बारिश और सीवर का निस्तारित पानी नालियों में नहीं बहेगा
गुरुग्राम में आगामी मानसून के दौरान जलभराव से बचने के लिए निगम ने एक व्यापक योजना बनाई है। इसमें बारिश के पानी और सीवर के निस्तारित पानी का उपयोग किया जाएगा। 28 तालाबों का जीर्णोद्धार किया जाएगा और 206 नए वर्षा जल संचयन प्रणालियों का निर्माण होगा। सभी कार्यों की निगरानी जीपीएस से होगी।

गुरुग्राम, कृष्ण कुमार। आगामी मानसून के दौरान गुरुग्राम को जलभराव जैसी गंभीर समस्या से बचाने निगम ने एक व्यापक रणनीति तैयार की है। निगम की इस नई योजना के तहत अब बारिश का साफ पानी और सीवर का निस्तारित पानी व्यर्थ में नालियों में नहीं बहेगा। सीवर के निस्तारित पानी का प्रयोग पार्कों की हरियाली बढ़ाने में किया जाएगा, जबकि बरसाती पानी को तालाबों और हार्वेस्टिंग सिस्टम के जरिए भूजल रिचार्ज के उपयोग में लाया जाएगा। इस पूरी मेगा योजना की समीक्षा के लिए हाल ही में निगम की मेयर की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में अतिरिक्त आयुक्त-3 रविंद्र यादव ने मानसून को लेकर निगम की ठोस कार्ययोजना और वर्तमान प्रगति रिपोर्ट सदन के समक्ष रखी। अतिरिक्त निगम आयुक्त की रिपोर्ट के अनुसार नगर निगम ने इस बार प्राकृतिक जल स्रोतों के माध्यम से जलभराव रोकने की ठोस रणनीति बनाई है। बीते करीब दो दशकों से जो तालाब अपना वजूद खो चुके थे और पूरी तरह समाप्त हो चुके थे, उन्हें फिर से जिंदा किया जा रहा है। शहर के अत्यधिक जलभराव वाले संवेदनशील इलाकों के पास स्थित ऐसे 28 प्राथमिकता वाले तालाबों का 30 मई तक जीर्णोद्धार कर लिया जाएगा। इसके साथ ही, शहर के कुल 74 तालाबों के लिए एक विस्तृत जल निकासी अनुसूची (डी-वाटरिंग शेड्यूल) तैयार की गई है। इसका मुख्य उद्देश्य यह है कि भारी बारिश के दौरान ये तालाब स्पंज की तरह अतिरिक्त बरसाती पानी को सोख सकें, जिससे मुख्य सड़कों और रिहायशी कॉलोनियों में पानी न भरे।
206 नए वर्षा जल संचयन प्रणाली होगी तैयार
गिरते भूजल स्तर को सुधारने के लिए निगम वर्षा जल संचयन संरचनाओं की मरम्मत और नए निर्माण पर युद्ध स्तर पर काम कर रहा है। निगम क्षेत्र में कुल 468 पुराने वर्षा जल संचयन संरचनाएं मौजूद हैं। इनमें से 309 वर्तमान में पूरी तरह काम कर रही हैं। शेष 159 खराब पड़ी प्रणालियों की सफाई और मरम्मत के लिए कार्य आदेश जारी कर दिए गए हैं। जोन-1 (वार्ड 9, 10, 11, 14, 15, 16, 17 व 18) में काम तेजी से चल रहा है, जबकि जोन-2 में 18 नई संरचनाएं बनाई जा रही हैं। शहर में 206 नई और अत्याधुनिक मॉड्यूलर संचयन प्रणालियां स्थापित की जा रही हैं। इनमें से 169 के लिए कार्यादेश जारी हो चुके हैं और 44 पर काम जारी है। निगम ने 15 मई 2026 तक इन सभी आधुनिक प्रणालियों का काम पूरा करने का सख्त लक्ष्य निर्धारित किया है।
माइक्रो एसटीपी से निस्तारित पानी पार्कों की बढाएगा हरियाली
सीवर जल के सही और पर्यावरण के अनुकूल उपयोग के लिए शहर में 2275 किलोलीटर प्रतिदिन (केएलडी) क्षमता वाले 49 माइक्रो एसटीपी को दोबारा से स्थापित करने की योजना है। इनमें से 41 संयंत्र चालू अवस्था में हैं और शेष 8 के लिए निविदा प्रक्रिया चल रही है। इन संयंत्रों से निकलने वाले शोधित जल का उपयोग पार्कों की सिंचाई और तालाबों को भरने में किया जाएगा। जोन-1 में फाजिलपुर तालाब को सीधे निस्तारित पानी से भरने के लिए 960 मीटर लंबी पाइपलाइन बिछाने के आदेश जारी हो चुके हैं। इसके अतिरिक्त साउथ सिटी-2 और सेक्टर-57 के कुल 25 पार्कों तक निस्तारित पानी पहुंचाने के लिए टेंडर प्रक्रिया अंतिम चरण में है। जोन-3 के सेक्टर 38, 39, ग्रीनवुड और साउथ सिटी-1 के 25 पार्कों को कवर करने के लिए 9.8 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन बिछाई जाएगी, ताकि इनमें पीने के पानी की बर्बादी न हो। जोन-4 में सबसे बड़ा पाइपलाइन विस्तार होगा। साउथ सिटी-1, अर्डी सिटी, सुशांत लोक-1 सहित विभिन्न सेक्टरों के 118 पार्कों की सिंचाई के लिए 32 किलोमीटर से अधिक लंबी लाइनें बिछाने की योजना तैयार की गई है।
जीपीएस से हो रही निगरानी
सभी विकास कार्यों में पारदर्शिता बनाए रखने और भ्रष्टाचार रोकने के लिए वार्ड स्तर पर जीपीएस लोकेशन और लाइव तस्वीरों के जरिए निरंतर निगरानी की जा रही है। निगम अधिकारियों का इस मानसून में लक्ष्य है कि शहर में संवेदनशील स्थानों पर कहीं पर भी जलभराव नहीं हो। वहीं दूसरी तरफ निगम अधिकारियों की परीक्षा भी इस मानसून में होगी। क्योंकि मुख्यमंत्री ने निगम की पूरी टीम को निगम आयुक्त की पसंद पर निगम में लगाया गया है। ऐसे में इस मानसून में निगम अधिकारियों की एक साल की मेहनत का भी परिणाम शहरवासी और मुख्यमंत्री देखेंगे। वहीं निगम आयुक्त प्रदीप दहिया ने कहा कि शहर में इस बार जलभराव नहीं हो इसके लिए अधिकारियों को सख्त हिदायत दी हुई है।
मानसून के आगमन से पहले सभी जल निकासी नालों, तालाबों और संचयन प्रणालियों की सफाई का काम हर हाल में पूरा हो जाना चाहिए। इस जनहित के काम में किसी भी प्रकार की लापरवाही या देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी और दोषी पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई होगी।
- राज रानी मल्होत्रा, मेयर, नगर निगम, गुरुग्राम
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