
डीएलएफ के चार हजार मकान मालिक 31 तक पक्ष रख सकेंगे
गुरुग्राम में नगर एवं ग्राम नियोजन विभाग ने 4,183 मकान मालिकों को 31 दिसंबर तक अपना पक्ष रखने का अवसर दिया है। इन पर अवैध निर्माण और कब्जा प्रमाणपत्र के उल्लंघन का आरोप है। सुप्रीम कोर्ट ने उच्च न्यायालय के आदेश को रद्द कर सुनवाई का निर्देश दिया। अगली सुनवाई 15 जनवरी को होगी।
गुरुग्राम। नगर एवं ग्राम नियोजन विभाग के डीटीपीई अमित मधोलिया ने डीएलएफ फेज-एक से लेकर फेज-पांच तक निर्मित चार हजार 183 मकान मालिकों को 31 दिसंबर तक पक्ष रखने की मोहलत दी है। इन मकान मालिकों पर कब्जा प्रमाणपत्र और नक्शे का उल्लंघन करके अवैध निर्माण करने और अवैध रूप से व्यावसायिक गतिविधियों के संचालन का आरोप है। इस समयावधि के बाद पक्ष पर सुनवाई नहीं होगी। पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने गत 13 फरवरी को साल 2021 में डीएलएफ सिटी आरडब्ल्यूए की याचिका पर नगर एवं ग्राम नियोजन विभाग को आदेश जारी किए थे कि कब्जा प्रमाणपत्र और नक्शे का उल्लंघन करके निर्मित मकानों पर नियमानुसार विभागीय कार्रवाई अमल में लाई जाए।

यह आदेश मिलने के बाद डीटीपीई कार्यालय ने जनवरी माह में किए सर्वे के आधार पर चार हजार 183 मकानों के खिलाफ कार्रवाई करना शुरू कर दी थी। सभी मकानों को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिए थे। करीब 2100 मकानों को कारण बताओ नोटिस के बाद उनके खिलाफ रिस्टोरेशन आदेश पारित कर दिए थे। इस बीच डीएलएफ निवासियों ने सुप्रीम कोर्ट में पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के इस आदेश के खिलाफ याचिका दायर कर दी। लोगों ने आरोप लगाया कि उच्च न्यायालय की तरफ से उनका पक्ष नहीं सुना गया। 28 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट ने उच्च न्यायालय के पुराने आदेश को रद्द करते हुए दिशा-निर्देश जारी किए थे कि प्रभावित मकान मालिकों को सुनवाई का मौका दिया जाए। गत 26 नवंबर को इस मामले में दोबारा उच्च न्यायालय में सुनवाई हुई। इसमें नगर एवं ग्राम नियोजन विभाग के डीटीपीई को निर्देश जारी किए कि इन मकान मालिकों को सुनवाई का मौका दिया जाए। इनकी आपत्तियां ली जाएं। वेबसाइट पर डाली गई मकान मालिकों की सूची डीटीपीई ने सर्वे में शामिल सभी मकानों की सूची को नगर एवं ग्राम नियोजन विभाग की वेबसाइट tcpharyana.gov.in पर डाल दिया है। लोगों से आग्रह किया है कि वे 31 दिसंबर तक डीटीपीई कार्यालय में कारण बताओ नोटिस पर अपनी आपत्ति दें। इन आपत्तियों की सुनवाई के बाद पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय को अवगत करवाकर अगले दिशा-निर्देश लिए जाएंगे। आपत्ति दर्ज करवाने के दौरान आपत्ति के साथ, मकान मालिक को अपना नाम, पता, संपर्क नंबर अनिवार्य रूप से देना होगा। उच्च न्यायालय में अगली सुनवाई 15 जनवरी को पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में इस मामले में अगली सुनवाई 15 जनवरी को होगी। आपत्तियां लेने के बाद उसकी जांच डीटीपीई कार्यालय की तरफ से की जाएगी। इसके बाद उच्च न्यायालय में जवाब दाखिल किया जाएगा। क्या थे सुप्रीम कोर्ट के आदेश सुप्रीम कोर्ट में याचिकाकर्ताओं ने कहा था कि न तो प्रभावित लोगों का पक्ष सुना गया और न ही उन्हें पक्षकार बनाया गया। सुप्रीम कोर्ट ने आदेश जारी किए कि दो सप्ताह के अंदर याचिकाकर्ताओं को उच्च न्यायालय में याचिका दायर करनी है। छह महीने की समयावधि के दौरान उच्च न्यायालय ने जांच के बाद इस मामले में फैसला सुनाना है। नियमानुसार क्या कार्यवाही होती है यदि किसी मकान में नक्शा या कब्जाप्रमाण पत्र का उल्लंघन मिलता है तो डीटीपीई कार्यालय के पास उस मकान को सील करने का अधिकार है। इसके अलावा उसके कब्जा प्रमाणपत्र और नक्शे को रद्द किया जाता है। मकान में खरीद-फरोख्त को रोक लगाई जाती है। कानूनी कार्रवाई करने का प्रावधान है। वर्जन--- नगर एवं ग्राम नियोजन विभाग की वेबसाइट पर कब्जा प्रमाणपत्र और नक्शे का उल्लंघन करके निर्मित मकानों की सूची को डाल दिया है। इस वेबसाइट पर जाकर लोग सूची को देख सकते हैं। 31 दिसंबर तक उन्हें कोई आपत्ति है तो वे दायर कर सकते हैं। इस समयावधि के बाद सुनवाई नहीं होगी। - अमित मधोलिया, डीटीपीई, नगर एवं ग्राम नियोजन विभाग ----------- डीएलएफ फेज-पांच के अधिकांश ईडब्ल्यूएस परिवारों ने नक्शे के उल्लंघन को हटा दिया है। डीटीपीई कार्यालय को एक बार पुन: सर्वे करके कार्रवाई करनी चाहिए। उल्लंघन को वैध करवाने के लिए मकान मालिक जुर्माना राशि जमा करवाने को तैयार हैं। - सतपाल यादव, अधिवक्ता, प्रभावित ईडब्ल्यूएस परिवार

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