Gurgaon News: रात में महिलाओं के लिए सुरक्षित सफर के इंतजाम अधूरे
Gurgaon News: असुरक्षित सफर: गुरुग्राम, गौरव चौधरी। देश के प्रमुख कॉर्पोरेट जगत और साइबर सिटी के रूप में अपनी पहचान बना चुका गुरुग्राम रात के समय कामकाजी महिलाओं और

Gurgaon News: गुरुग्राम, गौरव चौधरी। देश के प्रमुख कॉर्पोरेट जगत और साइबर सिटी के रूप में अपनी पहचान बना चुका गुरुग्राम रात के समय कामकाजी महिलाओं और अन्य यात्रियों के लिए कितना सुरक्षित है? धरातल पर उतरे आंकड़े और जमीनी हकीकत इस दावे पर गंभीर सवाल खड़े करती है। एक तरफ जहां शहर को हाई-टेक और स्मार्ट बनाने का दावा किया जाता है, वहीं दूसरी ओर रात ढ़लते ही शहर में निजी परिवहन व्यवस्था राम भरोसे छोड़ दी जाती है। मिलेनियम सिटी से रोजाना 50 से अधिक निजी बसें यात्रियों को लेकर पड़ोसी राज्यों और दूर-दराज के शहरों के लिए रवाना होती हैं। इनमें स्लीपर बसों के साथ-साथ लोकल रूटों पर चलने वाली बसें भी शामिल हैं। अनुमान के मुताबिक हर रोज इन बसों में पांच हजार से भी ज्यादा यात्री सफर करते हैं, जिनमें एक बड़ी संख्या कामकाजी महिलाओं की होती है। बावजूद इसके, यात्रियों की सुरक्षा को लेकर कोई ठोस और जवाबदेह तंत्र मौजूद नहीं है。
शहर में नहीं है हेल्पडेस्क:
शहर के मुख्य प्रस्थान बिंदुओं जैसे राजीव चौक, सेक्टर-12 और खांडसा रोड से रात के वक्त अधिकांश स्लीपर बसें चलती हैं,लेकिन चिंताजनक बात यह है कि इन तीनों व्यस्तम और संवेदनशील स्थानों के साथ-साथ शहर के अन्य प्रमुख चौक-चौराहों पर यात्रियों की मदद के लिए प्रशासनिक हेल्पडेस्क तक स्थापित नहीं की गई है। रात के अंधेरे में किसी भी आपात स्थिति या बदसलूकी की स्थिति में महिलाओं के पास तुरंत मदद पाने का कोई सीधा साधन नहीं होता। उनको 112 पर फोन कर मदद मांगनी पड़ती है।
निजी बसों में सुरक्षा के इंतजाम भी नाकाफी:
इससे भी बड़ा सुरक्षा कवच मानी जाने वाली सीसीटीवी व्यवस्था को लेकर भी स्थिति बेहद लचर है। निजी बसों के भीतर सीसीटीवी कैमरे लगे हैं या नहीं, और अगर लगे हैं तो वे चालू हालत में हैं या केवल दिखावा हैं इसकी पूरी और सटीक जानकारी परिवहन प्राधिकरण या स्थानीय प्रशासन के पास उपलब्ध नहीं है। इसके अलावा बसों के शीशों ब्लैक फिल्म होने के साथ-साथ कई बसों में पर्दे भी लगाए गए है। बिना किसी सुरक्षा ऑडिट के ये बसें धड़ल्ले से सड़कों पर दौड़ रही हैं, जो सीधे तौर पर यात्रियों, विशेषकर महिला यात्रियों की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ है।
18 फीसदी सड़कों पर पसरा रहता है अंधेरा
सुरक्षा के मोर्चे पर शहर का बुनियादी ढांचा भी निराश करता है। साल 2025-26 में एक निजी एजेंसी की वार्षिक सर्वे रिपोर्ट में सामने आया है कि गुरुग्राम की करीब 18 फीसदी सड़कों पर रात के समय पूरी तरह से अंधेरा छाया रहता है।
स्मार्ट कैमरे केवल घटना के बाद की जांच तक सीमित
दूसरी ओर, शहर में स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत एक हजार से ज्यादा आधुनिक कैमरे संचालित किए जा रहे हैं। अपराध घटित होने के बाद इन कैमरों की फुटेज की मदद से अपराधियों को ट्रेस करने और उन्हें पकड़ने में काफी सफलता मिलती है। हालांकि, नागरिक संगठनों और महिला अधिकार कार्यकर्ताओं का मानना है कि कैमरों की भूमिका केवल क्राइम डिटेक्ट करने तक सीमित रह गई है, जबकि प्राथमिकता क्राइम प्रिवेंशन यानी अपराध को रोकने की होनी चाहिए।
प्रमुख चौराहों पर रात में मौजूद रहती है पुलिस
पुलिस प्रवक्ता संदीप कुमार ने बताया कि राजीव चौक,इफको चौक,मिलेनियम सिटी सेंटर सहित शहर के प्रमुख चौराहों पर रात में ट्रैफिक पुलिसकर्मी मौजूद रहते है। अगर ट्रैफिक बूथ पर कोई भी मदद के लिए आता है,उनको सही जानकारी के साथ-साथ अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए मदद की जाती है।
नियमित होती है जांच
निजी बसों पर भी नियमित जांच होती है। नियमों का उल्लघंन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाती है।
-संजीव सिंगला,जिला परिवहन अधिकारी गुरुग्राम


