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जांच अधिकारी ने दबाव में दी गलत रिपोर्ट: अधिकार मंच

जांच अधिकारी ने दबाव में दी गलत रिपोर्ट: अधिकार मंच

गुरुग्राम के सिकंदरपुर गांव की पंचायत जमीन से जुड़े विवाद में एक नया मोड़ आया है। बुधवार को शहर के आरटीआई कार्यकर्ताओं और व्हिसलब्लोर्स ने अधिकार मंच के बैनर तले जिला प्रशासन पर कई आरोप लगाए।

आरटीआई कार्यकर्ता हरिंदर ढींगरा ने कहा कि 100 करोड़ की कीमत वाली जमीन की जांच में हेराफेरी की गई। उन्होंने कहा राज्य सरकार बड़े अधिकारी से जांच कराए, अन्यथा वह अक्तूबर के पहले हफ्ते में सुप्रीम कोर्ट का रुख करेंगे। ढींगरा ने कहा कि जिला प्रशासन के एक बड़े प्रभावशाली अधिकारी ने जांच प्रभावित की। उन्होंने जांच अधिकारी डिप्टी सीईओ ऋषि डांगी की वीडियो फुटेज भी मीडिया में पेश की। उन्होंने कहा कि जांच अधिकारी मेरे घर आए, इसमें उन्होंने कहा कि जांच में दबाव मत डालो। मैं 15 दिन में तबादला करा लूंगा। मेरे ऊपर दबाब है। बकौल, ढींगरा उन्होंने उपायुक्त का नाम लिया।

शिकायत के बाद सीएम ने उपायुक्त को जांच के निर्देश दिए थे

गौरतलब हो कि इस मामले की शिकायत के बाद मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने उपायुक्त को ही जांच के निर्देश दिए थे। उन्होंने डिप्टी सीईओ को जांच सौंपी थी। इस जमीन पर अभी पेट्रोल पंप संचालित हो रहा है, जोकि शहर के उद्यमी और समाजसेवी शरद गोयल का है। जांच रिपोर्ट में पंचायती जमीन की रजिस्ट्री को सही बताए जाने के खिलाफ ढींगरा ने सीएम को डेढ़ लाख रुपये का चेक भेजा है। इसमें उन्होंने कहा कि बड़े अधिकारी से जांच कराएं। शिकायत गलत हो तो धनराशि राहत कोष में जमा कर दी जाए। जिस जमीन को लेकर विवाद है वह वह 3000 वर्ग गज है। इस मामले की 7 जून को मुख्यमंत्री से शिकायत की गई थी।

कब-क्या हुआ?

-2000 में आईओसी ने जमीन 20 साल की लीज पर ली

-2003 में इस जमीन की रजिस्ट्री अंजू गोयल के नाम हुई

-2005 में यह जमीन शरद गोयल ने 75 लाख में खरीदी

जो आरोप हैं वे गलत हैं। कोई दबाव नहीं डाला। अगर किसी अधिकारी पर दबाव आता है तो वो अपने विभाग में शिकायत कर सकता है। शिकायतकर्ता अगर जांच से संतुष्ट नहीं हैं। तो वह दोबारा जांच करवा सकते हैं। -विनय प्रताप सिंह, उपायुक्त

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