एक बारिश नहीं झेल सकी मरम्मत हुई सड़क
गुरुग्राम में हीरो होंडा चौक से उमंग भारद्वाज चौक तक सड़क की स्थिति खराब हो गई है। बारिश के बाद सड़क पर गड्ढे बन गए हैं, जिससे सड़क हादसे का खतरा बढ़ गया है। पिछले डेढ़ महीने में 76 लाख रुपये की लागत से मरम्मत होने के बावजूद, सड़क की गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हैं।

गुरुग्राम, दीपक आहूजा। हीरो होंडा चौक से लेकर उमंग भारद्वाज चौक तक करीब तीन किमी लंबी सड़क एक बारिश नहीं झेल सकी। इस सड़क पर जगह-जगह गड्ढे हो गए हैं। इनकी वजह से सड़क हादसा होने का खतरा बना हुआ है। वाहन चालकों ने भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) की तरफ से सड़क निर्माण में इस्तेमाल सामग्री की गुणवत्ता पर सवाल खड़े किए हैं। एनएचएआई ने करीब डेढ़ महीने पहले जीएमडीए की लागत पर इस मुख्य सड़क की मरम्मत करीब 76 लाख रुपये की लागत से की थी। पिछले सप्ताह हुई बारिश के बाद इस सड़क पर जगह-जगह गड्ढे बन गए हैं।
इन गड्ढों ने वाहन चालकों की दिक्कत को बढ़ा दिया है। इन गड्ढों की वजह से दुपहिया वाहनों के दुर्घटनाग्रस्त होने की संभावना बनी रहती है।सरस्वती इंक्लेव कॉलोनी के निवासी गौतम ने बताया कि पिछले पांच साल से यह सड़क बदहाल अवस्था में थी। डेढ़ महीने पहले इसकी मरम्मत हुई, जिसके बाद इसके ऊपर सफर थोड़ा आरामदायक हो गया था। बारिश के बाद सड़क से रोड़ियां निकल आई हैं। दोबारा गड्ढे हो गए हैं। यह गड्ढे सड़क निर्माण में इस्तेमाल सामग्री की गुणवत्ता पर सवाल खड़ा करते हैं। सेक्टर-10ए निवासी समर सिंह चौहान ने बताया कि बारिश ने सड़क निर्माण में इस्तेमाल सामग्री की पोल खोल दी है। एनएचएआई अधिकारियों से घटिया गुणवत्ता की सड़क निर्माण करने की उम्मीद नहीं थी।एलिवेटेड रोड निर्माण में देरीहीरो होंडा चौक से लेकर उमंग भारद्वाज चौक तक एलिवेटेड रोड का निर्माण होना है। पिछले तीन साल से कागजों में इस रोड के निर्माण की योजना बन रही है। एनएचएआई की तरफ से इस एलिवेटेड रोड के निर्माण को लेकर जीएमडीए को डिजाइन तैयार करके सौंप दिया है। रोड निर्माण शुरू करने के लिए जीएमडीए से अनापत्ति प्रमाण पत्र की जरूरत है।इस सड़क की मरम्मत एनएचएआई ने करवाई है। जीएमडीए ने सिर्फ इसकी मरम्मत की राशि एनएचएआई को दी है। एनएचएआई से आग्रह करेंगे कि सड़क पर जहां गड्ढे हो गए हैं, उनकी मरम्मत करवाई जाए।- अमित गोदारा, कार्यकारी अभियंता, जीएमडीएहीरो होंडा चौक रोड पर सिर्फ डीबीएम किया था। दोबारा मरम्मत की जाएगी।- योगेश तिलक, परियोजना अधिकारी, एनएचएआई
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