रहेजा डेवलपर्स के खिलाफ दिवाला प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश

हिन्दुस्तान, गुड़गांव
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गुरुग्राम, रहेजा डेवलपर्स लिमिटेड को एनसीएलटी से झटका लगा है। न्यायाधिकरण ने दिवाला समाधान प्रक्रिया शुरू करने की याचिका स्वीकार की। इससे 176 फ्लैट खरीदारों को राहत मिली, जो पिछले 15 साल से अपने फ्लैट के लिए इंतज़ार कर रहे थे।

रहेजा डेवलपर्स के खिलाफ दिवाला प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश

गुरुग्राम, गौरव चौधरी। रहेजा डेवलपर्स लिमिटेड को राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) से बड़ा झटका लगा है। एनसीएलटी की नई दिल्ली स्थित प्रधान पीठ ने रहेजा डेवलपर्स के खिलाफ दिवाला समाधान प्रक्रिया शुरू करने की याचिका को स्वीकार कर लिया है। न्यायाधिकरण के इस फैसले से गुरुग्राम के सेक्टर-78 स्थित रेवांता रिहायशी प्रोजेक्ट के उन 176 फ्लैट खरीदारों को बड़ी राहत मिली है, जो पिछले डेढ़ दशक से अपने आशियाने के लिए भटक रहे थे। न्यायाधिकरण ने अपने आदेश में स्पष्ट रूप से माना है कि डेवलपर द्वारा खरीदारों को तय समय-सीमा के भीतर फ्लैटों का कब्जा न देना प्रथम दृष्टया मे चूक और अनुबंध के उल्लंघन का मामला बनता है。

कानूनी लड़ाई का संघर्ष

यह पूरी कानूनी लड़ाई सुरिंदर अग्रवाल सहित 176 खरीदारों द्वारा एकजुट होकर लड़ी गई। इन याचिकाकर्ताओं के पास इस विशाल प्रोजेक्ट में कुल 99 रिहायशी यूनिट (फ्लैट/फ्लोर) हैं। याचिकाकर्ताओं ने न्यायाधिकरण के समक्ष अपनी पीड़ा रखते हुए बताया कि वे फ्लैट की कुल कीमत का 90 से 95 प्रतिशत तक का भुगतान कंपनी को बहुत पहले ही कर चुके हैं। सभी खरीदारों ने मिलकर लगभग 137 करोड़ रुपये से अधिक की अपनी गाढ़ी कमाई इस प्रोजेक्ट में निवेश की थी,लेकिन भारी-भरकम राशि जमा कराने के बावजूद वर्षों बीत जाने पर भी उन्हें फ्लैटों का कब्जा नहीं मिला। एनसीएलटी में करीब ढाई साल तक चली लंबी और सघन कानूनी बहस के बाद आखिरकार फैसला आव allotियों के पक्ष में आया है।

प्रोजेक्ट का इतिहास

2011 में शुरू हुआ था प्रोजेक्ट। न्यायाधिकरण को सौंपे गए दस्तावेजों के अनुसार, रहेजा डेवलपर्स ने साल 2011 में रेवांता परियोजना की शुरुआत की थी। बुकिंग के समय कंपनी ने वादा किया था कि स्वतंत्र फ्लोर का कब्जा 36 महीने और ऊंची इमारतों में बने फ्लैटों का कब्जा 48 महीने के भीतर हर हाल में सौंप दिया जाएगा। इतना ही नहीं, जब हरियाणा रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी का गठन हुआ, तब डेवलपर ने रेरा के समक्ष इस प्रोजेक्ट को पूरा करने की अंतिम समय-सीमा 31 जुलाई 2022 घोषित की थी। इसके बावजूद कंपनी न तो समय पर निर्माण पूरा कर सकी, न खरीदारों को कब्जा दे पाई और न ही देरी के एवज में किया गया कोई मुआवजा दिया।

खरीदारों की समस्याएँ

हरेरा के आदेशों को भी किया दरकिनार। पीड़ित खरीदारों ने कंपनी पर गंभीर वादाखिलाफी के आरोप लगाए हैं। याचिका में कहा गया कि कंपनी ने कई मौकों पर लिखित और मौखिक रूप से अपनी देरी को स्वीकार किया था और जल्द ही कब्जा व मुआवजा देने का आश्वासन दिया था, लेकिन धरातल पर कुछ नहीं हुआ। कुछ पीड़ितों के मामलों में हरेरा गुरुग्राम ने बिल्डर को पैसे वापस करने और ब्याज देने के कड़े आदेश भी जारी किए थे, लेकिन कंपनी ने उन आदेशों का भी पालन नहीं किया। मजबूर होकर खरीदारों को एनसीएलटी का दरवाजा खटखटाना पड़ा।

डेवलपर्स का बचाव

रहेजा डेवलपर्स की दलीलें हुईं खारिज। सुनवाई के दौरान रहेजा डेवलपर्स ने अपने बचाव में कई तर्क पेश किए। कंपनी का दावा था कि बाहरी आधारभूत सुविधाओं जैसे सड़क, सीवर, पानी और बिजली के कनेक्शन मिलने में देरी हुई। साथ ही, प्रोजेक्ट साइट से हाई-वोल्टेज बिजली लाइनों को हटाने में प्रशासनिक विफलता और विभिन्न कानूनी अड़चनों के कारण परियोजना प्रभावित हुई। बिल्डर ने यह भी दावा किया कि प्रोजेक्ट काफी हद तक पूरा हो चुका है और कंपनी आर्थिक रूप से पूरी तरह सक्षम है।

हालांकि, न्यायाधिकरण की पीठ ने उपलब्ध साक्ष्यों, वित्तीय अभिलेखों और आवंटियों के दावों का गहन अध्ययन करने के बाद कंपनी के इन तर्कों को अपर्याप्त माना और याचिका को स्वीकार करते हुए कंपनी के खिलाफ दिवाला प्रक्रिया का रास्ता साफ कर दिया।

न्याय की किरण

पीड़ित आवंटियों में जगी न्याय की किरण। गुरुग्राम में रहेजा डेवलपर्स की कई अन्य परियोजनाओं को लेकर भी लंबे समय से विवाद चल रहे हैं, ऐसे में एनसीएलटी के इस आदेश को रियल एस्टेट बाजार और पीड़ित निवेशकों के लिहाज से एक बेहद महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है।

पीड़ित खरीदार अर्जुन पुनिया ने बताया कि यह प्रोजेक्ट पिछले लगभग 15 साल से लंबित चल रहा है। एनसीएलटी में ढाई साल की कानूनी लड़ाई के बाद आवंटियों के पक्ष में यह आदेश आया है। इस फैसले के बाद अब हम सभी प्रभावित आवंटियों न्याय मिलने की उम्मीद जागी है। वहीं बिल्डर की तरफ से इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी गई।

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सामान्य प्रश्न

रहेजा डेवलपर्स के खिलाफ एनसीएलटी ने क्या फैसला दिया?
एनसीएलटी ने रहेजा डेवलपर्स के खिलाफ दिवाला समाधान प्रक्रिया शुरू करने की याचिका को स्वीकार कर लिया है।
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