ऑनलाइन गेमिंग के जरीए चलाते थे सट्टा, छह गिरफ्तार

Newswrap हिन्दुस्तान, गुड़गांव
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शिकंजा:गुरुग्राम,प्रमुख संवाददाता। साइबर अपराधियों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए गुरुग्राम पुलिस ने ऑनलाइन गेमिंग, लॉटरी फ्रॉड और साइबर धोखाधड़ी कर

ऑनलाइन गेमिंग के जरीए चलाते थे सट्टा, छह गिरफ्तार

गुरुग्राम, गौरव चौधरी। साइबर अपराधियों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए गुरुग्राम पुलिस ने ऑनलाइन गेमिंग, लॉटरी फ्रॉड और साइबर धोखाधड़ी करने वाले एक अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस की टीम ने दिल्ली के जनकपुरी (असालतपुर) स्थित एक फ्लैट में छापेमारी कर गिरोह के छह शातिर आरोपियों को रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई एसीपी (साइबर अपराध) गौरव फौगाट के नेतृत्व और साइबर थाना मानेसर के प्रबंधक निरीक्षक मनोज कुमार की देखरेख में तकनीकी इनपुट के आधार पर की गई।

गिरोह के सदस्यों की पहचान

पकड़े गए आरोपियों की पहचान अर्जुन कुमार निवासी उत्तम नगर, हर्ष निवासी बीजापुर, उत्तर पश्चिम दिल्ली, तनुज उर्फ नोनू निवासी शास्त्री नगर, दिल्ली, शोएब निवासी जेजे कॉलोनी, दिल्ली, समरजीत निवासी विष्णु गार्डन, दिल्ली और निशांत निवासी उत्तम नगर, दिल्ली के रूप में हुई है। पुलिस टीम ने जब जनकपुरी के फ्लैट पर छापेमारी की, तो ये सभी आरोपी लैपटॉप और मोबाइल फोन के जरिए ऑनलाइन गेमिंग पैनल और सट्टेबाजी का रैकेट संचालित करने में व्यस्त थे। आरोपियों के खिलाफ साइबर थाना मानेसर में मामला दर्ज किया गया।

सोशल मीडिया पर ठगी के तरीके

फेसबुक-इंस्टाग्राम पर विज्ञापन देकर फंसाते थे जाल में

प्रारंभिक पूछताछ में खुलासा हुआ कि यह गिरोह ऑनलाइन गेम खिलाने और सट्टा लगवाने के लिए सोशल मीडिया पर आकर्षक विज्ञापन चलाता था। जब कोई व्यक्ति झांसे में आकर गेम खेलने की इच्छा जताता, तो उसे एक विशेष गेमिंग वेबसाइट पर भेजकर उसकी आईडी बनवाई जाती थी। इसके बाद गेम खेलने के लिए वेबसाइट पर दिए गए क्यूआर कोड के माध्यम से पैसे ट्रांसफर करवाए जाते थे। आरोपी इन पैसों के बदले ग्राहकों की गेमिंग आईडी में पॉइंट्स या कॉइंस जोड़ने का काम करते थे। इसके बदले आरोपियों को मोटा वेतन और कमीशन मिलता था।

गिरोह के मास्टरमाइंड की पहचान

व्हाट्सऐप पर मिलती थी बैंक खातों की किट और सिम

पूछताछ में यह भी सामने आया कि इस गिरोह का मास्टरमाइंड कोई और है, जो इन्हें व्हाट्सऐप के जरिए फर्जी नामों पर एक्टिवेटेड सिम कार्ड, बैंक खातों की किट और क्यूआर कोड उपलब्ध करवाता था। इन्हीं फर्जी खातों और क्यूआर कोड का इस्तेमाल ऑनलाइन गेमिंग के वित्तीय लेनदेन और साइबर ठगी की रकम को ठिकाने लगाने के लिए किया जाता था।

पुलिस द्वारा बरामद सामग्री

भारी मात्रा में तकनीकी उपकरण बरामद

पुलिस ने आरोपियों के ठिकाने से भारी मात्रा में डिजिटल उपकरण बरामद किए हैं, जिनका इस्तेमाल ठगी में हो रहा था। मौके से 31 मोबाइल फोन, नौ लैपटॉप,43 सिम कार्ड, नौ एटीएम कार्ड, तीन स्वाइप मशीनें और तीन बैंक खातों की चेकबुक और पासबुक बरामद की गई है।

पुलिस रिमांड की प्रक्रिया

दो आरोपी तीन दिन के पुलिस रिमांड पर

पुलिस ने सभी आरोपियों को अदालत में पेश किया, जहां से मुख्य कड़ियों को जोड़ने के लिए आरोपी निशांत और शोएब को तीन दिन के पुलिस हिरासत रिमांड पर लिया गया है। रिमांड के दौरान पुलिस इनसे गिरोह के मुख्य सरगना, नेटवर्क और अब तक की गई करोड़ों रुपये की ठगी के वित्तीय लेनदेन के संबंध में गहनता से पूछताछ कर रही है। मामले की तफ्तीश जारी है।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गिरोह का मुख्य मास्टरमाइंड कौन है?
पूछताछ में यह भी सामने आया कि इस गिरोह का मास्टरमाइंड कोई और है, जो इन्हें व्हाट्सऐप के जरिए फर्जी नामों पर एक्टिवेटेड सिम कार्ड, बैंक खातों की किट और क्यूआर कोड उपलब्ध करवाता था।
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