
टेंडर के अनुसार वाहनों से कूड़े का नहीं हो रहा उठान, फिर भी पूरा भुगतान
- 400 की जगह चल रहे हैं मुश्किल से 300 वाहन, ट्रैक्टरों की बिना जीपीएस जांच किए ही हो रहा भुगतान
गुरुग्राम, वरिष्ठ संवाददाता। नगर निगम गुरुग्राम (एमसीजी) में निजी एजेंसियों द्वारा घर-घर से कूड़ा उठाने के कार्य में गंभीर लापरवाही और भुगतान में धांधली का मामला सामने आया है। निगम ने 400 वाहन लगाकर घरों से कूड़ा उठाने के लिए चार निजी एजेंसियों (वाईएलवी, आरएस इंटरप्राइजेज, संजय एंड कंपनी और आर्मी डेकोरेटर) को टेंडर दिया था, लेकिन चार माह से अधिक का समय बीत जाने के बावजूद एजेंसियां पूरे वाहन नहीं लगा पाई हैं, फिर भी उन्हें पूरा भुगतान किया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, टेंडर के तहत 400 वाहनों की आवश्यकता थी, लेकिन मुश्किल से 300 वाहन ही चल रहे हैं।
इससे भी अधिक गंभीर बात यह है कि निगम बिना किसी जीपीएस रिपोर्ट की जांच किए ही ट्रैक्टरों और अन्य वाहनों का लाखों रुपये का भुगतान कर रहा है। यहां तक कि पार्षदों द्वारा लगाए गए वाहनों की संख्या और कार्यक्षमता की भी कोई जांच नहीं हो रही है। जुर्माना लगाने के नाम पर भी सिर्फ खानापूर्ति की जा रही है। पानीपत में कार्रवाई, गुरुग्राम में मेहरबानी सफाई में हो रही इस भारी चूक का खामियाजा शहर की जनता को प्रदूषण के रूप में भुगतना पड़ रहा है, क्योंकि कूड़ा न घरों से उठ रहा है और न ही सड़कों के किनारों से। एक ओर जहां पानीपत निगम ने सौ फीसदी घरों से कूड़ा न उठाने पर कंपनी के खिलाफ मुकदमा दर्ज करवाया है, वहीं गुरुग्राम निगम के अधिकारी अपनी निजी एजेंसियों पर मेहरबान हैं और उन पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो रही है। निगम अधिकारियों की इस घोर लापरवाही के कारण शहर की हवा लगातार प्रदूषित हो रही है। जीवीपी प्वाइंट पर गायब हैं कर्मचारी नगर निगम ने शहर में 200 से अधिक जगहों पर जीवीपी प्वाइंट बनाए हुए हैं। इन जीवीपी प्वाइंट पर ट्रैक्टर-ट्रॉली को खड़ा किया जाता है, ताकि लोग कूड़ा खुले में डालने की बजाय इन ट्रॉलियों में कूड़ा डाल दे। इसके लिए ट्रॉली के पास दो कर्मचारियों को तैनात करना होता है, लेकिन निगम के किसी भी जीवीपी प्वाइंट पर निजी एजेंसी ने एक भी कर्मचारी को नहीं लगाया हुआ है। इस लापवाही के बाद भी एजेंसियों को पूरा भुगतान हो रहा है। भविष्य की कोई योजना नहीं इन निजी एजेंसियों का टेंडर 8 जनवरी को समाप्त हो जाएगा। इसके बावजूद, निगम ने अभी तक आगे के लिए कोई नई योजना या टेंडर प्रक्रिया तैयार नहीं की है, जिससे यह आशंका है कि शहर में सफाई व्यवस्था और भी चरमरा सकती है और भुगतान की अनियमितताएं जारी रहेंगी। एजेंसियों पर नियमों के अनुसार जुर्माना लगाया जा रहा है। जीपीएस रिपोर्ट के आधार पर ही इनका भुगतान होता है। - सुंदर श्योराण, कार्यकारी अभियंता, नगर निगम, गुरुग्राम।

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