
तय संख्या में नहीं पहुंच रहे सफाई कर्मचारी, सदन में हंगामा
संक्षेप: मेयर की अध्यक्षता में हुई बैठक; निगमायुक्त ने अनुपस्थित कर्मचारियों पर जुर्माना लगाने के दिए निर्देश
गुरुग्राम। नगर निगम गुरुग्राम (एमसीजी) की सदन की बैठक बुधवार को सेक्टर-18 स्थित हिपा में मेयर राज रानी मल्होत्रा की अध्यक्षता में आयोजित हुई। जिसकी शुरुआत में ही सफाई कर्मचारियों की अनुपस्थिति को लेकर जोरदार हंगामा हुआ। निगम पार्षदों ने आरोप लगाया कि उनके वार्डों में तय संख्या में सफाई कर्मचारी नहीं पहुंच रहे हैं, लेकिन निगम अधिकारी मिलीभगत से इन कर्मचारियों के वेतन और निजी एजेंसियों के बिलों का भुगतान बिना काम के ही कर रहे हैं। इसी मुद्दे पर पार्षद धर्मबीर और पार्षद अनूप आपस में भिड़ गए। अनूप पार्षद ने कहा कि उनके यहां काम हो रहें, लेकिन धर्मबीर भांगरोला ने कहा कि क्या वह गलत बात उठा रहे हैं।

इसी बात को लेकर दोनों पार्षदों में तेज बहस हुई। इसके बाद वार्ड-22 के पार्षद विकास यादव ने कहा कि अगर अधिकारी कहीं सही काम कर रहे हैं तो उनका धन्यवाद भी करना चाहिए। वहीं पार्षद आरती राव ने कहा कि सफाई एजेंसियों के टेंडरों को रद्द करना चाहिए, लेकिन निगम काम नहीं करने वाली एजेसियों को छह माह की एक्सटेंशन दे रहे हैं। यह बिल्कुल गलत है। पार्षद आशीष गुप्ता ने भी एजेंसियों के काम से असंतुष्टि जाहिर की। पार्षदों ने इस भ्रष्टाचार को रोकने के लिए एक महत्वपूर्ण मांग रखी। उन्होंने कहा कि सफाई कर्मचारियों का रजिस्टर पार्षदों के पास होना चाहिए और कर्मचारियों को वेतन का भुगतान पार्षदों के हस्ताक्षर के बाद ही किया जाना चाहिए। पार्षदों के भारी विरोध और हंगामे को देखते हुए, निगम आयुक्त ने सदन में कड़े निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि तय संख्या में काम पर नहीं पहुंचने वाले सफाई कर्मचारियों पर अब जुर्माना लगाया जाएगा, ताकि शहर की स्वच्छता व्यवस्था सुनिश्चित की जा सके। वहीं विधायक मुकेश शर्मा ने कहा कि कर्मचारियों की हाजिरी का रजिस्टर पार्षदों के पास होना चाहिए और पार्षदों को ही कमेटी का चैयरमेन बनाना चाहिए। इस पर निगम आयुक्त ने आपत्ति जताई, लेकिन विधायक ने कहा कि ऐसी कोई बात नहीं है। पार्षदों को कमेटी का चैयरमैन बनाया जाए। जबकि निगम आयुक्त ने कहा कि एक अधिकारियों की कमेटी बनाई जाएगी। इस पर विधायक ने पार्षदों की निगरानी में ही कमेटी बनाने की बात कही। वार्ड अनुसार लगें सफाई टेंडर, बड़ी एजेंसियों को न मिले काम नगर निगम की सदन की बैठक में सफाई कर्मचारियों की संख्या और कार्यप्रणाली पर हंगामा होने के बाद, सभी पार्षदों ने एकजुट होकर सफाई व्यवस्था में सुधार के लिए एक महत्वपूर्ण मांग रखी है। पार्षदों ने सर्वसम्मति से कहा कि सफाई के लिए वार्ड अनुसार टेंडर लगाए जाने चाहिए और बड़ी एजेंसियों को यह काम नहीं दिया जाना चाहिए। पार्षदों