
स्कूलों के शिक्षक अब गैर-शैक्षणिक कार्य नहीं करेंगे
बदलाव: -220 दिन शिक्षक-छात्र स्कूलों में उपस्थिति अनिवार्य -विद्यालय शिक्षा निदेशालय की ओर से निर्देश जारी हुआ -गैर शैक्षणिक कार्य से शिक्षको को तत्का
गुरुग्राम, कार्यालय संवाददाता। जिले के राजकीय स्कूलों में 40 प्रतिशत शिक्षकों को अब गैर-शैक्षणिक कार्य नहीं करेंगे। यह शिक्षक स्कूलों में बच्चों को पढ़ाने की अपेक्षा दूसरे विभागों का काम कर रहे है। शिक्षकों को वापस कक्षाओं में लौटना होगा। विद्यालय शिक्षा निदेशालय की ओर से निर्देश जारी हुआ है। जिसमें पढ़ाने के अलावा दूसरे कामों में लगे शिक्षकों को वेतन नहीं मिलेगा। यदि वेतन जारी हुआ, तो इसके लिए आहरण एवं वितरण अधिकारी (डीडीओ) जिम्मेदार होंगे। शिक्षकों को वापस बुलाने का आर्डर जारी: राजकीय स्कूलों में वार्षिक परीक्षाओं को लेकर शिक्षा निदेशालय ने दूसरे विभागों में काम कर रहे सभी शिक्षकों को वापस बुलाने का ऑर्डर जारी कर दिया है।

सभी जिला शिक्षा अधिकारियों, मौलिक शिक्षा अधिकारियों, जिला परियोजना समन्वयक और खंड शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए गए है कि किसी भी स्थिति में अध्यापकों को गैर शैक्षणिक कार्य नहीं दिए जाएं। यही नहीं,सरकारी स्कूलों में किसी भी प्रकार की बैठकें भी नहीं की जा सकेंगी. जरूरी होने पर सिर्फ ऑनलाइन मीटिंग कर पाएंगे। नहीं दिया जा सकता गैर शैक्षणिक कार्य: शिक्षा निदेशालय ने धारा 27 के मुताबिक अध्यापकों को किसी भी प्रकार का गैर-शैक्षणिक कार्य नहीं सौंपा जा सकता सिवाय उन जिन्हें अधिनियम में विशेष रूप से छूट दी गई है। हर विद्यार्थी व अध्यापक को 220 शैक्षणिक दिवसों की उपस्थिति सुनिश्चित की गई। ऐसे में जरूरी है कि सभी अध्यापक विद्यालय में मौजूद रहकर बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा दें। आदेशों में साफ बताया गया है कि सभी अध्यापकों, जो अन्य विभागों के कार्यालयों में गैर शैक्षणिक कामों में ड्यूटी कर रहे हैं। उन्हें तत्काल प्रभाव से बिना किसी विलंब के कार्य मुक्त कर स्कूलों में ज्वांइन कराया जाए। निदेशालय की लिखित अनुमति के बिना नहीं लगेंगे शिक्षक: जारी निर्देश में चेतावनी दी गई है कि भविष्य में गैर-शैक्षणिक कार्य देने की प्रक्रिया निदेशालय की लिखित अनुमति के बिना नहीं हो पाएगी। अगर किसी जिले में कोई बहुत जरूरी कार्य हो, तो नियुक्ति से पहले प्रस्ताव निदेशालय को भेजा जाए। निदेशालय से अनुमति मिलने के बाद ही ऐसे काम के लिए अध्यापक की तैनाती की जा सकेगी। छात्रों के शिक्षण कार्य प्रभावित होते हैं: जिला प्राथमिक शिक्षक संघ अध्यक्ष अशोक कुमार प्रजापति ने कहा कि शिक्षा निदेशालय को शिकायतें की गई थी कि सरकारी स्कूलों के अध्यापकों को कई तरह के गैर-शैक्षणिक कार्य सौंपे जा रहे हैं। जिले का 40 प्रतिशत अध्यापक का स्टाफ बीएलओ समेत अन्य ड्यूटी में व्यस्त है। 60 प्रतिशत अध्यापक स्कूल में होते है। वह भी विभाग को जानकारी देने में लगे रहते है। इससे छात्रों के शिक्षण कार्य प्रभावित होते हैं। शिक्षकों का कार्य मुक्त कर मूल स्थान पर भेजा जाए: जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी सरोज दहिया ने निदेशालय के निर्देश मिलने के बाद जिला निर्वाचन अधिकारी को पत्र लिखा है। जिसमें कहा है कि सोहना, पटौदी, बादशाहपुर, गुरुग्राम विधानसभा निर्वाचन अधिकारी सरकारी स्कूलों में कार्यरत अध्यापकों को गैर शैक्षणिक कार्य नहीं सौंप जाए। जो भी अध्यापक चुनाव कार्य में लगाए गए हैं। उनको तुरंत कार्य मुक्त कर मूल स्थान पर भेजा जाए। ताकि सूचना मौलिक शिक्षा महानिदेशक पंचकूला को भेजी जा सके।

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