
35 हजार मेहमानों से गुलजार हुआ वैटलैंड, टूटा रिकॉर्ड
- 150 प्रजातियों की दस्तक, यूरोप से आया दुर्लभ सफेद पूंछ वाला ईगल बना आकर्षण, पहली बार सपरिवार पहुंचे ग्रेटर स्पॉटेड ईगल
गुरुग्राम। विश्व प्रसिद्ध सुल्तानपुर नेशनल पार्क और नजफगढ़ झील इस समय विदेशी मेहमानों की चहचहाहट से सराबोर है। इस साल पक्षियों की संख्या ने नया कीर्तिमान स्थापित किया है। अंतरराष्ट्रीय संस्था वैटलैंड इंटरनेशनल साउथ एशिया, हरियाणा बायोडायवर्सिटी बोर्ड और वन्य जीव विभाग की संयुक्त टीमों द्वारा की गई गणना में यह सामने आया है कि इस बार झीलों में पक्षियों की संख्या 30 से 35 हजार के बीच पहुंच गई है। मंगलवार को पक्षियों की सटीक गणना और प्रजातियों की पहचान के लिए तीन विशेष टीमों का गठन किया गया था। प्रत्येक टीम में 8 से 10 पक्षी विशेषज्ञ शामिल थे।
गुरुग्राम के जिला समन्वयक अंशुल लाकड़ा ने बताया कि यह पूरी गणना प्रसिद्ध पक्षी वैज्ञानिक और अंतरराष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ के सदस्य डॉक्टर टीके रॉय के नेतृत्व में संपन्न हुई। विशेषज्ञों की इन टीमों ने सुल्तानपुर झील के साथ-साथ नजफगढ़ झील के वैटलैंड्स का भी स्थल मूल्यांकन किया। - देशी कम, विदेशी पक्षी ज्यादा पहुंचे इस बार की गणना में पक्षियों की प्रजातियों और उनकी आबादी को लेकर चौंकाने वाले और सुखद आंकड़े सामने आए हैं। गणना के अनुसार लगभग 150 प्रजातियों ने यहां दस्तक दी है। इसमें 50 विदेशी प्रजातियों के करीब 20 से 25 हजार पक्षी यहां पहुंचे हैं। 100 स्थानीय प्रजातियों के लगभग 10 हजार पक्षी देखे गए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि सुल्तानपुर के शांत वातावरण और प्रचुर भोजन की उपलब्धता के कारण इस बार प्रवासी पक्षियों की संख्या में भारी बढ़ोतरी हुई है। - इस सीजन में दुर्लभ पक्षियों की वापसी वन्य जीव प्रेमी अनिक गंडास के अनुसार, इस साल कई ऐसी प्रजातियां देखी गई हैं जो सालों बाद लौटी हैं या जिनकी संख्या में अप्रत्याशित वृद्धि हुई है। - व्हाइट-टेल्ड ईगल (सफेद पूंछ वाली चील): यूरोप से हजारों मील का सफर तय कर पहुंचा यह दुर्लभ शिकारी पक्षी पूरे 3 साल बाद सुल्तानपुर में दिखा है। - ग्रेटर स्पॉटेड ईगल (बड़ा चितकबरा बाज): यह पहली बार है जब यह राजसी पक्षी अपने पूरे परिवार और ग्रुप के साथ सुल्तानपुर पहुंचा है। - वॉटर रेल (जल रेल): पहले यह बमुश्किल 1 या 2 ही नजर आते थे, लेकिन इस बार इनकी संख्या बढ़कर 8 से 10 हो गई है। - बार-हेडेड गूज (राजहंस): दुनिया के सबसे ऊंचे उड़ने वाले ये हंस पहली बार 10 से अधिक की बड़ी टोली में देखे गए हैं। रड्डी-ब्रिस्टेड क्रेक (लाल छाती वाला क्रेक): इस बार इनकी संख्या में रिकॉर्ड बढ़ोतरी दर्ज की गई है। ग्रेट व्हाइट-फ्रंटेड गूज (सफेद माथे वाला बड़ा हंस): यह अत्यंत दुर्लभ हंस भी झील की शोभा बढ़ा रहा है। ऑरेंज-हेडेड थ्रश: अपने चटकीले रंग के कारण फोटोग्राफर्स की पहली पसंद बना हुआ है। जंगल नाइटजार (जंगली रातचरा): रात के समय सक्रिय रहने वाला यह पक्षी भी गणना के दौरान चिन्हित किया गया। - पर्यावरण के लिए शुभ संकेत हरियाणा बायोडायवर्सिटी बोर्ड के अधिकारियों का मानना है कि इतनी बड़ी संख्या में विदेशी पक्षियों का आना सुल्तानपुर और नजफगढ़ झील के पारिस्थितिकी तंत्र के स्वस्थ होने का प्रमाण है। वैटलैंड इंटरनेशनल साउथ एशिया अब इन पक्षियों के प्रवास पैटर्न का और अधिक गहराई से अध्ययन करेगी ताकि इस रामसर साइट के संरक्षण के लिए भविष्य की योजनाएं बनाई जा सकें।

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