
प्रदूषण नियंत्रण पर हरियाणा सरकार सख्त: राव नरबीर सिंह ने दिए ठोस निर्देश
- यमुना में औद्योगिक या सीवरेज जल छोड़ने पर रोक, ड्रेनों पर लगेंगे सीसीटीवी कैमरे, टैंकरों द्वारा प्रदूषित जल निस्तारण पर निगरानी होगी कड़ी
गुरुग्राम। हरियाणा के वन एवं पर्यावरण मंत्री राव नरबीर सिंह ने कहा है कि राज्य सरकार पर्यावरण प्रदूषण नियंत्रण के प्रति पूरी तरह गंभीर है और इसके लिए एनजीटी व सर्वोच्च न्यायालय के दिशा-निर्देशों के अनुरूप ठोस कार्रवाई सुनिश्चित की जा रही है। उन्होंने जोर दिया कि प्रदूषण पर प्रभावी नियंत्रण तभी संभव है जब सभी संबंधित विभाग समन्वय के साथ कार्य करें और परिणाम धरातल पर स्पष्ट रूप से दिखाई दें। राव नरबीर सिंह गुरुवार को हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे, जिसमें प्रदूषण नियंत्रण की वर्तमान स्थिति की समीक्षा की गई।
- यमुना की निगरानी होगी कड़ी: मंत्री ने यमुना नदी में प्रदूषण रोकने के लिए सख्त निर्देश दिए है। यमुना नदी में किसी भी प्रकार का औद्योगिक या सीवरेज प्रदूषित जल न जाने पाए। यमुना कैचमेंट क्षेत्र की 11 ड्रेनों पर स्थापित सीईटीपी (सीईटीपी) और एसटीपी (एसटीपी) की निगरानी के लिए सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे। प्रत्येक ड्रेन के लिए एक नोडल विभाग और एक नोडल अधिकारी नामित किया जाएगा, जो नियमित रूप से निरीक्षण कर रिपोर्ट प्रस्तुत करेगा। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारियों को उद्योगों में जाकर एसटीपी की वास्तविक स्थिति की जांच करनी होगी। प्रदूषित जल ले जाने वाले टैंकरों पर शिकंजा: कॉलोनियों से सीवरेज जल उठाने वाले ट्रैक्टर-टैंकरों के अवैध निस्तारण पर रोक लगाने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं:- - सूची साझा: प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड टैंकरों की सूची पुलिस विभाग के साथ साझा करेगा। - रसीद अनिवार्य: टैंकरों द्वारा एसटीपी पर जल खाली करने के उपरांत रसीद लेना अनिवार्य किया जाएगा, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि निस्तारण निर्धारित स्थान पर ही हुआ है। - अवैध टैंकरों पर कार्रवाई: यमुना कैचमेंट क्षेत्र में कुल 242 पंजीकृत टैंकर हैं। अवैध टैंकरों पर अंकुश लगाने के लिए पुलिस विभाग को विशेषकर सोनीपत व पानीपत जिलों में नाके स्थापित करने और ऐसे वाहनों को जब्त करने के निर्देश दिए गए हैं। वायु प्रदूषण नियंत्रण में बदलाव: राव नरबीर सिंह ने कहा कि वाहनों से उत्सर्जित धुएं पर नियंत्रण के लिए पेट्रोल पंपों पर स्थापित प्रदूषण जाँच उपकरणों का नियमित निरीक्षण किया जाए। उन्होंने यह भी घोषणा की कि प्रदूषण प्रमाण पत्र जारी करने वाली कंपनियों के नियंत्रण की व्यवस्था परिवहन विभाग के स्थान पर राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को सौंपने हेतु शीघ्र ही प्रस्ताव सरकार को भेजा जाएगा। मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रदूषण नियंत्रण केवल कागजों तक सीमित न रहे, बल्कि इसका ठोस असर जनता के जीवन में दिखाई दे, और स्वच्छ हवा तथा निर्मल जल उपलब्ध कराने के लक्ष्य को प्राथमिकता से पूरा किया जाए।

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