
चौदह अधिकारियों ने खुद दे दी सौ करोड़ के टेंडर की अनुमति
गुरुग्राम नगर निगम में 100 करोड़ रुपये के कूड़ा निस्तारण टेंडरों में गड़बड़ी का मामला सामने आया है। 14 अधिकारियों ने बिना मुख्यमंत्री की अनुमति के टेंडर लगाए। यूएलबी मुख्यालय ने नौ अधिकारियों पर चार्जशीट की कार्रवाई के आदेश दिए हैं। जांच में मिलीभगत के सबूत मिले हैं और कई एजेंसियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है।
गुरुग्राम, वरिष्ठ संवाददाता। नगर निगम गुरुग्राम (एमसीजी) में टेंडर देने के नाम पर बड़ी गड़बड़ी सामने आई है। एक चौंकाने वाले खुलासे में यह सामने आया है कि निगम के 14 अधिकारियों ने इन टेंडर की मुख्यमंत्री की प्रशासनिक अनुमति नहीं ली। अधिकारियों ने नियमों को अनदेखा करके अपनी मर्जी से 100 करोड़ तक के कूड़ा निस्तारण टेंडर लगा दिए। इस मामले में शहरी स्थानीय निकाय विभाग (यूएलबी) मुख्यालय ने सख्ती दिखाते हुए नौ अधिकारियों पर चार्जशीट की कार्रवाई करने के आदेश दिए हैं, क्योंकि आरोप है कि यह टेंडर मिलीभगत कर एजेंसियों को सौंपा गया था। बता दें कि बंधवाड़ी प्लांट में कूड़े के पहाड़ कई 15 साल से बने हुए हैं।
इसको लेकर एक मामला एनजीटी में विचाराधीन है। एनजीटी के आदेश पर निगम ने 2019 में कूड़ा निस्तारण का काम शुरू किया था। इसी कूड़े के निस्तारण के लिए निगम ने 2024 में बंधवाड़ी पर 5.0 लाख मीट्रिक टन लेगेसी वेस्ट (फेज-5), 5.0 लाख मीट्रिक टन (फेज-6) और 4.0 लाख एमटी (फेज-7) के लिए करीब सौ करोड़ रुपये के तीन टेंडर लगाए थे। नियमों के अनुसार इन टेंडरों को लगाने से पहले इनका प्रस्ताव बनाकर शहरी स्थानीय निकाय विभाग को भेजना होता है। इसके बाद सौ करोड़ के कार्यों के प्रस्तावों की प्रशानिक अनुमति मुख्यमंत्री द्वारा दी जाती है। लेकिन निगम अधिकारियों ने ऐसा नहीं करके अपने स्तर पर ही 14 अधिकारियों की एक समिति का गठन कर लिया और इन तीनों टेंडरों को बिना प्रशानिक अनुमति के ही टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी। ------------- - ऐसे पकड़ में गड़बड़ी नगर निगम के तत्कालीन अधिकारियों ने सौ करोड़ के तीनों कार्यों की टेंडर प्रक्रिया पूरी करके इसकी प्रशासनिक अनुमति और टेंडर अलॉट करने का प्रस्ताव मुख्यालय को भेज दिया। जब इन सौ करोड़ के तीनों टेंडरों की अनुमति के लिए फाइल मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के पास पहुंची तो उन्होंने इस गड़बड़ी को पकड़ लिया। मुख्यमंत्री ने इन टेंडरों को अलॉट करने की अनुमति तो दे दी, लेकिन फाइल पर अधिकारियों को आदेश दिए कि बिना प्रशानिक अनुमति के टेंडर लगाने वाले सभी अधिकारियों को चार्जशीट किया जाए। इसके बाद शहरी स्थानीय निकाय विभाग ने अगस्त -2025 में नगर निगम गुरुग्राम के आयुक्त को इन टेंडरों को अनुमति देने वाले अधिकारियों के खिलाफ चार्जशीट की सिफारिश करने के निर्देश दिए थे, लेकिन चार माह बीत जाने के बाद भी निगम आयुक्त की तरफ से इनके खिलाफ कार्रवाई के लिए मुख्यालय को कोई पत्र नहीं भेजा। ------------ - बिना काम के ही बिलों के भुगतान के फिराक में थी एजेंसियां निगम सूत्रों के अनुसार निगम अधिकारियों की मिलीभगत से ही इन टेंडरों को बिना प्रशासनिक अनुमति के ही लगा दिया था। इसके बाद निगम ने चहेती एजेंसियों को यह टेंडर अलॉट भी कर दिए थे। सूत्रों के अनुसार टेंडर जारी करने के लिए निगम के कई उच्च अधिकारियों ने मोटा कमीशन भी दिया गया था। यही कारण था कि अधिकारी टेंडर प्रक्रिया पूरी करके सरकार को अनुमति के लिए भेजा, ताकि मुख्यालय स्तर के अधिकारी इस पर कोई रोक नहीं लगा सके। मामले में यह भी खुलासा हुआ है कि जब निगम के अधिकारियों के तबादले हुए तो इन तीनों एजेंसियों के काम की जांच की गई। जांच में सामने आया कि एजेंसियों ने टेंडर की नियम व शर्तों के अनुसार काम ही नहीं किया, इसके बाद भी एजेंसियों के बिलों का भुगतान किया गया। जब दूसरी टीम ने इन एजेसियों के काम की जांच की तो एजेंसियों का काम संतोष जनक नहीं मिला। इस कारण निगम ने इन एजेंसियों पर करीब नौ करोड़ रुपये का जुर्माना भी लगाया और एजेसियों के टेंडर को रद्द भी कर दिया। यह कार्रवाई जुलाई 2025 में की गई। -------------- - 14 की जगह दस अधिकारियों पर ही कार्रवाई पर सवाल मामले में शामिल एक अधिकारी ने बताया कि इस समिति में उच्च अधिकारियों ने 14 निगम के अधिकारियों को शामिल किया गया था। इसमें कई उच्च अधिकारी भी शामिल थे। लेकिन शहरी स्थानीय निकाय विभाग द्वारा भेजे गए पत्र में सिर्फ दस अधिकारियों के नाम को शामिल किया गया है। अन्य अधिकारियों के नाम को क्यों नहीं शामिल किया गया है। इसका खुलासा नहीं हुआ है। निगम सूत्रों अनुसार सिफारिश वाले अधिकारियों ने अपने नाम इस सूची से हटावा लिए हैं। -------------- :कोट मामले जांच करवाकर जल्द से जल्द इनके खिलाफ चार्जशीट तैयार करके मुख्यालय को भेजी जाएगी। - प्रदीप दहिया, निगम आयुक्त, गुरुग्राम।

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