बच्चों की पढ़ाई का पहला आईना बनेगा निपुण आकलन, आज से चार दिन होगी परीक्षा
बालवाटिका-3 से कक्षा चार तक के करीब 35 से 40 हजार बच्चों का होगा आकलन बच्चों की पढ़ाई का पहला आईना बनेगा निपुण आकलन, आज से चार दिन होगी परीक्षा

गुरुग्राम, साक्षी रावत। मंगलवार से शुरू होने वाला निपुण आकलन-1 छोटे बच्चों के लिए सिर्फ एक और परीक्षा नहीं होगी। यह सत्र 2026-27 में पहली बार बड़े स्तर पर यह देखने का मौका होगा कि कक्षा में पढ़ाई गई भाषा और गणित की बातें बच्चे वास्तव में कितना समझ पा रहे हैं। गुरुग्राम जिले में बालवाटिका-3 से कक्षा चार तक पढ़ने वाले करीब 35 से 40 हजार विद्यार्थियों के लिए होने वाले इस आकलन में बच्चों की किताब याद करने की क्षमता से ज्यादा उनकी वास्तविक समझ को परखने पर जोर रहेगा। निपुण कार्यक्रम का मूल उद्देश्य ही शुरुआती कक्षाओं में बच्चों की भाषा और गणित की बुनियादी नींव मजबूत करना है। जिला नोडल अधिकारी मनोज लाकड़ा ने बताया कि अभी तक सत्र में इस स्तर पर कोई निपुण आकलन नहीं हुआ है। ऐसे में मंगलवार से शुरू होने वाली परीक्षा से स्कूलों को पहली बार यह स्पष्ट तस्वीर मिल सकेगी कि बच्चों का सीखने का स्तर कक्षा के अनुरूप कहां खड़ा है। किसी बच्चे को पढ़ने में परेशानी है, कोई लिखने में पीछे है या गणित के सामान्य सवालों को समझने में अतिरिक्त मदद चाहिए, तो उसका संकेत इसी आकलन से मिलेगा। इसका फायदा यह होगा कि शिक्षक आगे की कक्षा में सभी बच्चों को एक ही स्तर से पढ़ाने के बजाय जरूरत के अनुसार कमजोर क्षेत्रों पर अधिक काम कर सकेंगे।
चार दिन में अलग-अलग विषयों की होगी जांच:
मंगलवार यानी 18 अगस्त से आकलन की शुरुआत होगी। पहले दिन बालवाटिका-3 के बच्चों का आकलन होगा, जबकि कक्षा एक और दो में अंग्रेजी तथा कक्षा चार में हिंदी की लिखित परीक्षा होगी। इसके अगले दिन 19 अगस्त को बालवाटिका-3 का आकलन जारी रहेगा। कक्षा दो और तीन में गणित की परीक्षा होगी, जबकि कक्षा चार के बच्चों की हिंदी की मौखिक परीक्षा ली जाएगी। 20 अगस्त को कक्षा एक के बच्चों से गणित, कक्षा दो से हिंदी, कक्षा तीन से अंग्रेजी और कक्षा चार से गणित की परीक्षा होगी। अंतिम दिन 21 अगस्त को कक्षा एक और तीन के बच्चों का हिंदी तथा कक्षा चार के बच्चों का अंग्रेजी का आकलन किया जाएगा। इस तरह चार दिनों में अलग-अलग कक्षाओं के भाषा और गणित संबंधी कौशल की तस्वीर तैयार होगी।
सिर्फ लिखकर जवाब देना ही काफी नहीं:
इस आकलन में खास बात यह है कि छोटे बच्चों की वास्तविक क्षमता जानने के लिए मौखिक परीक्षा को भी शामिल किया गया है। कक्षा तीन में हिंदी का मौखिक आकलन ओआरएफ मॉड्यूल के माध्यम से होगा, जिसमें बच्चे की पढ़ने की क्षमता पर ध्यान दिया जाएगा। कक्षा चार में भी लिखित और मौखिक परीक्षा अलग-अलग रखी गई है। लिखित परीक्षा में श्रुतलेख और लेखन कौशल देखा जाएगा, जबकि मौखिक परीक्षा में बच्चा कितना सुनता, बोलता और पढ़ता है, इसे परखा जाएगा। इससे यह अंतर भी सामने आ सकेगा कि कोई बच्चा लिखित प्रश्न हल तो कर लेता है, लेकिन पढ़ने या बोलकर समझाने में उसे परेशानी तो नहीं है। इसी तरह गणित में केवल उत्तर सही या गलत होने के बजाय बच्चे की बुनियादी समझ को मजबूत करने की जरूरत वाले क्षेत्रों की पहचान की जा सकेगी।
बच्चे के लिए नंबर से ज्यादा सीखने का मौका:
शुरुआती कक्षाओं के बच्चों के लिए इस परीक्षा का सबसे बड़ा फायदा यह रहेगा कि आकलन के बाद उनकी पढ़ाई को उनकी जरूरत के हिसाब से बेहतर बनाया जा सकेगा। यदि किसी बच्चे को हिंदी पढ़ने में अतिरिक्त अभ्यास चाहिए या गणित में संख्याओं को समझने में परेशानी है तो शिक्षक उस स्तर पर दोबारा काम कर सकेंगे। इससे कमजोर विद्यार्थी लगातार पीछे न छूटे और उसकी समस्या बड़ी कक्षा तक न पहुंचे, इस दिशा में मदद मिलेगी।
ऐप पर दर्ज होगा कक्षा चार का मौखिक आकलन:
कक्षा चार के विद्यार्थियों के मौखिक आकलन की प्रक्रिया निपुण हरियाणा टीचर ऐप के माध्यम से पूरी की जाएगी। विभाग ने शिक्षकों को परीक्षा से पहले एप के कंटेंट रिपॉजिटरी में उपलब्ध शिक्षक मार्गदर्शिका पढ़ने के निर्देश दिए हैं। संबंधित विषय के अभ्यास प्रश्न भी एप में उपलब्ध कराए गए हैं। इससे मौखिक परीक्षा के दौरान शिक्षकों को प्रक्रिया समझने और विद्यार्थियों का आकलन दर्ज करने में सुविधा मिलेगी।
दो पालियों वाले स्कूलों में अलग समय:
लिखित परीक्षा सामान्य विद्यालयों में सुबह 9 से 11 बजे तक होगी। दोहरी पाली वाले विद्यालयों में इसका समय दोपहर एक से तीन बजे तक निर्धारित किया गया है। सोमवार को स्कूलों में मंगलवार से शुरू होने वाले आकलन को लेकर अंतिम तैयारियां की गईं। शिक्षकों को संबंधित विषय की परीक्षा प्रक्रिया और एप से जुड़ी जानकारी को एक बार फिर देखने के लिए कहा गया है। चार दिनों की यह परीक्षा पूरी होने के बाद बच्चों के प्रदर्शन से सिर्फ यह नहीं पता चलेगा कि किसने कितने प्रश्न सही किए, बल्कि यह भी समझने में मदद मिलेगी कि गुरुग्राम के छोटे बच्चों की पढ़ाई की बुनियाद किन क्षेत्रों में मजबूत है और कहां अभी और मेहनत की जरूरत है। यही आकलन आगे की कक्षा में बच्चों की पढ़ाई को उनकी वास्तविक जरूरत से जोड़ने में अहम भूमिका निभाएगा.


