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ओपीडी और जांच केंद्र पर मरीजों की कतार

हिन्दुस्तान टीम,गुड़गांवNewswrap
Mon, 25 Oct 2021 11:20 PM
ओपीडी और जांच केंद्र पर मरीजों की कतार

गुरुग्राम। सेक्टर-10 स्थित नागरिक अस्पताल के समय में भले ही बदलाव हो गया है, लेकिन व्यवस्थाओं में सुधार को लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं। इन दिनों वायरल, डेंगू, डायरिया की चपेट में लोग तेजी से आ रहे हैं। जो इलाज के लिए अस्पतालों में पहुंच रहे हैं। नागरिक अस्पताल में इन मरीजों की इलाज कराने से पहले ही घंटों इंतजार करके सांस फूल रही है। ओपीडी से लेकर जांच केंद्र पर मरीजों की लंबी कतारें लग रही हैं। जिनमें मरीजों को अपनी बारी आने तक दो से तीन घंटे तक खड़े रहना पड़ता है। बावजूद अस्पताल प्रबंधन की ओर से अतिरिक्त व्यवस्थाएं करने पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है।

रविवार की छुट्टी के बाद सोमवार को इलाज के लिए आए मरीजों की सेक्टर-10 नागरिक अस्पताल में भीड़ उमडी रही। अस्पताल का समय सुबह नौ बजे का हो गया है, लेकिन समय पर जांच हो सके इसके लिए मरीज अब भी ओपीडी खुलने के समय से दो से तीन घंटे पहले पहुंच रहे हैं। सबसे पहले उन्हें पंजीकरण कराने के लिए काउंटर के सामने कतारों में लगकर धक्के खाने पड़ते हैं। उसके बाद ओपीडी के बाहर कतार में अपना नंबर आने का इंतजार करना पड़ता है। मरीजों का कहना है कि कभी डॉक्टर कुर्सी से उठकर चले जाते हैं, तो कभी गेट पर खड़े चपरासी जान पहचान के लोगों को पहले ओपीडी में घुसा देते हैं। जिसकी वजह से उन्हें अपनी जांच कराने के लिए कई घंटों इंतजार करना पड़ता है। सोमवार को भारी भीड़ के बीच मरीजों को इसी तरह की जद्दोजहद करनी पड़ी। कुछ मरीज घंटों खड़े रहकर थक जाने के कारण जमीन पर बैठ गए और अंत में भीड़ कम होने पर उन्होंने अपनी जांच करवाई।

200 मरीजों की जांच के लिए सिर्फ एक डॉक्टर:

नागरिक अस्पताल में प्रत्येक रोग की ओपीडी में प्रतिदिन औसतन 200 मरीज इलाज कराने के लिए पहुंचते हैं। हैरानी की बात यह है कि ओपीडी में 200 मरीजों की जांच के लिए सिर्फ एक ही डॉक्टर मौजूद रहता है। ऐसे में जांच प्रक्रिया में काफी समय लगता है, जिससे मरीजों को घंटों ओपीडी के बाहर बैठकर ही इंतजार करना पड़ता है। वहीं मरीजों का यह भी आरोप है कि दबाव अधिक होने की वजह से डॉक्टर उनकी पूरी बात भी नहीं सुनते। सोमवार को सबसे ज्यादा भीड़, मेडिसिन ओपीडी, चर्म रोग ओपीडी, सर्जन ओपीडी, स्त्री रोग ओपीडी और बाल रोग ओपीडी के बाहर रही। आधे से एक घंटा इंतजार करने के बाद मरीजों की जांच का नंबर आ पाया।

एक ही काउंटर पर नमूने देने वालों की भीड़:

रक्त जांच के लिए नमूने एकत्रित करने को अस्पताल में सिर्फ एक ही काउंटर है। वो भी सिर्फ तीन घंटे के लिए ही खुलता है। ऐसे में मरीजों को नमूने देने के लिए जंग लड़नी पड़ती है। लंबी कतारों में बच्चे, महिलाएं, बुजुर्ग सब अपनी बारी आने का इंतजार करते हैं। प्रतिदिन 300 से ज्यादा लोग नमूने देते हैं। बावजूद अस्पताल प्रबंधन उनके लिए अतिरिक्त काउंटर नहीं शुरू कर रहा, जिससे कि मरीजों को नमूने देने में कम समय लगे।

पूरी दवाइयां भी नहीं उपलब्ध:

मरीजों को डॉक्टर द्वारा लिखी गई पूरी दवाइयां भी नागरिक अस्पताल से नहीं मिल पा रही हैं। जो दवाइयां अस्पताल में उपलब्ध नहीं होती, मरीजों को मजबूरी में अपनी जेब से पैसा खर्च कर वो दवाइयां बाहर से खरीदनी पड़ती हैं। इसकी वजह से सबसे ज्यादा परेशानी उन गरीब तबके के मरीजों को उठानी पड़ती है, जिनके पास बाजार से महंगी दवा खरीदने के पैसे नहीं थे। ऐसे में वह मरीज पूरी दवा नहीं मिलने की वजह से अपना इलाज भी पूरा नहीं कर पाते हैं।

रिपोर्ट लेने के लिए दोबारा आना पड़ता है अस्पताल:

जांच रिपोर्ट के लिए भी मरीजों को बार-बार अस्पताल के चक्कर लगाने पड़ते हैं। सुबह नमूने दे कर जाने के बाद मरीजों को दोपहर में अस्पताल आकर रिपोर्ट लेनी पड़ती है। रिपोर्ट लेने वालों की भी दोपहर में अस्पताल में लंबी कतार लगी रहती है। इस कदर मरीजों को नागरिक अस्पताल में जांच से लेकर इलाज कराने में पूरा दिन बिताना पड़ता है।

बयान:

रविवार की छुट्टी होने की वजह से ओपीडी बंद रही थी। इसकी वजह से सोमवार को अस्पताल में मरीजों की भीड़ अन्य दिनों की अपेक्षा ज्यादा रही। मरीजों की सुविधा के लिए पंजीकरण के लिए एक अलग काउंटर खोला गया था। दवाइयां का भी अस्पताल में पूरा स्टॉक है। टोकन नंबर के आधार पर ही मरीजों को ओपीडी में देखा जाता है।

-डॉ. मनीष राठी, उप चिकित्सा अधीक्षक, सेक्टर-10 नागरिक अस्पताल

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