
परेशानी: चार साल में 70% से ज्यादा टैबलेट खराब
- ई-अधिगम योजना दम तोड़ती आ रही नजर, स्कूलों में जमा कराए गए खराब टैबलेट
गुरुग्राम। वर्ष 2022 में जिले के सरकारी स्कूलों के छात्रों को डिजिटल शिक्षा से जोड़ने और ई-अधिगम योजना को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से हजारों टैबलेट दिए गए। उम्मीद थी कि इससे पढ़ाई आसान होगी और ऑनलाइन माध्यम से छात्रों को बेहतर शैक्षणिक सामग्री मिल सकेगी। लेकिन चार साल बाद यह योजना स्कूलों के लिए बोझ साबित होती नजर आ रही है। जिले में दिए गए टैबलेट्स में से 60 फीसदी से अधिक खराब हो चुके हैं, जिनका रखरखाव और सुरक्षित रखना अब स्कूलों की जिम्मेदारी बन गया है। खराब टैबलेट कहीं इधर-उधर न हों, इसलिए उन्हें स्कूलों में जमा करवा दिया गया है।
जो टैबलेट काम कर रहे हैं, वही चुनिंदा छात्रों को दिए गए हैं, लेकिन वे भी धीरे-धीरे खराब होते जा रहे हैं। टैबलेट ठीक करवाने की कोई ठोस व्यवस्था या बजट नहीं है, ऐसे में खराब टैबलेट बस स्कूलों में जमा होते जा रहे हैं। आगामी वार्षिक परीक्षाओं से पहले छात्रों से टैबलेट वापस लिए जा रहे हैं, जिनमें से कई पहले से ही खराब हालत में हैं। ऐसे में नए सत्र में छात्रों को टैबलेट मिलेंगे या नहीं, इसे लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। गुड़गांव जिले में करीब 37 से 40 हजार टैबलेट 10वीं से 12वीं कक्षा के छात्रों को वितरित किए गए थे। लेकिन मौजूदा स्थिति यह है कि करीब 70 फीसदी टैबलेट या तो खराब हो चुके हैं या स्कूलों में जमा हैं। शेष करीब 30 फीसदी टैबलेट अभी छात्रों के पास हैं, जिन्हें बोर्ड और वार्षिक परीक्षाओं से पहले स्कूलों में वापस करना होगा। पढ़ाई पर सीधा असर: टैबलेट खराब होने और मरम्मत के लिए बजट न होने की वजह से कई छात्रों के पास अब डिजिटल माध्यम से पढ़ाई का कोई साधन नहीं बचा है। ऐसे छात्र अपने निजी मोबाइल या लैपटॉप के जरिए वन स्टूडेंट ऐप पर निर्भर हैं। इससे एक तरफ जहां छात्रों पर आर्थिक बोझ बढ़ा है, वहीं डिजिटल शिक्षा में समानता का उद्देश्य भी प्रभावित हुआ है। नाम मात्र का रह गया उपयोग: ई-अधिगम योजना के तहत प्रदेश में करीब 5 लाख टैबलेट 620 करोड़ रुपये की लागत से खरीदे गए थे। इनमें से गुड़गांव के टैबलेट्स का उपयोग अब बेहद सीमित हो गया है। सरकारी स्कूलों के शिक्षकों का कहना है कि विभाग की ओर से जितना निर्देश मिला, उतना ही टैबलेट का इस्तेमाल कराया गया। विज्ञान शिक्षक अनुज के अनुसार इस सत्र में ज्यादातर कक्षाएं मैनुअल तरीके से ही ली गईं। टैबलेट का उपयोग पहले के मुकाबले काफी कम रहा। वहीं अंग्रेजी शिक्षक सुनील बताते हैं कि ऑनलाइन कक्षाओं के दौरान ही बच्चों को टैबलेट इस्तेमाल करने पर जोर दिया गया। अब इस्तेमाल जीरो हो गया है, बस खराब पड़े टैबलेट के रख रखाव में ही हम लोग काम कर रहे हैं। तकनीकी खामियां और लचर प्रबंधन: टैबलेट के सीमित उपयोग के पीछे इंटरनेट कनेक्टिविटी की कमी, तकनीकी खराबी और सॉफ्टवेयर अपडेट का अभाव बड़ा कारण है। कई टैबलेट टूट चुके हैं या लंबे समय से खराब पड़े हैं। शिक्षा विभाग की ओर से समय पर सॉफ्टवेयर अपडेट और रखरखाव नहीं होने से डिजिटल पढ़ाई प्रभावित हो रही है। निजी उपयोग बढ़ा, निगरानी कमजोर: शैक्षणिक उपयोग न होने के कारण कई छात्रों ने टैबलेट का सॉफ्टवेयर बदलकर निजी मनोरंजन के लिए इस्तेमाल करना शुरू कर दिया। विभाग की ओर से अब तक टैबलेट की स्थिति को लेकर कोई ठोस जमीनी रिपोर्ट और नियमित मॉनिटरिंग सिस्टम लागू नहीं किया गया, जिससे हालात और बिगड़े हैं। आगे की योजना: जिले में दिए गए 38 हजार से अधिक टैबलेट्स में ज्यादातर की स्थिति बेहद खराब बताई जा रही है। टैबलेट की संख्या घटने के कारण अगले सत्र में सेक्शन वाइज टैबलेट बांटने की योजना है। 10वीं में प्रवेश लेने वाले छात्रों को स्कूल स्टॉक से टैबलेट मिलेंगे, जबकि 11वीं से 12वीं में जाने वाले छात्र अपने पुराने टैबलेट साथ लाएंगे। वहीं अगर इनकी संख्या और कम हो जाती है तो इन्हें बहुत सीमित कर दिया जाएगा। टैबलेट के उपयोग को लेकर रिपोर्ट तैयार की जा रही है। बड़ी संख्या में टैबलेट खराब हो चुके हैं ऐसे में स्कूल में ही अभी सबमिट करवाया गया है। इनका अभी आगे क्या करना है इस पर निदेशालय के जिस तरीके से आदेश होंगे उस अनुसार काम किया जाएगा। वही जो टैबलेट ठीक है, उनमें सिर्फ पढ़ाई से जुड़ी सामग्री उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि यूट्यूब या अन्य मनोरंजन चैनल न चल सकें। -इंदू बोकन, जिला शिक्षा अधिकारी

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