Gurgaon News: असुरक्षित इंतजाम: पीजी में किराया अधिक और सुविधाएं कम
Gurgaon News: गुरुग्राम,प्रमुख संवाददाता। दिल्ली से सटे गुरुग्राम में बेहतर पढ़ाई के लिए आठ हजार से ज्यादा छात्र दूसरे राज्य और शहरों से आते है। कॉलेज और यूनिवर्सिट

Gurgaon News: गुरुग्राम, गौरव चौधरी। दिल्ली से सटे गुरुग्राम में बेहतर पढ़ाई के लिए आठ हजार से ज्यादा छात्र दूसरे राज्य और शहरों से आते है। कॉलेज और यूनिवर्सिटी में छात्रों के लिए पर्याप्त होस्टल की सुविधा नहीं होने के कारण मजबूरन छात्रों को पीजी में किराए पर रहना पड़ता है। पीजी में नौ हजार रुपये से 22 हजार रुपये तक वसूला जाता है,लेकिन सुरक्षा सिर्फ कहने के लिए ही होती है। इन पीजी में आवगमन 24 घंटे चालू रहता है और ज्यादातर पीजी में काम करने वाले स्टॉफ का सत्यापन भी नहीं होता है। जिला प्रशासन के अनुसार नगर निगम क्षेत्र और कॉलोनियों में ढ़ाई हजार से ज्यादा पीजी बिना अनुमति के संचालित हो रहे है। गुरुग्राम में पीजी का संचालन करना एक कारोबार बन चुका है।
इलाके के अनुसार वसूला जाता है किराया
ओल्ड गुरुग्राम में साढ़े आठ से 12 हजार रुपये तक पीजी में किराया वसूला जाता है। जबकि सोहना रोड के आसपास बने पीजी में 15 हजार से 18 हजार रुपये तक किराया है। गोल्फ कोर्स रोड,सेक्टर-55,सेक्टर-56 और सेक्टर-58 के आसपास इलाकों में 20 से 22 हजार रुपये तक का किराया एक छात्र के लिए होता है। बिजली बिल अतिरिक्त वसूला जाता है,बिजली निगम की तय दरों से भी ज्यादा रकम वसूली जाती है।
पीजी में सुरक्षा भगवान भरोसे
गुरुग्राम में बने पीजी लोगों के लिए कारोबार बन गए है।हर साल किराया बढ़ा दिया जाता है,लेकिन सुविधाओं में इजाफा नहीं हो रहा। पीजी में खानापूर्ति करने के लिए सीसीटीवी कैमरे लगाए गए है,लेकिन वह काम नहीं करते है। इसके अलावा पीजी में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम भी नहीं होते है,रात में गार्ड भी नहीं होता। सिर्फ वहां पर केयर टेकर ही मौजूद रहता है और रात होने पर वह भी चला जाता है। पीजी में 24 घंटे आवगमन चालू रहता है और कोई भी कभी आ सकता है।
सुविधाओं के नाम पर ठेंगा
कई पीजी में सिर्फ आरओ पानी की सुविधा दी जाती है,लेकिन आरओ कई पीजी में नहीं होते है। सप्लाई के पानी की ही व्यवस्था ही होती है। पॉश सेक्टर और कॉलोनियों में बने पीजी में हरियाली और वेंटिलेशन का ध्यान रखा जाता है,लेकिन गांव और पूराने गुरुग्राम में संचालित हो रहे पीजी में इस तरह की कोई सुविधाएं तक नहीं है। पीजी में मंहगा किराया देने के बावजूद छात्रों को मूलभुत सुविधाओं के लिए तरसना पड़ता है। इसके अलावा पीजी में छोटे कमरे होने के कारण रहना दुभर हो जाता है। वहीं पीजी में रहने वाले कई छात्रों को क्षय रोग और एलर्जी जैसी बीमारियों का भी सामना करना पड़ा। स्वास्थ्य विभाग के द्वारा किए गए सर्वे रिपोर्ट में सामने आया था।
