
गुरुग्राम में राज्य स्तरीय कार्यशाला संपन्न, शिक्षक बने मास्टर ट्रेनर
- मानसिक स्वास्थ्य व आत्महत्या रोकथाम पर मिला व्यावहारिक प्रशिक्षण गुरुग्राम में राज्य स्तरीय कार्यशाला संपन्न, शिक्षक बने मास्टर ट्रेनर
गुरुग्राम। उच्च शिक्षण संस्थानों में छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर हरियाणा सरकार की पहल के तहत गुरुवार और शुक्रवार को गुरुग्राम स्थित हरियाणा इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन (हिपा), सेक्टर-18 में आयोजित दो दिवसीय राज्य स्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम शुक्रवार को संपन्न हो गया। इस प्रशिक्षण में प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए सरकारी कॉलेजों के प्राचार्यों और शिक्षकों ने भाग लिया। द्रोणाचार्य गवर्नमेंट कॉलेज की प्रिंसिपल पुष्पा अंतिल ने बताया कि इस दो दिवसीय प्रशिक्षण में मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े कई अहम पहलुओं पर सीखने का अवसर मिला। उन्होंने कहा कि मॉड्यूल के माध्यम से शिक्षकों को छात्रों से संवाद करने के तरीके, उनके व्यवहार और भावनात्मक बदलावों को समझने व मानसिक स्थिति को बेहतर बनाने की दिशा में काम करने का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया।
प्रशिक्षण के दौरान यह स्पष्ट किया गया कि शिक्षक चिकित्सक नहीं होते, लेकिन वे छात्रों के लिए पहला सहारा बन सकते हैं। इसी उद्देश्य से मास्टर ट्रेनर तैयार किए जा रहे हैं, जो आगे अपने-अपने कॉलेजों में शिक्षकों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों को प्रशिक्षण देंगे। इसके बाद छात्रों से संवाद को मजबूत करने, तनाव कम करने और समय रहते काउंसलिंग जैसी सेवाओं से जोड़ने पर विशेष रूप से काम किया जाएगा। कॉलेज के प्रिंसिपलों ने निभाई सक्रिय भागीदारी: दो दिनों तक चले इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में अलग-अलग जिलों से आए कॉलेज प्रिंसिपलों ने सक्रिय भागीदारी निभाई। प्रशिक्षण के बाद अब आगे की रणनीति के तहत कॉलेज परिसरों में मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी गतिविधियों को लागू किया जाएगा, ताकि छात्रों के लिए सुरक्षित और सहयोगात्मक माहौल तैयार किया जा सके। संबंधित विभाग की ओर से इस दिशा में जल्द ही आगे की कार्ययोजना पर काम शुरू किया जाएगा। शिक्षक बनेंगे छात्रों के मित्र और मार्गदर्शक: छात्र अपने घर के साथ-साथ कॉलेज में भी अपना काफी समय बिताते हैं। ऐसे में शिक्षक केवल पढ़ाने तक सीमित न रहकर छात्रों के अच्छे मित्र और मार्गदर्शक की भूमिका निभा सकते हैं। प्रत्येक छात्र-छात्रा की परेशानियां अलग-अलग होती हैं। कोई करियर को लेकर असमंजस में है तो कोई पारिवारिक समस्याओं से जूझ रहा है। ग्रामीण परिवेश से आने वाले कई छात्र आर्थिक दबाव, जल्दी विवाह, सामाजिक अपेक्षाओं और भविष्य की अनिश्चितता जैसी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। मॉड्यूल से मिलेगी मदद छात्रों से भावनात्मक तरीके से जुड़ने के लिए: इस प्रशिक्षण और काउंसलिंग मॉड्यूल के माध्यम से शिक्षकों को यह समझने में मदद मिलेगी कि वे छात्रों के भावनात्मक पक्ष से कैसे जुड़ें और उन्हें सही मार्गदर्शन कैसे दें। संवाद बढ़ने से छात्रों को अपनी बात खुलकर रखने का अवसर मिलेगा, जिससे उन्हें मानसिक रूप से राहत मिल सकेगी। इसी उद्देश्य से मास्टर ट्रेनर तैयार किए जा रहे हैं, जो आगे चलकर कॉलेज स्तर पर छात्रों से बेहतर संवाद और सहयोग की व्यवस्था को मजबूत करेंगे।

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