
शहर की सड़कों पर गड्ढे दीवाली के बाद भी न भरने से लोग परेशान
संक्षेप: गुरुग्राम नगर निगम के द्वारा दीवाली तक सड़कों को गड्ढामुक्त करने का दावा खोखला साबित हुआ है। 30 करोड़ रुपये खर्च होने के बावजूद सड़कों की स्थिति जस की तस है, जिससे नागरिकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सेक्टर-23ए और सेक्टर-55 में स्थिति और भी खराब है।
गुरुग्राम। गुरुग्राम नगर निगम (एमसीजी) के सड़कों को गड्ढामुक्त करने के दावे दीवाली बीत जाने के बाद भी खोखले साबित हो रहे हैं। निगम आयुक्त ने दीवाली तक शहर की सभी सड़कों को गड्ढामुक्त करने का लक्ष्य रखा था। समय सीमा बीतने के बाद भी सड़कें जस की तस हैं। इससे लोग परेशान हैं। न्यू कॉलोनी, राजेंद्रा पार्क, और सीही जैसी पुरानी कॉलोनियों में सड़कों पर बने गहरे गड्ढे भीषण ट्रैफिक जाम का मुख्य कारण बन रहे हैं, जिससे रोजमर्रा के यात्रियों को भारी परेशानी उठानी पड़ रही है। वहीं सेक्टर-43, सेक्टर-23ए, 44, 45, 46, और 55 सहित सैंकड़ों पॉश इलाकों की मुख्य सड़कों और आंतरिक मार्गों पर भी गड्ढे बने हुए हैं, जो निगम के दावे पर सवालिया निशान लगाते हैं।

सड़क मरम्मत पर 30 करोड़ से अधिक खर्च : सड़कों की बदहाली तब और भी हैरान करने वाली लगती है, जब यह तथ्य सामने आता है कि निगम ने सड़कों की मरम्मत और रखरखाव के नाम पर पहले ही 30 करोड़ से अधिक का राजस्व खर्च कर दिया है। इतनी बड़ी राशि खर्च होने के बावजूद सड़कों की स्थिति जस की तस बनी हुई है, जो ठेकेदारों के कार्य की गुणवत्ता और निगम अधिकारियों की निगरानी पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। सबसे खराब स्थिति सेक्टर-23ए के वेस्ट जोन की है। सेक्टर-23ए निवासी व सेवानिवृत कार्यकारी अभियंता बिजली जेपी दहिया ने बताया कि नगर निगम गुरुग्राम का सड़कों को गड्ढामुक्त करने का दावा केवल कागजों तक ही सीमित रहा है। नगर निगम द्वारा भले ही वार्ड अनुसार सड़कों को गड्ढामुक्त करने को लेकर टेंडर निजी एजेंसियों को दे दिए हों, लेकिन एजेंसियों द्वारा सड़कों को गड्ढामुक्त करने को लेकर खानापूर्ति की जा रही है। जिन जगहों पर निगम दीवाली से पहले गड्ढामुक्त किया था, वह गड्ढे फिर से उखड़ने लगे हैं। सेक्टर-55 की टूटी सड़क पर जलभराव हो रहा सेक्टर-55 के आरडब्ल्यूए प्रधान सतबीर चौधरी ने बताया कि उनके सेक्टर में बीते चार साल से सड़कों की मरम्मत नहीं की गई है। इसको लेकर जब निगम अधिकारियों से शिकायत की गई तो उन्होंने जवाब दिया कि उनके सेक्टर की सड़कों के निर्माण के लिए टेंडर हो चुकी है, लेकिन चार माह से ज्यादा समय बीत जाने के बाद भी अभी तक निगम अधिकारियों ने सड़कों की सुध तक नहीं ली है। सतबीर चौधरी ने बताया कि टूटी सड़कों के कारण लोगों का घरो से बाहर निकलना दुभर हो गया है। बारिश के दिनों में तो इन गड्ढों में पानी भरने से लोग हादसों का शिकार भी होते हैं।

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