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गुरुग्राम को अध्यादेश से मिला अपना विकास प्राधिकरण

गुरुग्राम जिले के 20 लाख लोगों के लिए खुशखबरी है। शहर के विकास की कार्ययोजनाएं अब उनके अपने विकास प्राधिकरण में बनेंगी। गुरुवार को राज्य सरकार ने अध्यादेश के जरिए गुरुग्राम महानगर विकास प्राधिकरण (जीएमडीए) के गठन को विधिक मान्यता दे दी। मुख्यमंत्री मनोहर लाल की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में गुरुग्राम महानगर विकास प्राधिकरण (जीएमडीए) अध्यादेश, 2017 पर मुहर लगाई गई। गौरतलब हो कि 18 अप्रैल को सरकार ने कैबिनेट की बैठक में गुरुग्राम महानगर विकास प्राधिकरण (जीएमडीए) विधेयक, 2017 मंजूरी दे दी थी और आगामी विधान सभा सत्र में रखने का ऐलान किया था। लेकिन जीएसटी बिल को पास करने के लिए बुलाए गए 4 मई को विशेष सत्र में इसे नहीं रखा जा सका था। हालांकि सरकार को अभी जीएमडीए बिल को सदन से पास करवाना होगा। नहीं तो अध्यादेश की संवैधानिक ताकत खत्म हो जाएगी। सात महीने का सफर: साइबर सिटी को मुख्यमंत्री मनोहर लाल की घोषणा के बाद जीएमडीए के लिए सात महीने का इंतजार करना पड़ा, हालांकि इसके गठन की मांग नगर निगम के बनने के साथ ही शुरू हो गई थी। मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने 5 अक्तूबर, 2016 को गुरुग्राम को विकास प्राधिकरण देने का ऐलान किया था। इसके बाद विभिन्न पड़ावों से गुजरने के बाद गुरुवार को इंतजार खत्म हो गया। फिलहाल निगमायुक्त और वरिष्ठ आईएएस वी उमाशंकर को जीएमडीए के ओएसडी हैं। उन्हीं के पहले सीईओ बनने की संभावना जताई जा रही है। वी उमाशंकर 1 नवंबर, 2016 से ओएसडी का कार्यभार संभाल रहे हैं। सीएम होंगे अध्यक्ष: जीएमडीए के अध्यक्ष मुख्यमंत्री होंगे। इसके अलावा प्राधिकरण को सलाह देने और इसकी शक्तियों के इस्तेमाल और कार्यों के प्रदर्शन के संबंध में मार्गदर्शन करने के लिए एक निवासी सलाहकार परिषद होगी। मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) इस निवासी सलाहकार परिषद के अध्यक्ष होंगे, जो परिषद तथा अन्य सदस्यों की बैठक की अध्यक्षता करेंगे। यह परिषद अवसंरचना विकास, मोबिलिटी मैनेजमेंट तथा शहरी परिवेश के स्थाई प्रबंधन के लिए योजना हेतु वार्षिक कार्य योजना की निगरानी और कार्यान्वयन करेगी तथा सिफारिशें करेगी और परामर्श देगी। सीईओ द्वारा इन सिफारिशों के साथ-साथ की गई या की जाने वाली कार्रवाई का एक व्याख्यात्मक ज्ञापन प्राधिकरण के समक्ष रखा जाएगा। इतना ही नहीं राज्य सरकार अधिसूचना के लिए गुरुग्राम जिले के नियंत्रित क्षेत्रों की सीमाओं के अंदर आने वाले तथा शहरी विस्तार की क्षमता वाले किसी भी क्षेत्र तथा किसी भी या सभी स्थानीय प्राधिकरणों जैसे कि नगर निगम, गुरुग्राम, नगर परिषद, सोहना, नगरपालिका पटौदी, फर्रुख नगर और हेलीमंडी, और गुरुग्राम जिले में किसी भी पंचायत में किसी भी भूमि को आबादी देह घोषित कर सकती है। प्राधिकरण से फायदे: -सुनियोजित विकास -रोजगार का सृजन -बेहतर परिवहन साधन -संतुलित औद्योगिक विकास -पर्यावरण का बेहतर प्रबंधन बॉक्स: जीएमडीए के पड़ाव: -1 जून, 2017 को अध्यादेश लाकर जीएमडीए को विधिक मान्यता दी -18 अप्रैल,2017 को सरकार ने कैबिनेट में मंजूर किया -12 दिसंबर को बिल तैयार हुआ और सरकार को भेजा गया -1 नवंबर को आईएएस अधिकारी वी उमांशकर ने जीएमडीए के ओएसडी के तौर कार्यभार संभाला -30 अक्टूबर को हरियाणा सरकार ने नोटिफिकेशन जारी किया -5 अक्टूबर, 2016 में सीएम ने जीएमडीए का ऐलान किया टीओडी नीति को भी मंजूरी: राज्य सरकार ने संशोधित टीओडी नीति अधिसूचित की है, जो मास रैपिड ट्रांजिट सिस्टम परियोजनाओं के साथ कोरिडोर के घनत्व के साधन और इन मास रैपिड ट्रांजिट सिस्टम परियोजनाओं के वित्त पोषण के लिए राजस्व उत्पन्न करने के स्रोत के रूप में टीओडी के सृजन के लिए मानदंड निर्धारित करती है। इस नीति के तहत संग्रहित फीस या शुल्कों को अवसंरचना विकास कोष में एक पृथक हैड के तहत रखा जाएगा और इसका उपयोग केवल मास रैपिड ट्रांजिट सिस्टम परियोजनाओं के क्रियान्वयन के लिए किया जाएगा।

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