Gurgaon News: बसई में धूल फांक रही निगम सड़कों पर पानी छिड़कने की मशीनें
Gurgaon News: - सड़कों पर पानी छिड़काव के दावे सिर्फ कागजों में सीमित, सीएक्यूएम के निर्देशों के बावजूद निगम की लचर कार्यप्रणाली

Gurgaon News: गुरुग्राम, कृष्ण कुमार। साइबर सिटी में वायु प्रदूषण की रोकथाम और धूल नियंत्रण के नाम पर नगर निगम द्वारा खरीदी गईं करोड़ों रुपये की अत्याधुनिक एंटी स्मॉग गन धरातल पर धूल फांक रही हैं। शहर के बसई इलाके में निगम की कई मशीनें पिछले एक सप्ताह से लावारिस हालत में एक ही जगह खड़ी हैं। प्रदूषण नियंत्रण की तमाम योजनाएं केवल नगर निगम की फाइलों और बैठकों तक सीमित होकर रह गई हैं। स्थानीय नागरिकों ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि मशीनों को फील्ड में चलाए बिना ही कागजी खानापूर्ति कर लाखों रुपये के डीजल और संचालन का भुगतान किया जा रहा है। बता दें कि नगर निगम गुरुग्राम ने छह माह पहले ही पांच नई एंटी स्मॉग मशीनों को खरीदा है। इन मशीनों को संचालित करने की जिम्मेदारी निजी एजेंसी को सौंपी हुई है। स्थानीयलोगों का आरोप है कि एजेंसी द्वारा पांच में से दो गाड़ियों को सेक्टर-9 स्थित ग्रीनवुड स्कूल के पास सुबह करीब साढे नौ बजे आती है और शाम तक यहीं पर खड़ी रहती है। आरोप है कि निगम से पांच गाडियों का डीजल आदि का बिलों का भुगतान किया जा रहा है और तीन गाडियों को जीपीएस में संचालित दिखा दी जाती है।
स्थानीय समस्याएँ
मिलेनियम सिटी में साल के 365 दिनों में से करीब 200 दिन हवा खराब या बेहद खराब श्रेणी में दर्ज की जाती है। वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) द्वारा प्रदूषण नियंत्रण को लेकर लगातार सख्त हिदायतें जारी की जाती हैं और नियमित समीक्षा बैठकें भी होती हैं, इसके बावजूद निगम प्रशासन का रवैया पूरी तरह उदासीन बना हुआ है। सड़कों से उड़ने वाली धूल को दबाने के लिए इन मशीनों से नियमित पानी का छिड़काव होना चाहिए था, लेकिन निगरानी के अभाव में मशीनें खड़ी-खड़ी कबाड़ बन रही हैं।
मशीनों की कागजी वस्तुस्थिति
स्थानीय लोगों के अनुसार यदि कोई निजी एजेंसी काम करती है तो उस पर पेनल्टी का डर रहता है, लेकिन निगम की अपनी संपत्तियों और मशीनों की कोई ट्रैकिंग नहीं हो रही है। जीपीएस मॉनिटरिंग और लॉगबुक की जांच न होने के कारण यह पता ही नहीं चलता कि कौन सी गाड़ी किस रूट पर पानी का छिड़काव कर रही है।
निगम ने जनता के टैक्स के करोड़ों रुपये खर्च करके इन अत्याधुनिक मशीनों को खरीदा था ताकि सड़कों से उड़ने वाली धूल से राहत मिल सके। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि पांच में से दो मशीनें सेक्टर-9 स्थित ग्रीनवुड स्कूल पास सुबह साढे बजे आती है और शाम को वापस चली जाती है।
- बालकिशन, स्थानीय निवासी
शहर की हवा पहले से ही जहरीली है और सांस लेना दूभर हो रहा है। ऐसे में इन मशीनों का फील्ड में लगातार चलना जरूरी था। हैरानी की बात यह है कि मशीनें सिर्फ कागजों में दौड़ाई जा रही हैं और उनके नाम पर लाखों रुपये के बजट का खेल चल रहा है। इसकी उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए।
- जयपाल कटारिया, स्थानीय निवासी
निगम की खुद की मशीनें होने के बावजूद इनकी कोई जवाबदेही तय नहीं है। जब मशीनें चालू ही नहीं होंगी तो प्रदूषण से जंग कैसे जीती जाएगी? अधिकारियों की इस घोर लापरवाही का खामियाजा आम शहरवासियों और बच्चों को अपनी सेहत गंवाकर भुगतना पड़ रहा है। एक सप्ताह से मशीनें सुबह आती है शाम को वापस चली जाती है।
- महेश कटारिया, स्थानीय निवासी
मशीनों की जीपीएस से निगरानी होती है। सभी मशीनों में जीपीएस लगा हुआ है। अगर यह दो मशीनें एक जगह पर खड़ी है तो इसकी जीपीएस रिपोर्ट से पता लगाया जाएगा।
- रविंद्र यादव, अतिरिक्त निगम आयुक्त, गुरुग्राम।


