विश्व मोटापा दिवस: मिलेनियम सिटी में बढ़ता मोटापा, कम उम्र में बच्चों पर मंडराता खतरा
- हेल्थ चेकअप में बढ़े ओवरवेट के मामले, अस्पतालों में मोटापे से जुड़ी ओपीडी में 25-30% तक इजाफा

गुरुग्राम। साइबर सिटी के रूप में पहचान बना चुके गुरुग्राम में अब एक और चिंता तेजी से उभर रही है-बचपन में बढ़ता मोटापा। बीते कुछ वर्षों में शहर के अस्पतालों और स्कूलों से जो आंकड़े सामने आए हैं, वे संकेत दे रहे हैं कि कम उम्र में ही बच्चों का वजन सामान्य सीमा से बाहर जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह समस्या केवल खानपान तक सीमित नहीं है, बल्कि बदलती जीवनशैली, स्क्रीन टाइम और शारीरिक गतिविधियों में कमी इसका बड़ा कारण बन रही है। चमचमाते मॉल, फास्ट फूड आउटलेट्स, हाई-टेक लाइफस्टाइल और व्यस्त दिनचर्या के बीच यहां के बच्चों में मोटापे के मामले लगातार बढ़ रहे हैं।
जिले के सरकारी अस्पताल की बात करें तो यहां के आंकड़ों के अनुसार शहरी क्षेत्रों में 5 से 19 वर्ष आयु वर्ग के लगभग 14-20% बच्चे ओवरवेट या मोटापे की श्रेणी में आ चुके हैं। गुरुग्राम के कुछ निजी स्कूलों में कराए गए हेल्थ चेकअप के अनुसार, हर 10 में से 3 बच्चों का बीएमआई सामान्य से अधिक पाया गया। बाल रोग विशेषज्ञों के अनुसार पिछले 5-7 वर्षों में ओपीडी में मोटापे से संबंधित मामलों में 25-30% तक वृद्धि दर्ज की गई है। कुछ वर्ष पहले तक मोटापा ज्यादातर वयस्कों की समस्या माना जाता था, लेकिन अब 6 से 16 वर्ष तक के बच्चों में भी बढ़ता वजन चिंता का विषय बन चुका है। शहर के निजी स्कूलों और अस्पतालों से मिली जानकारी के अनुसार हर 10 में से 3 बच्चों का वजन सामान्य से अधिक पाया जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि कोरोना काल के बाद ऑनलाइन क्लास, मोबाइल और वीडियो गेम की लत ने बच्चों की शारीरिक गतिविधियों को काफी कम कर दिया। खेल के मैदान खाली हुए और स्क्रीन टाइम कई गुना बढ़ गया।
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