
फर्जी दस्तावेजों पर पास कराया भवन का नक्शा रद्द
गुरुग्राम नगर निगम में पूर्व पार्षद द्वारा फर्जी दस्तावेजों के आधार पर बिल्डिंग का नक्शा पास कराने का मामला सामने आया है। शिकायत के बाद निगम ने नक्शा रद्द कर दिया है, लेकिन अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं हो रही है। शिकायतकर्ता ने दोषियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की है।
गुरुग्राम,वरिष्ठ संवाददाता। नगर निगम गुरुग्राम में राजनीतिक प्रभाव के दुरुपयोग और अधिकारियों की घोर लापरवाही का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। निगम के एक पूर्व पार्षद ने कथित तौर पर अधिकारियों को गुमराह कर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर लक्ष्मी गार्डन स्थित अपनी बिल्डिंग का नक्शा पास करवा लिया था। मामले की शिकायत हुई तो अब निगम ने उस भवन के नक्शे को रद्द कर दिया है। निगम की प्राथमिक जांच में पूर्व पार्षद द्वारा नक्शा पास कराने के लिए लगाए गए कागज गलत मिले हैं। इसी को लेकर निगम ने भवन का नक्शा रद्द किया है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि फर्जी कागज होने के बाद निगम ने भवन के नक्शे को रद्द तो कर दिया है, लेकिन इसके बाद भी अब न तो अधिकारियों की लापरवाही पर कोई कार्रवाई हो रही है और न ही अवैध रूप से खड़ी की गई पांच मंजिला इमारत को ध्वस्त किया जा रहा है, जिससे निगम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
इसको लेकर निगम में सितंबर 2024 में एक शिकायत दर्ज हुई थी। इसके बाद निगम की जांच में खुलासा हुआ कि नक्शा स्वामित्व विवाद और कानूनी स्थिति से संबंधित तथ्यों को छिपाकर प्राप्त किया गया था। आरोप है कि निगम की योजनाकार विंग की शाखा ने बिना किसी जांच के भवन का नक्शा पास कर दिया। सेल्फ-सर्टिफिकेशन सिस्टम का दुरुपयोग: निगम को दी गई शिकायत में आरोप है कि 24 जून, 2024 को यह बिल्डिंग प्लान होबपास पोर्टल पर सेल्फ-सर्टिफिकेशन श्रेणी के तहत पास किया गया था। आरोप है कि अधिकारियों ने बिना किसी उचित जांच के ही फर्जी कागजों पर नक्शा पास करके दिया। इसका फायदा उठाकर पूर्व पार्षद ने मौके पर ही पांच मंजिला इमारत खड़ी कर दी। निगम द्वारा नक्शा रद्द किया गया है उस आदेश में स्पष्ट कहा गया है कि आवेदक ने झूठी अंडरटेकिंग दी थी कि संपत्ति पर कोई अदालती मामला लंबित नहीं है, जबकि बाद की जांच में संपत्ति विवाद में पाई गई। यह तथ्य हरियाणा बिल्डिंग कोड, 2017 के क्लॉज़ 4.7 का सीधा उल्लंघन है, जिसके कारण मंज़ूरी अमान्य हो गई। कार्रवाई से बच रहे अधिकारी आरोप है कि नक्शा रद्द होने के बावजूद, निगम अधिकारी अब कार्रवाई से कतरा रहे हैं। जिस अधिकारी या टीम ने बिना जांच किए, फर्जी कागजों के आधार पर नक्शा पास किया, उन पर कोई विभागीय कार्रवाई नहीं हो रही है। नक्शा रद्द होने के बाद नियमानुसार पांच मंजिला अवैध बिल्डिंग पर तुरंत विध्वंस की कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन निगम अधिकारी इस पर भी चुप्पी साधे हुए हैं। अधिकारियों का यह रुख दर्शाता है कि वे न तो अवैध बिल्डिंग पर कार्रवाई कर रहे हैं, और न ही फर्जी कागजों पर नक्शा पास करने वाले व करवाने वाले दोषियों पर कार्रवाई कर रहे हैं। शिकायकर्ता ने मामला दर्ज करने मांग शिकायतकर्ता महिला बिमला ने अपनी शिकायत में मामले में शामिल अधिकारियों और पूर्व पार्षद के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि आधिकारिक अनुमति प्राप्त करने के लिए जाली दस्तावेज़ों का उपयोग करना एक संज्ञेय अपराध है। तहसीलदार, नगर निगम अधिकारियों और मुख्य नगर योजनाकार सहित कई प्राधिकरण इस मामले की जांच कर रहे हैं, लेकिन राजनीतिक प्रभाव के चलते कार्रवाई अधर में लटकी हुई है। इस रद्द आदेश को उच्च न्यायालय में चुनौती दी है। यह ब्लैकमेलर द्वारा फंसाने की जानबूझकर की गई कोशिश है। हमारी लेन में 50 से अधिक घरों ने मानदंडों का उल्लंघन किया है, लेकिन उन पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है। - कपिल दुआ, पूर्व निगम पार्षद शिकायत के बाद भवन का नक्शा रद्द कर दिया है। मामले की जांच चल रही है। - सिद्धार्थ खंडेलवाल, एसटीपी, नगर निगम, गुरुग्राम

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