चिंता: कम उम्र में इंटरनेट और अश्लील कंटेंट की बढ़ती लत ने बढ़ाई चिंता

Apr 08, 2026 04:13 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, गुड़गांव
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- अभिभावक बच्चों को लेकर पहुंच रहे काउंसिलिंग सेंटर, 14 से 18 साल के हर 5 में से एक प्रभावित

चिंता: कम उम्र में इंटरनेट और अश्लील कंटेंट की बढ़ती लत ने बढ़ाई चिंता

- अभिभावक बच्चों को लेकर काउंसिलिंग सेंटर पहुंच रहे, 14 से 18 आयु के हर पांच में से एक प्रभावित, विशेषज्ञ सतर्क रहने की सलाह दे रहे गुरुग्राम, साक्षी रावत। डिजिटल दौर में किशोरों के बीच इंटरनेट का बढ़ता उपयोग अब एक गंभीर सामाजिक और मानसिक स्वास्थ्य चिंता का विषय बनता जा रहा है। सेक्टर-10 स्थित नागरिक अस्पताल में इन दिनों ऐसे मामलों में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है, जहां 14 से 18 वर्ष के बच्चे इंटरनेट की लत के साथ-साथ आपत्तिजनक सामग्री की ओर आकर्षित हो रहे हैं।अस्पताल के मनोचिकित्सक डॉ. अजीत दीवान के अनुसार हर पांच में से एक किशोर ऐसे मामलों से प्रभावित होकर काउंसिलिंग के लिए आ रहा है।

इनमें लड़कों की संख्या अपेक्षाकृत अधिक है। अभिभावक अक्सर बताते हैं कि बच्चों ने पढ़ाई के नाम पर मोबाइल लिया, लेकिन धीरे-धीरे उनका झुकाव अनुचित ऑनलाइन सामग्री की ओर बढ़ गया।रील्स और शॉर्ट वीडियो की आदत पड़ रहीविशेषज्ञों के अनुसार ऑनलाइन क्लास और पढ़ाई के लिए मोबाइल फोन की उपलब्धता ने किशोरों को इंटरनेट तक आसान पहुंच दी है। इसी का दुरुपयोग करते हुए कई बच्चे बिना निगरानी के ऐसे कंटेंट तक पहुंच रहे हैं, जो उनकी उम्र के लिए उपयुक्त नहीं है। रील्स और शॉर्ट वीडियो की आदत ने भी समस्या को बढ़ाया है। लगातार स्क्रीन स्क्रॉल करने की आदत के कारण बच्चों में ध्यान की कमी, चिड़चिड़ापन और सामाजिक दूरी जैसे लक्षण सामने आ रहे हैं।अभिभावकों की चिंता बढ़तीनागरिक अस्पताल में रोजाना कई अभिभावक अपने बच्चों को लेकर पहुंच रहे हैं। अधिकतर मामलों में अभिभावक यह मानते हैं कि उन्हें शुरुआत में समस्या का अंदाजा ही नहीं हुआ। डॉ. अजीत दीवान बताते हैं कि कई मामलों में अभिभावकों की निगरानी की कमी और बच्चों के साथ संवाद का अभाव भी इस स्थिति को बढ़ा रहा है। समय रहते पहचान और काउंसिलिंग से स्थिति को सुधारा जा सकता है।केस स्टडी:झाड़सा में रहने वाले अभिभावकों के अनुसार बच्चा पढ़ाई के लिए मोबाइल इस्तेमाल करता था, लेकिन धीरे-धीरे रात में देर तक फोन चलाने लगा। व्यवहार में चिड़चिड़ापन बढ़ा और पढ़ाई में गिरावट आई। जांच में सामने आया कि वह लंबे समय तक अनुचित कंटेंट देख रहा था। अब काउंसिलिंग के जरिए सुधार की प्रक्रिया चल रही है। उनके बच्चे की उम्र अभी मात्र 16 साल की है। वहीं, एक और मामले में बादशाहपुर में रहने वाले माता-पिता ने बताया कि बच्चे की सोशल एक्टिविटी कम हो गई थी और वह परिवार से दूरी बनाने लगा था। फोन चेक करने पर अत्यधिक इंटरनेट उपयोग और आपत्तिजनक साइट्स का प्रयोग सामने आया। विशेषज्ञों की मदद से अब स्क्रीन टाइम को नियंत्रित किया जा रहा है।विशेषज्ञों की सलाह- बच्चों के साथ रोजाना खुलकर बातचीत करें और उनकी दिनचर्या को समझें- मोबाइल और इंटरनेट उपयोग के लिए समय सीमा तय करें- पढ़ाई के नाम पर मोबाइल देने के बजाय निगरानी में उपयोग सुनिश्चित करें- बच्चों के व्यवहार में बदलाव (चिड़चिड़ापन, अकेलापन, नींद में कमी) पर तुरंत ध्यान दें- परिवार के साथ समय बिताने और ऑफलाइन गतिविधियों खेल, हॉबी को बढ़ावा दें- रात के समय मोबाइल उपयोग पर विशेष नियंत्रण रखें- बच्चों को सही और गलत ऑनलाइन कंटेंट के बारे में जागरूक करें- जरूरत पड़ने पर मनोचिकित्सक या काउंसलर से सलाह लेने में संकोच न करें

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