ऑपरेशन सद्भावना: श्रीनगर के 20 छात्रों ने गुरुग्राम में मनाया खुशी का दिन, एकता की नई मिसाल

ऑपरेशन सद्भावना: श्रीनगर के 20 छात्रों ने गुरुग्राम में मनाया खुशी का दिन, एकता की नई मिसाल

संक्षेप:

गुरुग्राम,प्रमुख संवाददाता। हरियाणा पुलिस और भारतीय सेना ने एक सराहनीय पहल करते हुए श्रीनगर के 20 स्कूली छात्रों के लिए गुरुग्राम में डे ऑफ जॉय (खुशी

Dec 13, 2025 09:39 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, गुड़गांव
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गुरुग्राम। हरियाणा पुलिस और भारतीय सेना ने एक सराहनीय पहल करते हुए श्रीनगर के 20 स्कूली छात्रों के लिए गुरुग्राम में डे ऑफ जॉय (खुशी का दिन) का आयोजन किया। सेना की ऑपरेशन सद्भावना के तहत आयोजित इस विशेष एक दिवसीय एक्सपोज़र ट्रिप का उद्देश्य कश्मीरी युवाओं को देश की प्रगति और विविध संस्कृति से परिचित कराना था। इन छात्रों में से अधिकांश पहली बार कश्मीर से बाहर दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में आए थे। मॉल में मनोरंजन और विशेष व्यवस्था हरियाणा पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) ओपी सिंह के निर्देशन में छात्रों के लिए विशेष व्यवस्था की गई। बच्चों ने दिनभर एंबियंस मॉल में खूब मस्ती की।

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उन्होंने आइस स्केटिंग, बॉलिंग, इंडोर गेम्स और अन्य मनोरंजक गतिविधियों का भरपूर आनंद लिया। डीजीपी सिंह की ओर से छात्रों के लिए विशेष भोजन और सभी गतिविधियों का इंतज़ाम किया गया था। डीजीपी ओपी सिंह ने इस पहल के बारे में कहा ये बच्चे हमारे राष्ट्र का भविष्य हैं। अगर हम उन्हें खुशी,आत्मविश्वास और सीमाओं से परे अपनापन दे पाते हैं, तो यह विश्वास और एकता की कड़ी को मजबूत करता है। उन्होंने कश्मीरी युवाओं के सपनों को समर्थन देने के लिए हरियाणा पुलिस की प्रतिबद्धता दोहराई। छात्रों के लिए यादगार अनुभव छात्रों ने गुरुग्राम की इस यात्रा को अपने छह दिवसीय दौरे का सबसे रोमांचक हिस्सा बताया। कक्षा 10 के छात्र मीर अब्दुल मनान ने कहा, आइस स्केटिंग का अनुभव कमाल का था। शुरुआत में फिसले, लेकिन बाद में बहुत मज़ा आया। नवेद अंसार लोन को बॉलिंग एली शानदार लगी, जबकि मुज़फ्फर अहमद मीर ने मॉल के माहौल को किसी त्योहार जैसा बताया। उन्होंने कहा कि यह दिन उनके लिए किसी सपने के सच होने जैसा था। सशक्तिकरण और भविष्य की दिशा यह छह दिवसीय यात्रा 15 राष्ट्रीय राइफल्स द्वारा आयोजित की गई है। 15 आरआर के मेजर शुभम बारिक ने कहा एक्सपोज़र ही सशक्तिकरण है। जब युवा अपने परिवेश से बाहर अवसरों को देखते हैं, तो उनकी आकांक्षाएं बदल जाती हैं। इस समूह के साथ शिक्षक मोहम्मद शफी गडयारी और फारूक अहमद डार भी मौजूद थे। यह कार्यक्रम कश्मीरी छात्रों को शिक्षा, संस्कृति और विकास के नए अवसरों से जोड़ने के एक व्यापक प्रयास का हिस्सा है।