बूस्टिंग स्टेशनों का संचालन और रखरखाव निजी एजेंसियों को सौंपा जाएगा

Newswrap हिन्दुस्तान, गुड़गांव
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गुरुग्राम में नगर निगम ने गर्मियों में पीने के पानी की कमी को दूर करने के लिए 38 करोड़ रुपये की योजना बनाई है। यह योजना पेयजल नेटवर्क की मरम्मत, बूस्टिंग स्टेशनों और ट्यूबवेल के रखरखाव के लिए निजी एजेंसियों को दो साल के लिए काम सौंपने पर आधारित है। इससे पानी की आपूर्ति में सुधार होगा।

बूस्टिंग स्टेशनों का संचालन और रखरखाव निजी एजेंसियों को सौंपा जाएगा

गुरुग्राम, कृष्ण कुमार। शहर के लोगों को अब गर्मी के दिनों में पीने के पानी की किल्लत का सामना नहीं करना पड़ेगा। शहर की पेयजल व्यवस्था को दुरुस्त करने और पानी की आपूर्ति को सुचारू बनाने के लिए नगर निगम ने एक बड़ी योजना तैयार की है। इसके तहत शहर के पेयजल नेटवर्क को सुधारने पर 38 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। नगर निगम ने पानी की आपूर्ति, बूस्टिंग स्टेशनों, डिस्ट्रीब्यूशन पाइपलाइन और ट्यूबवेल के संचालन व रखरखाव का काम अगले दो साल के लिए निजी एजेंसियों को सौंपने का फैसला किया है। इसके लिए अलग-अलग वार्डों के हिसाब से अनुमान तैयार कर लिए गए हैं और जल्द ही निजी कंपनियों से आवेदन मांगे जाएंगे।

निगम अधिकारियों को उम्मीद है कि इस नई व्यवस्था से पानी की लीकेज और आपूर्ति से जुड़ी शिकायतें जल्द से जल्द दूर हो सकेंगी। पहले यह काम छोटी अवधि के लिए दिया जाता था, लेकिन अब दो साल का टेंडर होने से काम में निरंतरता आएगी और स्थानीय निवासियों को बड़ी राहत मिलेगी। अभी तक कभी छह माह के लिए तो भी तीन माह के लिए एजेंसियों को रखरखाव का जिम्मा सौंपा जाता था। जिस कारण सेक्टरों और कॉलोनियों में लोगों को तमाम परेशानियां हो रही थी।वार्डों के हिसाब से बांटे गए करोड़ों के टेंडरनगर निगम ने काम को सुचारू रूप से चलाने के लिए वार्डों को अलग-अलग हिस्सों में बांटा है। वार्ड 11, 14, 15 और 18 में पेयजल नेटवर्क के रखरखाव के लिए 9.3 करोड़ रुपये का एस्टीमेट है। वार्ड 1, 12 और 13 के लिए 7.9 करोड़ रुपये का टेंडर होगा। इसी तरह वार्ड 9, 10, 16 और 17 में काम के लिए 6.9 करोड़ रुपये, जबकि डिवीजन 4ए के तहत वार्ड 20, 21 और 22 में 5.9 करोड़ खर्च होंगे। वहीं, वित्तीय वर्ष 2026-28 के लिए डिवीजन 3बी में बूस्टिंग स्टेशनों के लिए 3.8 करोड़ और वार्ड 24, 25 व 26 के लिए 3.6 करोड़ रुपये का टेंडर जारी किया जाएगा।छोटी अवधि के टेंडर खत्म, अब मिलेगा स्थायी समाधाननगर निगम के कार्यकारी अभियंता संदीप सिहाग ने बताया कि शहर भर में पानी की आपूर्ति के रखरखाव में एकरूपता लाने के लिए अब सीधे दो साल के टेंडर निकाले जा रहे हैं। पहले यह टेंडर बहुत कम समय के लिए होते थे। इसका मुख्य उद्देश्य यही है कि पानी की पाइपलाइनों और ट्यूबवेल से जुड़ी जो भी नियमित शिकायतें आएं, उनका तुरंत समाधान किया जा सके। अब एजेंसियों की जिम्मेदारी तय होगी जिससे काम तेजी से होगा।एजेंसियों के पास पर्याप्त कर्मचारी होंनगर निगम के इस कदम का स्थानीय लोगों ने स्वागत किया है, लेकिन कुछ चिंताएं भी जाहिर की हैं। सुशांत लोक 2 और 3 आरडब्ल्यूए के अध्यक्ष पवन यादव का कहना है कि दो साल का टेंडर एक सकारात्मक कदम है, लेकिन निगम को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि काम लेने वाली एजेंसियों के पास पर्याप्त कर्मचारी हों। कई बार ऐसा होता है कि एजेंसी कई स्टेशनों के लिए केवल एक ही कर्मचारी नियुक्त कर देती है। ऐसे में मशीनरी या मोटर खराब होने पर मरम्मत में कई दिन लग जाते हैं, जिससे लोगों को परेशानी होती है।

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