ने एक सुर में आरोप लगाया कि बड़ी एजेंसियां उनके वार्डों में सफाई का काम ठीक से नहीं कर रही हैं। उन्होंने कहा कि एजेंसियों के कर्मचारी वार्डों में नियमित रूप से नहीं आते हैं। नियत संख्या में कर्मचारी नहीं पहुंचते, जिससे गंदगी फैलती है और जनता में आक्रोश पैदा होता है। पारदर्शिता लाने और स्थानीय स्तर पर जवाबदेही तय करने के लिए सभी पार्षदों ने निगम प्रशासन से मांग की है कि वार्ड अनुसार टेंडर का एजेंडा तत्काल पास किया जाए। उनका मानना है कि छोटे टेंडर लगने से स्थानीय स्तर पर नियंत्रण बढ़ेगा और काम करने वाली एजेंसियों की जवाबदेही सुनिश्चित हो सकेगी। इस पर निगम आयुक्त ने कहा शहर में दो कलस्टर में टेंडर लगेंगे। इसको लेकर प्रस्ताव सरकार को भेजा जा चुका है। सरकार की पॉलिसी के खिलाफ सदन का प्रस्ताव पास नहीं हो सकता है। इस पर पार्षदों ने आपत्ति जताई और कहा कि इसे कार्रवाई के लिए सरकार को भेजा जाए। सदन में गूंजा मुद्दा: रिहायशी क्षेत्रों के शराब ठेके हों बंद सदन की बैठक में शहर के रिहायशी क्षेत्रों, बाजारों और मार्केटों में चल रहे शराब के ठेकों को बंद करने का मुद्दा पार्षदों ने प्रमुखता से उठाया। पार्षदों ने तर्क दिया कि यह ठेके उनके वार्डों के वातावरण को दूषित कर रहे हैं और सुरक्षा के लिए खतरा बन रहे हैं। पार्षद ज्योत्सना यादव ने कहा कि डूंडाहेड़ा के रिहायशी क्षेत्रों में कई शराब के ठेके चल रहे हैं। पार्षद आशीष गुप्ता ने कहा कि सदन बाजार में गलत तरीके से शराब का ठेका संचालित हो रहा है उसे बंद किया जाए। राजेंद्रा पार्क में भी दो से तीन शराब के ठेकों को बंद करने का मुद्दा उठाया गया। जिस निगम आयुक्त ने कहा कि इसको लेकर आबकारी अधिकारियों के साथ बैठक करके इनका समाधान करवाया जाएगा। नगर निगम अब घरों में लगवाएगा पानी के मीटर शहर में पानी को व्यर्थ बहने से रोकने के लिए निगम की तरफ से अब घरों में पानी के मीटर लगवाए जाएंगे। इसको लेकर लोगों को अब फीस ही निगम में जमा करवानी है। अभी तक लोगों को खुद ही पानी के मीटर घरों में लगवाने पड़ रहे थे, लेकिन अब निगम द्वारा ही यह मीटर लगवाए जाएंगे। पार्षदों ने बैठक में कहा कि लोगों को गलत पानी के बिल भेजे जा रहे हैं। 85-85 हजार रुपये पानी के बिलों के आ रहे हैं तो निगम आयुक्त ने कहा कि जिन लोगों ने पानी के बिल लंबे समय से नहीं भरे हैं उनके ज्यादा बिल आ रहे हैं। इस पर अतिरिक्त निगम आयुक्त यश जालूका ने कहा कि शहर में निगम के पास एक लाख 91 हजार पानी के कनेशन है। जिन में से 27 हजार लोगों ने ही पानी के मीटर लगवाए हुए हैं। जबकि शहर में संपत्तिकर आईडी सात लाख है। एक लाख खाली प्लॉट को छोड़ दे तो छह लाख पानी के कनेक्शन निगम के पास होने चाहिए थे, लेकिन ऐसा नहीं है। अब निगम की तरफ से पानी के मीटर लगाने का काम किया जाएगा।

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