खाने की गुणवत्ता भी खराब
पीजी संचालक मोटा मुनाफा कमाने के लिए पीजी में रहने वाले छात्रों को खिलाने वाले खाने में भी गुणवत्ता से समझौता करते है। पीजी में सोमवार से शुक्रवार सिर्फ दो समय का खाना दिया जाता है। शनिवार और रविवार को तीन समय का खाना मिलता है। खाने में भी सस्ते सब्जियों को परोसा जाता है,जिस कारण कई छात्र बीमार भी हो जाते है। इसकी कई बार शिकायतें भी छात्रों और परिजनों के द्वारा की गई।
पीजी में कई बार हुई वारदातें
पीजी में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं होने के कारण मारपीट से लेकर फायरिंग तक हुई।इसके अलावा पीजी की पार्किंग में वाहन भी चोरी हो चुके है।जांच करने पर पुलिस को सीसीटीवी कई पीजी में बंद मिले। वहीं पीजी में रहने वाली लड़कियों के साथ छेड़छाड़ और मारपीट के भी कई मामले सामने आए है।
पीजी में आग से बचने के उपाय नहीं
सभी पीजी बिना अनुमति के अवैध तरीके से संचालित हो रहे है।नगर निगम और नगर योजनाकार विभाग की तरफ से काई अनुमति नहीं दी गई है। बिना नक्शे के निर्माण हुआ है। पीजी की इमारत नियमों को दरकिनार कर आठ मंजिल तक बन गई है। कई पीजी में लिफ्ट की भी सुविधा नहीं है। इसके अलावा अगर पीजी में आगजनी की घटना होने पर बचाव के कोई उपाय नहीं है। आने-जाने का सिर्फ एक ही रास्ता है और वह भी काफी छोटा है।
प्रतिक्रिया:
बेटी का सोहना में स्थित एक यूनिवर्सिटी से बीएसई की पढ़ाई कर रही है। कैंपस में होस्टल नहीं मिलने के कारण सोहना में बने पीजी में कमरा दिलाया गया है। पीजी में सुविधाएं नाकाफी है,मजबूरी में बेटी रह रही है। पीजी का खाना खाकर वह दो बार बीमार भी हो चुकी है। अब अलग से टिफिन की व्यवस्था की गई है,इसके साथ ही यूनिवर्सिटी में होस्टल के लिए दोबारा से आवेदन किया गया।
-अभिनंदन शर्मा, अजमेर राजस्थान
सेक्टर-55 में स्थित एक निजी यूनिवर्सिटी से स्नातक की पढ़ाई कर रहा है।होस्टल नहीं मिलने पर सेक्टर-56 में वह अपने एक क्लासमेट के साथ पीजी में रह रहा है। पीजी एक मकान में बना हुआ है। दोनों दोस्त महीने का 32 हजार रुपये किराया देते है और हर महीने तीन से चार हजार रुपये आता है। साफ-सफाई नियमित नहीं होती है और सुरक्षा भी राम भरोसे है। पीजी में एक कमरे से फोन और लैपटॉप चोरी हो गया था।
-विष्णु गोयल,हिसार
बिल्डर कॉलोनियों में अवैध रूप से चल रहे पीजी और गेस्ट हाउस के खिलाफ अभियान चल रहा है। अब तक 50 से अधिक पीजी और गेस्ट हाउस को सील किया जा चुका है। डीएलएफ फेज-तीन, सुशांत लोक एक और साउथ सिटी एक में अभियान चल रहा है। पालम विहार, उप्पल साउथ एंड, मालिबू टाउन, मेफील्ड गार्डन, विपुल वर्ल्ड, सनसिटी, वाटिका सिटी, सुशांत लोक दो और तीन, साउथ सिटी दो, निर्वाणा कंट्री आदि कॉलोनियों में पीजी और गेस्ट हाउस के खिलाफ अभियान चलाया जाएगा।
- अमित मधोलिया, डीटीपीई, नगर एवं ग्राम नियोजन विभाग


