किल हो गया है।इलेक्ट्रॉनिक्स और ऑटो सेक्टर में भी कीमतों का असर दिख रहा है। आयातित पुर्जों की लागत बढ़ने से मोबाइल, लैपटॉप और गाड़ियों के दाम बढ़े हैं, साथ ही डिलीवरी में देरी भी हो रही है। इससे ग्राहकों की खरीदारी पर असर पड़ा है और बाजार में सुस्ती का माहौल है। कारोबारियों का कहना है कि लागत बढ़ने के बावजूद ग्राहकों की आय में उतनी वृद्धि नहीं हुई है, जिससे मांग कमजोर पड़ रही है। वहीं, आम लोगों को अब खर्चों में कटौती कर प्राथमिकताएं तय करनी पड़ रही हैं।
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