डीजीपी हुए ‘डिजिटल अरेस्ट’, शिकायत देने साइबर थाने पहुंचे
गुरुग्राम के पुलिस महानिदेशक ओपी सिंह ने साइबर थाने का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने साइबर अपराध की रोकथाम और पीड़ितों को राहत देने के उपायों की जानकारी दी। डीजीपी ने स्कूलों में साइबर जागरूकता एंबेसडर बनाने का भी प्रस्ताव रखा। उन्होंने नागरिकों को साइबर ठगी से बचने के लिए सावधानी बरतने की सलाह दी।
गुरुग्राम। प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) ओपी सिंह ‘डिजिटल अरेस्ट’ हो गए। सोमवार को इसकी शिकायत लेकर साइबर थाने पहुंचे। एक पल के लिए सब हैरान रह गए। हालांकि, स्थिति साफ होने में देर न लगी। दरअसल, डीजीपी औचक निरीक्षण करने पहुंचे थे। उन्होंने एक आम नागरिक को मिलने वाली सहायता की गुणवत्ता, पुलिसकर्मियों के व्यवहार और शिकायत दर्ज करने की वास्तविक प्रक्रिया को समझा। साथ ही जरूरी दिशा-निर्देश भी दिए। डीजीपी ओपी सिंह सादी वर्दी में सोमवार को साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन (ईस्ट) पहुंचे। उन्होंने कहा कि वह डिजिटल अरेस्ट का शिकार हुए हैं और उन्हें शिकायत दर्ज करानी है।

पुलिस स्टेशन पर तैनात संतरी ने उन्हें शिकायत दर्ज करने की प्रक्रिया समझाते हुए जांच अधिकारी के पास भेज दिया। हालांकि, जांच अधिकारी ने उन्हें पहचान लिया। तब जाकर पता चला कि उनके साथ डिजिटल अरेस्ट की घटना नहीं हुई है। वह थाने का निरीक्षण करने पहुंचे हैं। इस दौरान डीजीपी ने पुलिस स्टेशन के कामकाज, पीड़ित सहायता तंत्र, प्रतिक्रिया प्रणाली और जागरूकता ढांचे की विस्तार से समीक्षा की। जरूरी जानकारी दी गई निरीक्षण के बाद ओपी सिंह ने साइबर अपराधों की रोकथाम, पीड़ितों को त्वरित राहत प्रदान करने और सार्वजनिक जागरूकता बढ़ाने के लिए उठाए जा रहे प्रमुख कदमों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि हरियाणा पुलिस साइबर अपराध से पैदा हो रही चुनौतियों का समाधान करने के लिए लगातार प्रभावी और अभिनव रणनीतियां अपना रही हैं। पीड़ितों के लिए वित्तीय राहत डीजीपी ने बताया कि जिन मामलों में बैंकों द्वारा छोटी राशि फ्रीज कर दी जाती है, उन पीड़ितों को अनावश्यक देरी के बिना समय पर रिफंड सुनिश्चित करने के लिए हरियाणा पुलिस लोक अदालत के माध्यम से त्वरित वित्तीय राहत प्रदान करेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि साइबर धोखाधड़ी के किसी भी मामले में यदि बैंक की लापरवाही पाई जाती है, तो पीड़ित के वित्तीय नुकसान की भरपाई के लिए बैंक को जिम्मेदार ठहराया जाएगा। यह कदम पीड़ितों के अधिकारों के लिए एक महत्वपूर्ण सुरक्षा है। स्कूलों-कॉलेजों में साइबर जागरूकता एंबेसडर बनेंगे डीजीपी ने कहा कि सोशल मीडिया, सामुदायिक कार्यक्रमों और राज्यव्यापी पहलों के साथ-साथ, स्कूलों और कॉलेजों में प्रमुख छात्रों की विशेष टीमें बनाई जाएंगी। छात्रों को साइबर जागरूकता एंबेसडर नामित किया जाएगा। ये एंबेसडर अपने संस्थानों के भीतर सहपाठियों को साइबर अपराधों की रोकथाम के बारे में शिक्षित करेंगे। ठगी से बचने के लिए इन बातों का ध्यान रखें ओपी सिंह ने कहा अधिकांश साइबर अपराध भय और लालच का फायदा उठाते हैं। अगर कोई आपको ऊंचे रिटर्न का वादा करता है, अनुचित लाभ देने की पेशकश करता है या आपको पैसे ट्रांसफर करने या जानकारी साझा करने के लिए दबाव डालता है तो समझ लें कि आप साइबर जालसाजों के निशाने पर हैं। सावधानी ही आपकी सबसे अच्छी सुरक्षा है। उन्होंने नागरिकों से किसी भी संदिग्ध कॉल, लिंक, ऐप या ऑफ़र से सतर्क रहने और आवश्यकता पड़ने पर तत्काल साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराने का आग्रह किया। डीजीपी ने आश्वासन दिया कि हरियाणा पुलिस साइबर अपराध का मुकाबला करने के लिए मिशन मोड पर काम कर रही है। पीड़ितों को न्याय सुनिश्चित करने, पुलिस स्टेशनों की तकनीकी क्षमता को मजबूत करने और पूरे राज्य में डिजिटल सुरक्षा बढ़ाने के प्रयास जारी रहेंगे।

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