
खेल सुविधा: सरकारी स्कूलों को खेल संसाधनों की बेहतर व्यवस्था मिलेगी
- जिला शिक्षा विभाग की ओर से स्कूलों को लेकर भेजी गई डिमांड- जिला शिक्षा विभाग की ओर से स्कूलों को लेकर भेजी गई डिमांड
गुरुग्राम। नए शैक्षणिक सत्र को लेकर गुरुग्राम के सरकारी स्कूलों में खेल सुविधाओं को मजबूत करने की दिशा में जिला शिक्षा विभाग ने तैयारी तेज कर दी है। स्कूलों में मौजूदा खेल संसाधनों की स्थिति और खिलाड़ियों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए अलग-अलग स्कूलों से डिमांड मंगाई गई है। इन मांगों को संकलित कर निदेशालय को रिपोर्ट भेजी जा रही है, ताकि समय रहते आवश्यक खेल सामग्री उपलब्ध कराई जा सके। फिलहाल कई सरकारी स्कूलों में खेल सामग्री सीमित है। कहीं गेंदों की कमी है तो कहीं खेल किट और अभ्यास से जुड़े उपकरण पुराने हो चुके हैं। इसके चलते छात्र नियमित अभ्यास नहीं कर पाते, जबकि खेलों में रुचि रखने वाले बच्चों की संख्या लगातार बढ़ रही है।
शिक्षा विभाग का मानना है कि अगर संसाधन समय पर उपलब्ध हो जाएं तो स्कूल स्तर पर खेल गतिविधियों को और मजबूती मिल सकती है। जिले के खिलाड़ियों का प्रदर्शन हो रहा बेहतर: जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में हमारे छात्र बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं। संसाधनों की कमी के बावजूद बच्चों का जोश और प्रतिभा कम नहीं है। अगर उन्हें बेहतर खेल सामग्री और सुविधाएं मिलेंगी तो वे और बेहतर प्रदर्शन कर पाएंगे। इसका फायदा खिलाड़ियों को 2026 के स्कूल गेम्स फेडरेशन के खेलों में भी मिलेगा। खिलाड़ियों को मिलेगा सीधा लाभ: नई खेल सुविधाओं से खास तौर पर छात्राओं को भी लाभ मिलने की उम्मीद है। बेहतर उपकरण और सुरक्षित अभ्यास वातावरण मिलने से छात्राओं की खेलों में भागीदारी बढ़ेगी। साथ ही, नियमित प्रशिक्षण से स्कूल स्तर पर नई खेल प्रतिभाएं सामने आएंगी। कई स्कूलों में खेल संसाधन बहुत कम है ऐसे में खिलाड़ियों की संख्या और उनके रुझान को देखते हुए स्कूलों की ओर से डिमांड भेजी गई है। इसमें योग बास्केटबॉल, वॉलीबॉल, योग समेत अन्य खेलों की खेल सामग्री की डिमांड भेजे गई हैं। नए सत्र से पहले तैयारी का लक्ष्य: शिक्षा विभाग की योजना है कि नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत से पहले ही खेल सामग्री उपलब्ध कराई जाए, ताकि पूरे सत्र के दौरान छात्र बिना किसी रुकावट के अभ्यास कर सकें। विभाग का मानना है कि पढ़ाई के साथ-साथ खेलों को मजबूत आधार देना जरूरी है और यही सोच इस पूरी पहल के पीछे है। -स्कूलों में वर्तमान खेल व्यवस्था को देखते हुए यह डिमांड भेजी गई है। कई स्कूलों में खिलाड़ी तो हैं, लेकिन संसाधन सीमित हैं। नए सत्र में अगर खेल सामग्री बढ़ती है तो खिलाड़ियों को सीधा फायदा मिलेगा। इससे नियमित अभ्यास संभव होगा और बच्चों का आत्मविश्वास भी बढ़ेगा। - जगदीश अहलावत, असिस्टेंट एजुकेशन ऑफिसर गुरुग्राम

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