Gurgaon News: सेक्टर-16 के कई कंपनियों में घुसा बारिश का पानी
Gurgaon News: -औद्योगिक क्षेत्र में 250 कंपनियों में कर्मचारी कम पहुंचे -उत्पादन कार्य ठप होने उद्योगों को भारी आर्थिक नुकसान

Gurgaon News: गुरुग्राम, अमर मौर्य। थोड़ी देर की बारिश ने सेक्टर-16 के औद्योगिक क्षेत्र की बदहाल बुनियादी सुविधाओं की पोल खोल दी। क्षेत्र की अधिकांश सड़कों पर कई फीट तक जलभराव हो गया। जिससे कई औद्योगिक इकाइयों में पानी घुस गया। ईकाईयों में उत्पादन कार्य ठप हो गया। उद्योगों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। आईडीसी क्षेत्र में सीवर ओवरफ्लो और बारिश के दौरान जलभराव की समस्या लंबे समय से बनी हुई है। गुड़गांव इंडस्ट्रियल एसोसिएशन (जीआईए) ने इस संबंध में कई बार संबंधित विभाग के उच्च अधिकारियों को लिखित शिकायत कर सुझाव दिए थे। लेकिन कोई स्थाई समाधान नहीं किया गया। आईडीसी क्षेत्र में करीब 250 औद्योगिक इकाइयां संचालित हैं, जहां हजारों कर्मचारी कार्यरत हैं। जलभराव के कारण कर्मचारियों, उद्योग संचालकों, ग्राहकों तथा अन्य लोगों को आवागमन और कार्य संचालन में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। जीआईए के अध्यक्ष सुमित राव ने प्रशासन से स्थायी कदम उठाने की मांग की। उद्योगों को बार-बार होने वाले नुकसान से बचाया जा सके。
निगम को ज्ञापन दिया:
जीआईए का प्रतिनिधिमंडल ने गुरुवार को नगर निगम गुरुग्राम के मुख्य अभियंता विजय ढाका को मांगों का ज्ञापन दिया। जिसमें क्षेत्र में सड़क किनारों की नियमित सफाई का अभाव, प्लॉट नं. 90 के समीप स्टॉर्म वाटर ड्रेनेज कार्य के दौरान क्षतिग्रस्त हुई मुख्य सीवर लाइन की मरम्मत न होना, बढ़ते अवैध अतिक्रमण, पार्क के आसपास पिछले दो माह से बंद पड़ी स्ट्रीट लाइटें, सड़क निर्माण कार्यों की धीमी शामिल रहे। ठेकेदार द्वारा मानसून से पहले विकास कार्य पूरा करने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन आज भी कार्य अधूरा है। मुख्य अभियंता ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया कि समस्याओं का जल्द निरीक्षण करेंगे। प्राथमिकता के आधार पर उचित कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। इस मौके पर जेएन मंगला, बीके मेठी, सुनील शर्मा उपस्थित रहे।
मानेसर की सड़कों पर जलभराव से परेशानी:
आईटीएम मानेसर की सड़कों पर गुरुवार को जलभराव से उद्यमियों को दिक्कत आई। आईएमटी मानेसर इंडस्ट्रियल एसोसिएशन के महासचिव मनोज त्यागी ने कहा कि नगर नगम से लेकर एचएसआईआईडीसी नालों की सफाई में सिर्फ खानापूर्ति करते हैं। निकासी न बारिश होने से जलभराव से उद्योगों में कर्मचारी नहीं पहुंच सके। उत्पादन से लेकर उद्यमियों को नुकसान उठाना पड़ा。


