गुरुग्राम और फरीदाबाद में कूड़े से बिजली बनेगी
- तीन नगर निगमों के लिए बनेगी विशेष रिपोर्ट, 20 दिनों में समिति सौंपेगी खाका, पीपीपी मॉडल पर लगेंगे वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट

गुरुग्राम, वरिष्ठ संवाददाता। हरियाणा के बड़े शहरों में दशकों से जी का जंजाल बने कूड़े के पहाड़ों (लैंडफिल) को अब बिजली के संसाधनों में बदला जाएगा। शहरी स्थानीय निकाय विभाग ने गुरुग्राम, फरीदाबाद और हिसार में वेस्ट-टू-एनर्जी (कचरे से बिजली बनाने वाले) प्लांट लगाने की प्रक्रिया तेज कर दी है। इसके लिए एक उच्चस्तरीय समिति का गठन किया गया है, जो अगले 20 दिनों के भीतर अपनी विस्तृत रिपोर्ट और आरएफपी (रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल) मुख्यालय को सौंपेगी। सरकार ने इस महत्वकांक्षी परियोजना के लिए अनुभवी आईएएस अधिकारियों की टीम पर भरोसा जताया है। समिति में गुरुग्राम के निगम आयुक्त प्रदीप दहिया, फरीदाबाद के आयुक्त धीरेंद्र खड़गटा और हिसार के आयुक्त नीरज को शामिल किया गया है।
साथ ही, गुरुग्राम से दो अतिरिक्त आयुक्त अंकिता चौधरी और यश जलूका को भी इस टीम का हिस्सा बनाया गया है। निगम आयुक्त प्रदीप दहिया और आईएएस यश जलूका कचरा प्रबंधन के क्षेत्र में पहले से ही काफी सक्रिय रहे हैं और सरकार की विभिन्न बैठकों में अपनी विशेषज्ञ राय साझा कर चुके हैं। यही कारण है कि इस प्रोजेक्ट के ड्राफ्ट को तैयार करने में उनकी अहम भूमिका तय की गई है। 10 साल का इंतजार अब होगा खत्म गुरुग्राम में कचरे से बिजली बनाने की योजना पिछले 10 साल से केवल कागजों और बैठकों तक ही सीमित रही है। बंधवाड़ी जैसे कूड़े के प्लांट में कूड़े के पहाड़ बढ़ते जा रहे हैं, जिससे पर्यावरण और जनस्वास्थ्य को गंभीर खतरा पैदा हो गया है। निगम ने 2017 में ईको ग्रीन कंपनी के साथ करार किया था। जिसे कूड़े से बिजली बनाने का प्लांट विकसित करना था, लेकिन निगम और कंपनी के बीच एमओयू हस्ताक्षर होते ही पुराने कूड़े के निस्तारण और प्लांट विकसित करने के लिए जमीन खाली को लेकर खींचतान शुरू हो गई थी। इसके बाद निगम ने कंपनी को प्लांट विकसित करने के लिए जगह खाली करके नहीं दी तो कंपनी ने प्लांट लगाने को लेकर कोई प्रक्रिया शुरू नहीं की। अब केंद्र सरकार के स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) 2.0 के तहत इसे नई ऊर्जा मिली है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य लैंडफिल पर निर्भरता कम करना और कचरे का वैज्ञानिक तरीके से निपटान करना है। पीपीपी मॉडल पर विकसित होंगे प्लांट इन वेस्ट-टू-एनर्जी संयंत्रों को पीपीपी (पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप) मॉडल पर विकसित किया जाएगा। निजी कंपनियां इन प्लांटों में निवेश करेंगी और नवीनतम तकनीक लाएंगी। इससे नगर निगमों पर आर्थिक बोझ नहीं पड़ेगा। कूड़ा जो अब तक समस्या था, वह अब एक संसाधन बन जाएगा जिससे बिजली पैदा होगी। बता दें कि फिलहाल गुरुग्राम के बंधवाड़ी प्लांट में 16 लाख मीट्रिक टन कूड़ा पड़ा हुआ है। दो निजी एजेंसियों को करीब सवा सौ करोड़ रुपये की लागत से कूड़ा निस्तारण का काम सौंपा हुआ है। कचरा अब समस्या नहीं, एक संपत्ति शहरी स्थानीय निकाय विभाग के अधिकारियों का मानना है कि इस पहल से हरियाणा में स्वच्छता की नई दिशा तय होगी। प्रारूप आरएफपी तैयार होने के बाद सभी नगर निगमों के साथ एक बड़ी बैठक होगी, जिसमें इसके व्यावहारिक पहलुओं पर चर्चा की जाएगी। यदि यह योजना समय पर धरातल पर उतरती है, तो गुरुग्राम और फरीदाबाद जैसे शहरों को कूड़े की बदबू और प्रदूषण से मुक्ति मिलेगी और राज्य को ऊर्जा का एक नया स्रोत प्राप्त होगा। कूड़े से बिजली बनाने के प्लांट लगने से शहर में कूड़े के ढेरों से राहत मिलेगी। प्रदूषित हवा से लोगों को राहत मिलेगी। इसको लेकर मुख्यालय की तरफ से 20 दिन में आरएफपी तैयार करने के निर्देश मिले हैं। जल्द ही आरएफपी तैयार करके मुख्यालय को भेजी जाएगी। - प्रदीप दहिया, निगम आयुक्त, गुरुग्राम
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