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कॉलेज परिसर से पांच दिन बाद तेंदुआ पकड़ा गया

कॉलेज परिसर से पांच दिन बाद तेंदुआ पकड़ा गया

संक्षेप:

रेवाड़ी, संवाददाता। बावल के राजकीय महाविद्यालय परिसर में बीते पांच दिनों से आतंक का कारण बना तेंदुआ आखिरकार रविवार रात पकड़ा गया। इस घटना से जहां छात

Tue, 21 Oct 2025 08:15 PMNewswrap हिन्दुस्तान, गुड़गांव
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रेवाड़ी, संवाददाता। बावल के राजकीय महाविद्यालय परिसर में पांच दिन बाद आखिरकार रविवार रात को तेंदुआ पकड़ा गया। दहशत में रह रहे विद्यार्थियों और आसपास के लोगों ने राहत की सांस ली और चैन से दिवाली मनाई। कॉलेज के आसपास बीते कुछ दिनों से कुत्तों के गायब होने की घटनाएं लगातार बढ़ रही थीं। इस पर कॉलेज प्रशासन को संदेह हुआ और जब परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली गई, तो 15 अक्तूबर की रात एक मादा तेंदुआ परिसर में घूमती नजर आई। फुटेज सामने आने के बाद कॉलेज प्रशासन ने एहतियातन कॉलेज में छुट्टी घोषित कर दी। वन विभाग की टीमें रेवाड़ी, गुरुग्राम और फरीदाबाद से मौके पर पहुंचीं और तेंदुए को पकड़ने के लिए तलाशी अभियान शुरू किया।

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सुरक्षा के मद्देनजर कॉलेज परिसर और उसके आसपास के इलाके को पूरी तरह से सील कर दिया गया। तेंदुए को पकड़ने के लिए टीम ने एक पिंजरे में बकरी को चारा बनाकर रखा था। लगातार पांच दिनों तक असफल रहने के बाद आखिरकार रविवार की रात तेंदुआ बकरी का शिकार करने के इरादे से पिंजरे में घुसा और कैद हो गया। खौफ में रह रहे लोगों ने राहत की सांस ली सोमवार सुबह जब यह खबर छात्रों और क्षेत्रवासियों तक पहुंची तो सबके चेहरों पर खुशी और राहत झलकने लगी। कई दिनों से लोग भय के कारण शाम ढलते ही घरों में कैद हो जाते थे। तेंदुए के डर से कॉलेज के कर्मचारियों ने भी रात्रि ड्यूटी से परहेज करना शुरू कर दिया था। पांच दिनों से रखी जा रही थी निगरानी वाइल्ड लाइफ विभाग के निरीक्षक चरण सिंह ने बताया कि यह एक मादा तेंदुआ है जो संभवत: शिकार की तलाश में जंगल से भटककर आबादी वाले क्षेत्र में आ गई थी। उन्होंने कहा कि तेंदुए को सुरक्षित रूप से पकड़ लिया गया है और उसे जल्द ही अरावली के जंगलों में छोड़ा जाएगा ताकि वह अपने प्राकृतिक आवास में लौट सके। निरीक्षक ने यह भी बताया कि तेंदुए को पकड़ने के लिए इलाके में 24 घंटे निगरानी रखी जा रही थी। सीसीटीवी कैमरों की मदद से उसकी गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा रही थी। पांच दिन तक चली यह मुहिम आखिरकार सफल रही और तेंदुआ पकड़ने के साथ ही बावल और आसपास के इलाकों से दहशत का माहौल खत्म हो गया। भोजन की तलाश में रास्ता भटक जाते हैं तेंदुए वन्य जीव सरंक्षण अनिल गंडास ने बताया कि अरावली में भोजन की तलाश में तेंदुए कई बार रास्ता भटक जाते हैं। वह आबादी की तरफ अरावली से आ जाते हैं। बीते माह भी मानेसर के सेक्टर-आठ में खाने के चक्कर में ढ़ाई साल का तेंदुआ रास्ता भटक गया था। सुरक्षित तरीके से रेस्क्यू कर अरावली में छोड़ दिया गया था।