दिल्ली, नोएडा में हादसों के बाद भी नहीं जागे जिला प्रशासन अधिकारी
- प्रशासनिक अनदेखी, 20 हजार से अधिक सड़कों पर जानलेवा गड्ढे, सीवर लाइन के नाम पर बिना सुरक्षा खोदी जा रही सड़कें दिल्ली, नोएडा में हादसों के भी नहीं ज

गुरुग्राम, वरिष्ठ संवाददाता। देश की राजधानी दिल्ली और पड़ोसी नोएडा में खुले मैनहोल व गड्ढों के कारण हुए दर्दनाक हादसों के बावजूद गुरुग्राम का जिला प्रशासन गहरी नींद में सोया हुआ है। साइबर सिटी की लगभग 20 हजार से अधिक छोटी-बड़ी सड़कों पर जगह-जगह बने गड्ढे और सीवर लाइन के लिए खोदी गई सड़कें डेथ ट्रैप में तब्दील हो चुकी हैं। विडंबना यह है कि नगर निगम और जीएमडीए के ठेकेदार बिना किसी बैरिकेडिंग या रिफ्लेक्टर के गहरी खुदाई कर रहे हैं, जो सीधे तौर पर राहगीरों की जान से खिलवाड़ है। शनिवार को हिन्दुस्तान की टीम ने सड़कों की पड़ताल की जो असुरक्षित है।
बीता साल भी गुरुग्राम के लिए सबक नहीं बन पाया। सेक्टर-4 और राजेंद्रा पार्क क्षेत्र में खुले गड्ढों में गिरकर दो बाइक सवार हादसों का शिकार हो चुके हैं। वहीं, पटौदी रोड पर एक दिल दहला देने वाली घटना में बाइक सवार खुले मैनहोल में अपनी मोटरसाइकिल समेत समा गया था। इन तमाम घटनाओं के बावजूद धरातल पर लापरवाही का आलम यह है कि ठेकेदार सुरक्षा मानकों को ताक पर रखकर काम कर रहे हैं। शहर में लगातार सड़कों किनारे सीवर लाइन तो कहीं पर बरसाती नालों का निर्माण कार्य चल रहा है, लेकिन निर्माणधीन साइटों पर कोई भी सुरक्षा के ठोस इंतजाम नहीं है। सराय रोड पर मंडरा रहा मौत का साया द्वारका एक्सप्रेसवे से गांव सराय की तरफ जाने वाली सड़क इन दिनों राहगीरों के लिए काल बनी हुई है। नगर निगम की ओर से यहां सीवर लाइन डालने के लिए गहरी खुदाई की जा रही है। विशेष रूप से संत प्रकाशपुरी मंदिर के सामने और शगुन वाटिका से थोड़ा आगे सड़क को बुरी तरह खोदा गया है। मौके पर सुरक्षा के नाम पर न तो कोई बैरिकेडिंग की गई है और न ही चेतावनी बोर्ड लगाए गए हैं। राजेंद्रा पार्क या वाटिका से द्वारका की ओर जाने वाले वाहन चालकों के लिए रात के अंधेरे में यहां स्थिति बेहद भयावह हो जाती है। बिना किसी रिफ्लेक्टर या लाइटिंग के यह गहरी खुदाई किसी बड़े हादसे को न्योता दे रही है। प्रशासन की यह सुस्ती किसी निर्दोष की जान ले सकती है। जीएमडीए की लापरवाही, नाले में भरा पानी जीएमडीए की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। सेक्टर-10 में उमंग भारद्वाज चौक से हीरो होंडा चौक की तरफ जाते हुए नाले को खोदकर बीच में ही छोड़ दिया गया है। वर्तमान में इस खुले नाले में पानी भरा हुआ है, जिससे इसकी गहराई का अंदाजा लगाना किसी भी चालक के लिए नामुमकिन है। यह मार्ग बेहद व्यस्त है और यहां हर समय हजारों भारी व हल्के वाहनों का आवागमन रहता है। इसके बावजूद सुरक्षा का कोई ठोस इंतजाम नहीं किया गया है। सड़क किनारे खुदा यह नाला और उसमें भरा पानी हादसों को खुली चुनौती दे रहा है, लेकिन अधिकारी अपनी फाइलों में ही व्यस्त हैं। सुरक्षा के इंतजाम नदारद: बसई फ्लाई ओवर से बसई तालाब के किनारे वाली सड़क पर सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है। पहले नगर निगम ने तालाब के किनारे सुरक्षा के लिहाज से लोहे की जालियां लगवाई थीं, लेकिन अब उन जालियों को हटा दिया गया है। वर्तमान में बिना किसी सुरक्षा घेरे के सड़क और गहरा तालाब एक-दूसरे से सटे हुए हैं, जिससे जरा सी चूक होने पर वाहन सीधे तालाब में समा सकता है। यह स्थिति न केवल दुपहिया वाहनों बल्कि पैदल चलने वालों के लिए भी घातक है। वहीं दूसरी ओर, शहर के सबसे आधुनिक माने जाने वाले गोल्फ कोर्स रोड का हाल भी बुरा है। यहां जीएमडीए की तरफ से बरसाती नाले को कई जगहों से खुला छोड़ दिया गया है। वीआईपी रोड होने के बावजूद यहां सुरक्षा मानकों की अनदेखी की जा रही है। तेज रफ्तार वाहनों के इस कॉरिडोर पर खुले नाले किसी भी समय बड़े सड़क हादसे का सबब बन सकते हैं। इन दोनों ही प्रमुख क्षेत्रों में अधिकारियों की लापरवाही साफ झलकती है। लोगों ने कहा, मेरे सामने सराय रोड पर एक बाइक सवार गिरते-गिरते बचा है। रात को यहां स्ट्रीट लाइटें भी नहीं जलतीं और ठेकेदार ने गड्ढों के चारों ओर मिट्टी का ढेर लगा दिया है जो फिसलन पैदा कर रहा है। क्या प्रशासन किसी की मौत के बाद ही जागेगा। - नवीन कुमार, स्थानीय निवासी, सराय गांव बसई तालाब के पास से गुजरते समय डर लगता है कि कहीं कोई वाहन टकराकर तालाब में न गिर जाए। जालियां हटाकर प्रशासन ने मौत का रास्ता खोल दिया है। गोल्फ कोर्स रोड पर भी खुले नाले जीएमडीए की कार्यशैली पर बट्टा लगा रहे हैं। अधिकारियों को तुरंत इन गड्ढों को ढकना चाहिए। - अमित यादव, नियमित यात्री, बसई रोड निगम दायरे में शामिल अगर कहीं पर भी सड़क किनारे गड्ढे खोदकर खुले छोड़े गए हैं तो वहां सुरक्षा के प्रबंधन करने के निर्देश दिए गए हैं। कहीं पर भी लापरवाही मिलती है तो संबधित एजेंसी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। - विजय ढाका, मुख्य अभियंता, नगर निगम, गुरुग्राम।
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