सामग्री न मिलने से 30 से अधिक सड़कों का निर्माण रुका
गुरुग्राम, कृष्ण कुमार। खाड़ी देशों के बीच छिड़े युद्ध का सीधा और नकारात्मक असर अब साइबर सिटी गुरुग्राम की बुनियादी सुविधाओं और विकास कार्यों पर पड़ने

गुरुग्राम, कृष्ण कुमार। युद्ध का सीधा और नकारात्मक असर अब साइबर सिटी गुरुग्राम की बुनियादी सुविधाओं और विकास कार्यों पर पड़ने लगा है। कच्चे तेल की सप्लाई बाधित होने से सड़क निर्माण में इस्तेमाल होने वाले मुख्य कच्चे माल-तारकोल (बिटुमैन) और लाइट डीजल ऑयल (एलडीओ) की बाजार में भारी किल्लत हो गई है। इस गंभीर संकट के चलते नगर निगम गुरुग्राम के करीब 70 करोड़ रुपये की लागत वाले 30 से अधिक सड़क निर्माण प्रोजेक्ट्स पर ब्रेक लगने की नौबत आ गई है। मांग के अनुसार सामग्री न मिलने से शहर में 100 किलोमीटर लंबी मॉडल रोड के निर्माण पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं।
हालांकि नगर निगम ने करीब 70 करोड़ के सड़क निर्माण के टेंडर जारी किए जा चुके हैं, लेकिन कच्चा माल नहीं मिलने के कारण एजेंसी काम शुरू नहीं कर पा रही है। सड़क ठेकेदारों ने बताया कि मुश्किल समय में निगम अधिकारियों से थोड़ी राहत की मांग की गई है। उन्होंने निगम से माल के रेट और समय दोनों बढ़ाए जाएं, ताकि कुछ राहत मिल सके। यहीं हालात रहे तो एजेंसियों की बचत तो दूर सड़क निर्माण का कार्य घाटे का सौदा साबित होगा। बता दें कि सड़क निर्माण के दौरान हॉट मिक्स प्लांट को चलाने के लिए एलडीओ सबसे महत्वपूर्ण घटक है, जो बजरी और तारकोल के मिश्रण को 150°डिग्री से 180°डिग्री तक गर्म करता है। ठेकेदारों का कहना है कि महज दो सप्ताह पहले जो एलडीओ 38 से 42 रुपये प्रति किलो मिल रहा था, वह अब 65 से 70 रुपये के पार पहुंच गया है। इसी तरह 40 रुपये किलो बिकने वाला तारकोल अब 55 से 60 रुपये प्रति किलो से ऊपर बिक रहा है। ऊंचे दाम चुकाने के बावजूद ठेकेदारों को मांग के अनुसार कच्चा माल नहीं मिल रहा है, जिससे सप्लाई चैन पूरी तरह टूट चुकी है।एक गाड़ी माल के लिए घंटों का इंतजारठेकेदारों ने निगम के मुख्य अभियंता के सामने अपनी समस्या रखते हुए बताया कि पानीपत और मथुरा रिफाइनरियों के बाहर माल लेने गए टैंकरों की 5 से 6 किलोमीटर लंबी कतारें लगी हुई हैं। सड़क निर्माण के लिए एक दिन में 10 गाड़ियों की जरूरत होती है, लेकिन रिफाइनरी अधिकारियों के सामने मिन्नतें करने के बाद मुश्किल से एक गाड़ी ही मिल पा रही है। माल न होने के कारण मजदूर खाली बैठे रहते हैं, जिसकी दिहाड़ी ठेकेदारों को अपनी जेब से भरनी पड़ रही है।मानसून का लक्ष्य पिछड़ा, ठेकेदारों ने दी काम छोड़ने की चेतावनीनगर निगम ने लक्ष्य रखा था कि मानसून की पहली बारिश से पहले शहर की प्रमुख सड़कों का पैचवर्क और नई सड़कों का निर्माण पूरा कर लिया जाएगा। लेकिन वर्तमान परिस्थितियों में यह लक्ष्य पूरा होना नामुमकिन लग रहा है। निर्माण रुकने से सड़कों से उड़ने वाली धूल वायु प्रदूषण को भी बढ़ा रही है। ठेकेदारों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि नगर निगम ने प्राइस एस्केलेशन (बढ़ी हुई कीमतों के आधार पर बजट समायोजन) पर तुरंत विचार नहीं किया, तो वे काम को बीच में ही छोड़ने को मजबूर होंगे, क्योंकि पुराने रेट पर काम करना भारी घाटे का सौदा है।इन प्रमुख सेक्टरों के निवासियों को होगी परेशानीसड़कों का निर्माण रुकने का सीधा खामियाजा शहरवासियों को भुगतना पड़ेगा। लक्ष्मण विहार, पालम विहार, सुशांत लोक और ओल्ड दिल्ली रोड सहित सेक्टर-38, सेक्टर-5, 39, 45, 46, 55, 56 और उद्योग विहार जैसे अहम इलाकों में चल रहे प्रोजेक्ट्स इस संकट से सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। फिलहाल लोगों को लंबे समय तक टूटी सड़कों और गहरे गड्ढों के बीच से ही अपना सफर तय करना होगा।ठेकेदारों को जिस हिसाब से माल मिल रहा है उसी हिसाब से सड़क निर्माण करने के निर्देश दिए हुए हैं। सड़क ठेकेदारों ने अपनी समस्याएं रखी है, जिन पर विचार चल रहा है। जल्द उनका समाधान किया जाएगा।- विजय ढाका, मुख्य अभियंता, नगर निगम, गुरुग्राम
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